घटना की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों पर पुलिस द्वारा कार्रवाई करना पत्रकारिता और प्रेस की आजादी पर हमला, रद्द किए जाने की मांग
लखनऊ, 9 जुलाई। भाकपा (माले) ने उत्तर प्रदेश के शामली जिले मे कथित मॉब लिंचिंग से फिरोज की मौत मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। पार्टी ने घटना की सोशल मीडिया पर रिपोर्टिंग करने वाले बिहार के दो मुस्लिम पत्रकारों जाकिर अली त्यागी व वसीम अकरम त्यागी सहित तीन पत्रकारों के खिलाफ नए आपराधिक कानून की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की कड़ी निंदा की है।
भाकपा (माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि लोकसभा चुनाव बाद प्रदेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणा अपराध की घटनाएं बढ़ गई हैं। शामली की घटना से पहले अलीगढ़ में 18 जून को फरीद उर्फ औरंगजेब की मॉब लिंचिंग में मौत और 30 जून को बुलंदशहर में दो भाइयों तंजीम व फैजान पर भीड़ हिंसा हुई थी। नफरती राजनीति, आरोपियों के प्रति संरक्षणकारी भूमिका और प्रसाशन द्वारा कड़ी कार्रवाई न किये जाने से इस तरह की घटनाओं को शह मिल रही है।
माले नेता ने कहा कि शामली में फिरोज की 4 जुलाई को मॉब लिंचिंग से मौत के दावे पर पत्रकारों के खिलाफ पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज किया जाना पत्रकारिता और प्रेस की आजादी पर हमला है। ये मुकदमे जिनमें तीन पत्रकारों सहित अल्पसंख्यक समुदाय के तीन व्यक्तियों को नामजद किया गया है, रद्द किए जाने चाहिए। पुलिस अपने दावे को थोपना चाहती है कि मौत मॉब लिंचिंग से नहीं, बल्कि हाथापाई या अन्य कारण से हुई। जबकि परिजनों के अनुसार घटना के बमुश्किल दो घंटे के अंदर मौत हुई। ऐसे में इसकी उच्चस्तरीय जांच से ही सच्चाई सामने आयेगी। असल हमलावरों को सख्त सजा और पीड़ित परिवार को न्याय मिले। घृणा अपराध की घटनाओं पर कड़ाई से रोक लगाई जाए।
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