लखनऊ, 20 मई। भाजपा अपने को हताश देख साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण कराने और बढ़ चढ़ कर झूठ बोलने की अपनी चिर परिचित रणनीति अपना रही है, मगर उसका भी खास असर होता नहीं दिख रहा है। लोग मुद्दों पर वोट कर रहे हैं। संविधान, लोकतंत्र और देश बचाने का सवाल सामने है। दस साल के भाजपा शासन के बाद मतदाताओं में बदलाव का मूड है। चार जून को इसका नतीजा भी सामने आ जायेगा।
भाकपा माले ने पांचवें चरण के मतदान की समाप्ति पर प्रदेश में इंडिया गठबंधन की बढ़त का दावा किया है। पार्टी ने कहा है कि पिछले चार चरणों की भांति पांचवें चरण में भी मतदाताओं ने भाजपा को हराने और इंडिया गठबंधन की सरकार बनाने के लिए उत्साहपूर्वक मतदान किया है।
पार्टी के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने एक बयान में कहा कि भाकपा (माले) के कार्यकर्ता इंडिया गठबंधन के प्रत्याशियों को जिताने के लिए जमकर प्रचार अभियान चला रहे हैं। अवध क्षेत्र में भगवा खेमा पिछड़ रहा है। जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ रहा है, सत्ता-विरोधी रुझान बढ़ता जा रहा है। नौजवान बेरोजगारी और पेपर लीक से परेशान हैं। जनता महंगाई से त्रस्त है। किसानों की आय नहीं बढ़ रही है। पिछले दस सालों के अनुभव से बहुजनों में संविधान और आरक्षण को लेकर आशंकाएं बढ़ती जा रही हैं।
ब्रजभूषण शरण जैसे यौन आरोपियों को सत्ताधारी दल के मिले संरक्षण से महिला सुरक्षा को लेकर चिंता है। हर वर्ष दो करोड़ रोजगार, हरेक के खाते में 15-15 लाख रु, गरीबों को पक्का मकान, अच्छे दिन लाने जैसी पिछली गारंटियों के जुमला बन जाने से इस बार 'मोदी की गारंटी' काम करती नहीं दिख रही है।
0 टिप्पणियाँ