चंदौली,धीना। थाना क्षेत्र के कजहरा गांव में उपजे जमीनी विवाद में खूनी संघर्ष हो गया। एक पक्ष ने दूसरे पक्ष के एक युवक को फावड़े से वार कर दिया। सिर पर गम्भीर चोटें आने से ज़िला अस्पताल भर्ती कराया गया जहां हालत गंभीर देख डाक्टरों ने ट्रामा सेन्टर वाराणसी रेफर कर दिया। जहां ईलाज के दौरान रविवार को मौत हो गई।पुलिस तत्काल सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत करते अग्रिम कार्यवाही मे जुट गई है दोनो पक्षों में काफी तनाव को देख भारी मात्रा में पुलिस बल तैयान है। वहीं एक हत्यारा को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है।
प्राप्त जानकारी अनुसार कजहरा में अजय प्रजापति 38 को शनिवार की सुबह अपनी जमीन की चारदीवारी का निर्माण करते समय, उन्हें नरेंद्र सिंह और उनके बेटे आशीष सिंह और अभिषेक सिंह द्वारा उनकी निजी जमीन में रास्ता छोड़ने के लिए अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा था और कानूनी दावपेच लगाकर दो महीने से काम को रोके हुए थे,
वहीं अजय ने अपनी जमीन को रास्ते में देने से इंकार कर दिया। जिसपर विपक्षीगण उपरोक्त ने फावड़े से अजय के सिर पर वार कर दिया।अजय की हालत गंभीर देख परिजनों ने ट्रॉमा सेंटर वाराणसी में भर्ती कराया जहां ईलाज के दौरान मौत हो गई।मौत की सूचना के बाद परिवार में कोहराम मच गया गया।तनाव की स्थिति को देखते हुए आसपास के कई थानों की फोर्स तैनात हो गई।
मौके पर पहुंचे क्षेत्राधिकारी रघुराज ने बताया कि घटना में नामजद एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है, उक्त घटना के बाबत पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करने में जुट गई है,
हमेशा जमीनी विवाद बड़ी घटना का बना मूल कारण
जनपद में पूर्व एसपी ने जमीनी विवाद को लेकर संयुक्त टीम के माध्यम से निस्तारित करने का निर्देश जारी किए हैं, लेकिन अधीनस्थ कर्मचारियो पर इन गतिविधियों का कोई भी असर दिखाई नहीं देता है,
आखिरकार क्यों बड़ी घटना के इंतजार में रहते हैं अधिकारी,क्या जमीनी विवाद सुलझाना हो गया है मुश्किल, घटना के बाद ही समाप्त हो जाता है जमीनी विवाद
जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा हमेशा कार्रवाई को लेकर हंगामा किया जाता है, लेकिन किसी बड़ी घटना में असुरक्षित मिलने पर लीपापोती की कार्रवाई शुरू कर दी जाती है, आखिरकार क्या वजह है कि किसी भी मामले में असुरक्षित मिलने पर भी कर्मचारियों के ऊपर गाज नहीं गिरती है, यही कारण है कि किसी भी एक मामले में पीड़ित ऑफिसों का चक्कर लगाते लगाते थक हार जाता है और फिर भी उसको न्याय नहीं मिलता है। चाहे वह क्षेत्रीय स्तर से जनपद स्तर के अधिकारियों या कहें प्रदेश स्तर तक क्यों न प्रार्थना पत्र दे चुका हो।
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