कांशीराम की पुण्यतिथि पर समर्थकों ने तोड़े कई सालों के रिकॉर्ड
मंच से गरजीं मायावती, सपा को बताई दोहरा चरित्र वाला, योगी सरकार की तारीफ
लखनऊ, बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांशीराम की पुण्यतिथि पर 09 अक्टूबर को राजधानी में एक बड़ी रैली की. श्रद्धांजलि सभा में समर्थकों की भीड़ ने कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिया. राजधानी की सड़कों पर हर तरफ नीले झंडे, पोस्टर और बैनर से पटे पड़े दिखाई दिए. मायावती ने मा0 कांशीराम को श्रद्धाजंलि दी. अपार संख्या में पहुंचे लोगों और कार्यकर्ताओं-समर्थकों का भी आभार जताया. कहा कि आज का जनसमूह यह दिखाता है कि हमने पिछले सारे रिकॉर्ड को तोड़ दिया है. पार्टी आपकी आभारी है और हम इस समर्थन को बेकार नहीं जाने देंगे. इसके अलावा उन्होंने लखनऊ के स्मारकों और पार्कों के रखरखाव का मुद्दा उठाया.
मंच से गरजते हुए योगी सरकार की सराहना की तो वहीं समाजवादी पार्टी को दोहरा चरित्र वाला बताया. कहा कि अखिलेश यादव सत्ता में होते हैं तो न उन्हें कांशीराम याद आते हैं, न ही पीडीए. सत्ता से बाहर होते ही उन्हें ये सब याद आने लगता है. कहा कि अगर समाजवादी पार्टी को कांशीराम जी से इतना ही सम्मान था, तो अलीगढ़ मंडल में जो ज़िला कांशीराम जी के नाम पर बनाया गया था, सपा सरकार आते ही उसका नाम क्यों बदल दिया गया? हमने कांशीराम जी के नाम पर कॉलेज, यूनिवर्सिटी और जनकल्याण योजनाएं शुरू की, लेकिन सपा का रवैया हमेशा से दोहरा रहा है- ना नीयत साफ है, ना नीति.
मायावती की सियासी हुंकार क्या है?
मायावी ने कहा, हमारी सरकार ने ये स्मारक बनवाकर उनकी देखरेख की व्यवस्था भी की थी, लेकिन जब सपा की सरकार आई, तो उन्होंने इस व्यवस्था पर एक रुपये तक खर्च नहीं किया. कई स्मारक और पार्क खराब हाल में पहुंच गए थे. मुख्यमंत्री योगी को हमने पत्र लिखकर आग्रह किया था कि टिकट से मिलने वाला पैसा इन स्थलों के रखरखाव में लगाया जाए. बीजेपी सरकार ने इस पर सकारात्मक रुख अपनाया और मरम्मत का पूरा खर्च उठाया. इसके लिए हम बीजेपी सरकार का आभार जताते हैं.
उन्होंने कहा कि देश में राजनीति सत्ता ऐसी मास्टर चाबी है, जिसके जरिये दलित, पिछडे वर्गों के लोग अपना उत्थान कर सकते हैं. इसलिए बाबा साहेब ने जो भी रास्ते दिखाए तो वो उनके जीते जी तो पूरे नहीं हो सके, लेकिन मान्यवर कांशीराम ने इस मकसद को पूरा करने के लिए अपनी पूरी जिंदगी लगा दी और काफी हद तक सफल भी हुए.
भाजपा, कांग्रेस और सपा को लेकर क्या कही?
उन्होंने आगे कहा कि ये बीजेपी, कांग्रेस, सपा और दूसरे जातिवादी दलों को बिल्कुल अच्छा नहीं लगा. जबकि इससे पहले केंद्र की भाजपा सरकार ने मेरे, भाई बहन, रिश्तेदारों पर जबदस्ती गलत केस लगाकर आईटी और सीबीआई को पीछे लगाकर छवि को धूमिल करने का काम किया, कांग्रेस ने भी हमें राहत देने की बजाय का उलझा दिया. हमें बहुत कुछ झेलना पड़ा है, लेकिन ऐसे हालातो में भी हमने डॉ. अंबेडकर के बताए रास्तों पर चलते हुए 2007 में अपनी पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई.
बसपा मुखिया ने कहा कि कानून व्यवस्था के मामले में हमने हर स्तर पर अन्याय, अपराध और भय मुक्त वातावरण बनाया, इसलिए सर्व जन हिताय और सर्वजन सुखाय की सरकार बनाई, जिसे प्रदेश की जनता आज तक भुला नहीं पा रही है. हमने मौजूदा केंद्र की सरकार की तरह अपने राजनीति स्वार्थ में इन्हें इनके टैक्स के पैसों से ही थेाडा सा मुफ्त में राशन देकर अपना गुलाम नहीं बनाया है.
उन्होंने आगे कहा कि जातिवादी पार्टियों में सपा तो सबसे आगे रही है. अब ये सपा अपने राजनीतिक स्वार्थ में जबरन पीडीए की हवा हवाई बातें करके जबरन गुमराह कर रही है. आरक्षण दिए जाने के मामले में भी सपा की सरकार ने हमेशा पक्षपात वाला रवैया अपनाया है. इनके पदोन्नति में आरक्षण में इस पार्टी की सरकार ने एक तरह से खत्म ही कर दिया था. इनकी सरकार ने गुंडो, माफियाओं और अराजक तत्वों को बहुत बढ़ावा दिया. अब अधिकांश मामलों में यही हालात हमें मौजूदा बीजेपी की सरकार में देखने को मिल रहा है. जबकि आजादी के बाद यहां शुरू में कांग्रेस के शासनकाल में इन वर्गों का ज्यादातर शोषण और उत्पीड़न हुआ है. एक तरह से यूपी में कांग्रेस का भी जातिवादी और संकीर्ण सोच के साथ ही शासन चलता रहा है.
कांशीराम के निधन के बाद नहीं किया राष्ट्रीय शोक घोषित
उन्होंने यह भी कहा कि कांशीराम जी को भी उनके देहांत के बाद इसी कांग्रेस पार्टी की सरकार ने केंद्र में रहते हुए और सपा ने भी एक दिन का भी राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया था. अब बीजेपी और अन्य जातिवादी पार्टियों की सरकार द्वारा अन्य लोकलुभावने वादे और योजनाओं की शुरुआत की जा रही है. मगर, इनका प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिल पता, इसलिए आपको सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय की अपनी सरकार को जीताकर केंद्र और राज्य में सत्ता में लाना है. इस तरह जिन भी राज्यों में एक साथ विधानसभा के आम चुनाव होने वाले हैं, वहां भी ऐसी पार्टियों को सत्ता में आने से रोकना है और खासकर यूपी में तो बीएसपी में अकेले पूर्ण बहुमत की सरकार बनाना बहुत जरूरी है. ताकि बीजेपी, सपा, कांग्रेस जैसी जातियां तरह तरह से रोकने का प्रयास करेंगी.
बाबा साहेब को भारत रत्न क्यों नहीं दिया?
मायावती ने कांग्रेस से सवाल पूछा कि उसने बाबा साहेब को भारत रत्न क्यों नहीं दिया. कांग्रेस सरकार से कभी दलितों को न्याय नहीं मिला. दलितों के वोट बांटने की साजिश हो रही है. सबने मिलकर बसपा को हराया था.
उन्होंने कहा कि बसपा को देश के कई राज्यों में इसलिए आगे नहीं बढ़ने दिया गया, क्योंकि बाकी जातिवादी पार्टियों को डर था कि अगर बीएसपी अकेले सत्ता में आ गई तो वह एक दिन केंद्र की सत्ता तक पहुंच सकती है. इसलिए, जहां-जहां बीएसपी मजबूत थी, वहां बाकी पार्टियों ने मिलकर उसे हराने की कोशिश की. साथ ही ईवीएम में गड़बड़ी करके भी नुकसान पहुंचाया गया. अब जब ईवीएम पर सवाल उठ रहे हैं और बैलेट पेपर की वापसी की बात हो रही है, तो हमें अपनी पार्टी को हर स्तर पर मजबूत बनाना चाहिए.
बसपा को कमजोर करने की चली चाल
उन्होंने आगे कहा कि विरोधी पार्टियों ने बीएसपी को कमजोर करने के लिए एक और चाल चली. उन्होंने दलित समाज के कुछ स्वार्थी और बिकाऊ लोगों को आगे करके छोटे-छोटे संगठन बनवा दिए, ताकि ये लोग बीएसपी के वोट काट सकें. ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओं को सावधान रहना चाहिए और किसी भी छोटे संगठन या लालच में नहीं पड़ना चाहिए. अपना हर वोट सिर्फ बीएसपी को देना चाहिए. सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए और किसी की धार्मिक परंपराओं में दखल नहीं देना चाहिए.
बसपा मुखिया ने कहा कि आई लव यू जैसी राजनीति या किसी धर्म के नाम पर राजनीति नहीं करनी चाहिए. पहलगाम में हुआ हमला सरकार की लापरवाही से हुआ, अगर सुरक्षा कड़ी होती तो इसे रोका जा सकता था. अमेरिकी टैक्स (टैरिफ) नीति पर भी भारत को सावधान रहना चाहिए और स्वदेशी का दावा केवल बातों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. बीएसपी के सत्ता से हटने के बाद सपा और बीजेपी की सरकारों में दलितों, पिछड़ों और कमजोर वर्गों का विकास रुक गया है. उन पर अत्याचार बढ़ गए हैं और आरक्षण का पूरा लाभ भी उन्हें नहीं मिल रहा है.
आजम खां के बारे में किया खुलासा
बसपा चीफ मायावती ने मंच से साफ कहा कि सपा नेता आजम खान के परिवार से उनकी कोई मुलाकात नहीं हुई है. मतलब यूपी की राजनीतिक चर्चाओं पर बसपा चीफ के इस बात के बाद विराम लगा दिया है कि आजम खान की बसपा में कोई बातचीत नहीं हुई है. करीब 2 साल बाद जेल से बाहर आए आजम खान को लेकर चर्चा चली थी कि वह मायावती की पार्टी में बसपा ज्वॉइन कर सकते हैं लेकिन जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने ही साफ कर दिया था जो इस बात की चर्चा कर रहे हैं उनसे ही यह सवाल कीजिए. अब मायावती के बयान के बाद साफ हो गया है कि आजम परिवार और मायावती की कोई मुलाकात नहीं हुई है।