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मुगलसराय थाने में पैरवी करने पहुंचे पूर्व फौजी को पीटने का आरोप, एसओ और हमराहियों पर लाठी से मारपीट का दावा

नाक पर चोट लगने से खून से लथपथ हुआ पूर्व जवान

पुलिस ने 151 में किया चालान; पीड़ित ने मांगी सीसीटीवी फुटेज की जांच

पुलिस का दावा—खुद दीवार से लड़कर घायल हुआ

चंदौली। मुगलसराय थाना क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। एक फरियादी के प्रार्थना पत्र पर कार्रवाई की पैरवी करने थाने पहुंचे पूर्व फौजी ने थाना प्रभारी और उनके हमराहियों पर मारपीट करने का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि वह अपने परिचित/फरियादी के मामले में पैरवी करने के लिए थाने पहुंचा था, लेकिन उसकी बात सुनने और प्रार्थना पत्र पर कार्रवाई करने के बजाय पुलिसकर्मियों ने उसके साथ कथित तौर पर मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि थाना प्रभारी ने हमराहियों के साथ मिलकर लाठी से उसकी पिटाई की, जिससे उसके नाक पर गंभीर चोट आई और वह खून से लथपथ हो गया।

मामले को लेकर सामने आई जानकारी और वायरल हो रहे वीडियो में पीड़ित खुद को सेना का रिटायर्ड जवान बताते हुए घटना का जिक्र करता दिखाई दे रहा है। पीड़ित के अनुसार, वह किसी विवाद को लेकर दिए गए प्रार्थना पत्र पर कार्रवाई की जानकारी लेने और फरियादी की पैरवी करने के लिए थाना मुगलसराय पहुंचा था। उसका आरोप है कि वहां पुलिसकर्मियों ने उसकी बात सुनने के बजाय उसके साथ अभद्र व्यवहार किया और विरोध करने पर मारपीट शुरू कर दी।

पीड़ित का आरोप है कि थाना प्रभारी और उनके साथ मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे लाठी-डंडे से पीटा। इसी दौरान उसके नाक पर चोट लग गई और खून बहने लगा। पूर्व फौजी का दावा है कि पुलिस की पिटाई के कारण वह गंभीर रूप से घायल हुआ। घटना के बाद वह अपने साथ हुई कथित मारपीट को लेकर न्याय की मांग कर रहा है और थाना परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराने की मांग कर रहा है।

पुलिस पर गंभीर आरोप, वायरल वीडियो से मामला चर्चा में

घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। वीडियो में पीड़ित अपने साथ हुई घटना का जिक्र करते हुए पुलिस पर गंभीर आरोप लगाता दिखाई दे रहा है। वह खुद को सेना का रिटायर्ड जवान बताते हुए कह रहा है कि उसके साथ थाने में मारपीट की गई। वीडियो में उसके चेहरे और नाक पर चोट के निशान दिखाई देने की बात भी सामने आई है।

पीड़ित का कहना है कि यदि पुलिस अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत मानती है तो थाना परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सामने लाई जानी चाहिए। उसका दावा है कि सीसीटीवी फुटेज से पूरी घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। इसी आधार पर उसने निष्पक्ष जांच की मांग की है।

151 में चालान किए जाने का भी आरोप

मामले में एक और गंभीर आरोप यह है कि मारपीट के बाद पुलिस ने पूर्व फौजी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसका 151 के तहत चालान कर दिया। पीड़ित पक्ष का कहना है कि वह किसी अपराध को अंजाम देने नहीं, बल्कि एक फरियादी के प्रार्थना पत्र की पैरवी करने के लिए थाने गया था। ऐसे में उसके साथ कथित मारपीट करने के बाद उसी के खिलाफ कार्रवाई किए जाने से वह और उसके परिजन/समर्थक नाराज हैं।

पीड़ित का आरोप है कि पुलिस ने पहले उसके साथ मारपीट की और बाद में कार्रवाई से बचने के लिए उसके खिलाफ ही मुकदमे/चालान की कार्रवाई कर दी। हालांकि पुलिस की ओर से घटना को लेकर अलग पक्ष बताया गया है। पुलिस का कथित पक्ष है कि थाना परिसर में आने के बाद पूर्व जवान ने पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी की, जिसके आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई की गई।

पुलिस का दावा—दीवार से लड़कर खुद को चोट पहुंचाई

मामले में पुलिस की ओर से पीड़ित के आरोपों से अलग दावा सामने आया है। पुलिस का कहना है कि घटना के दौरान पूर्व फौजी ने खुद ही दीवार से लड़कर अपने सिर/चेहरे पर चोट पहुंचाई। पुलिस के अनुसार, थाने में उसके साथ पुलिसकर्मियों द्वारा मारपीट किए जाने का आरोप सही नहीं है।

यही वजह है कि अब पूरे मामले में सबसे अहम सवाल थाना परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग को लेकर उठ रहा है। यदि घटना के समय कैमरे चालू थे और उनकी रिकॉर्डिंग सुरक्षित है तो फुटेज से यह स्पष्ट किया जा सकता है कि पूर्व फौजी को चोट कैसे लगी और उसके साथ पुलिसकर्मियों ने कोई मारपीट की या नहीं।

सीसीटीवी फुटेज से खुल सकता है सच

पूर्व सैनिक ने पुलिस के दावे को स्वीकार नहीं किया है। उसका कहना है कि यदि उसने खुद दीवार से लड़कर चोट पहुंचाई है तो पुलिस सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक या जांच अधिकारी के सामने प्रस्तुत करे। उसका दावा है कि फुटेज सामने आने के बाद पूरे मामले की सच्चाई स्वतः सामने आ जाएगी।

मामले में निष्पक्ष जांच की मांग इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि एक ओर पूर्व फौजी पुलिसकर्मियों पर लाठी से पीटने का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर पुलिस उसके आरोपों को खारिज करते हुए खुद चोट पहुंचाने की बात कह रही है। दोनों पक्षों के दावों के बीच वास्तविक स्थिति जानने के लिए मेडिकल रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और मौके पर मौजूद लोगों के बयान महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं।

कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल

इस घटना के बाद पुलिस की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। फरियादी के प्रार्थना पत्र पर क्या कार्रवाई हुई, पूर्व फौजी थाने में किस उद्देश्य से पहुंचा था, उसके साथ वास्तव में क्या हुआ और उसके खिलाफ 151 के तहत कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई—इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक बताई जा रही है।

पूर्व फौजी का कहना है कि वह कानून-व्यवस्था में विश्वास रखने वाला व्यक्ति है और उसने अपने साथ हुई कथित घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उसका कहना है कि थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाए ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।

वहीं, पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों की भी जांच जरूरी है। यदि पुलिस का दावा है कि पूर्व फौजी ने खुद दीवार से लड़कर चोट पहुंचाई, तो सीसीटीवी फुटेज और चिकित्सकीय परीक्षण से इसकी पुष्टि की जा सकती है। इसी तरह यदि पीड़ित के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।



फिलहाल मामला पुलिस के आरोप और पूर्व फौजी के प्रत्यारोप के बीच उलझा हुआ है। ऐसे में निष्पक्ष जांच ही पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने ला सकती है। अब देखना यह है कि पुलिस सीसीटीवी फुटेज जांच के लिए उपलब्ध कराती है या फिर मामला आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाता है।