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चन्दौली में मनाया गया बिरांगना रानी दुर्गावती का शहादत दिवस

अदम्य साहस और शौर्य की प्रतिमूर्ति एवम 52 में से 51 युद्धों में अपराजेय के लिए सदैव याद की जाएंगी रानी 

चन्दौली। धर्म एवं राज्य की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाली, अदम्य साहस और शौर्य की प्रतिमूर्ति तथा 52 में से 51 युद्धों में अपराजेय रहीं महान वीरांगना रानी दुर्गावती का अखिल भारतीय गोंड आदिवासी संघ ने सदर स्थित एक लॉन में सोमवार को शहादत दिवस मनाया। वहीं एस.टी. मोर्चा के जिलाध्यक्ष शम्भू नाथ गोंड ने उनके तैल चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरूआत किया।

फोटो : सदर स्थित एक लॉन में अखिल भारतीय गोंड आदिवासी संघ रानी दुर्गावती का  शहादत दिवस मनाते हुए 

बतौर मुख्य अतिथि श्री शम्भू ने कहा कि 05अक्टूबर 1524 को बांदा में दुर्गाष्टमी के दिन कालिंजर के किले में राजा कीरत सिंह के घर में जन्मी गढ़ा राज्य की शासक महारानी को मुगल साम्राज्य के खिलाफ अपने राज्य की रक्षा के लिए याद किया जाता रहेगा। जिनकी तुलना केवल काकतीय वंश की रुद्रमा देवी और फ्रांस की जोन ऑफ आर्क से की जा सकती है।  युद्ध के नौ पारंपरिक व्यूहों में उनकी महारत थी. अकबर की सेना ने रानी दुर्गावती पर तीन बार आक्रमण किया, लेकिन रानी ने तीनों बार उन्हें पराजित कर दिया.

 एक महिला शासक से इतनी बार हारने के बाद असफ खां गुस्से से भर गया और 1564 में उसने एक बार फिर रानी के राज्य पर छल-कपट से सिंगारगढ़ को चारों ओर से घेर लिया और युद्ध में बड़ी तोपों का इस्तेमाल किया। रानी की आंख पर एक तीर लग गई। असमर्थ देखते हुए उन्होंने अपनी ही तलवार अपने सीने में घोंपकर 24जून 1556 को वीरगति को प्राप्त हो गई।

इस अवसर पर रवींद्रनाथ नाथ गोंड ,कल्लू प्रसाद गोंड, रमाशंकर गोंड, रघुनाथ गोंड,पिन्टू बाबा, रमापति गोंड,बिजय बार्डर गोंड, मनोज गोंड, संजय गोंड, संतोष गोंड,निधी गोंड, सावित्री देवी, राधिका देवी,शिला देवी,बसावन गोंड, राहुल गोंड, महेन्द्र गोंड सहित अन्य उपस्थित रहे।।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अध्यक्षता महादेव प्रसाद गोंड एवम् संचालन दुलारे प्रसाद गोंड
ने किया 

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