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प्रयागराज-डीडीयू तीसरी लाइन की सिग्नलिंग व्यवस्था का सफल कमीशनिंग, ट्रेनों के संचालन में बढ़ेगी सुविधा

चंदौली,डीडीयू। प्रयागराज-डीडीयू तीसरी लाइन परियोजना के तहत पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल में आने वाले डीडीयू जंक्शन से ब्लॉक हट-के (उत्तर मध्य रेल) तक के हिस्से की सिग्नलिंग एवं परिचालन व्यवस्था का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। 25 अगस्त 2026 को इस व्यवस्था का सफल कमीशनिंग किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्य के बाद तीसरी लाइन के इस हिस्से को ब्लॉक हट-के के माध्यम से मौजूदा रेल परिचालन और सिग्नलिंग व्यवस्था से जोड़ दिया गया है। इससे व्यस्त रेलखंड पर ट्रेनों के संचालन को अधिक सुगम बनाने में मदद मिलेगी।

मंडल रेल प्रबंधक श्री उदय सिंह मीना के मार्गदर्शन में पूरी की गई इस परियोजना के बाद डीडीयू मंडल में रेल परिचालन क्षमता को बेहतर बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। नई सिग्नलिंग व्यवस्था के सक्रिय होने से ब्लॉक हट-के से डीडीयू की ओर डाउन दिशा में अधिक ट्रेनों को भेजने तथा डीडीयू जंक्शन पर ट्रेनों को लेने में सुविधा होगी।

रेलवे के इस कदम से व्यस्त रेलखंड पर उपलब्ध रेल लाइनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। तीसरी लाइन को मौजूदा परिचालन व्यवस्था से जोड़ने के लिए ब्लॉक हट-के और न्यू वेस्ट केबिन के बीच आवश्यक सिग्नलिंग एवं ब्लॉक व्यवस्था विकसित की गई। इसके बाद इस पूरी व्यवस्था को डीडीयू जंक्शन के रूट रिले इंटरलॉकिंग (आरआरआई) सिस्टम से जोड़ा गया।

इस तकनीकी कार्य के दौरान डीडीयू के मुख्य आरआरआई में करीब 40 शीटों के सर्किट में आवश्यक बदलाव किए गए। साथ ही आरआरआई ऑपरेशन पैनल में भी जरूरी संशोधन किया गया, ताकि नई तीसरी लाइन को मौजूदा सिग्नलिंग और परिचालन प्रणाली के साथ सुरक्षित एवं प्रभावी तरीके से संचालित किया जा सके।

सुरक्षित ट्रेन संचालन के लिए एक्सल काउंटर आधारित व्यवस्था

तीसरी लाइन पर सुरक्षित ट्रेन संचालन सुनिश्चित करने के लिए एक्सल काउंटर आधारित ट्रेन डिटेक्शन सिस्टम लगाया गया है। इस व्यवस्था के माध्यम से संबंधित रेल लाइन पर ट्रेन की स्थिति की निगरानी की जा सकेगी। ट्रेन के किसी सेक्शन में प्रवेश करने और वहां से निकलने की स्थिति को सिग्नलिंग प्रणाली के माध्यम से निर्धारित करने में यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इसके साथ ही सिग्नलिंग व्यवस्था की विभिन्न गतिविधियों पर नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर उनका विश्लेषण करने के लिए डेटा लॉगर भी स्थापित किया गया है। डेटा लॉगर के माध्यम से सिग्नलिंग सिस्टम से संबंधित गतिविधियों का रिकॉर्ड रखा जा सकेगा, जिससे किसी तकनीकी स्थिति के विश्लेषण और जांच में सहायता मिलेगी।

बिजली आपूर्ति और सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम

सिग्नलिंग सिस्टम को निर्बाध एवं भरोसेमंद विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए आईपीएस और 300 एएच बैटरी बैंक की व्यवस्था की गई है। बिजली आपूर्ति में किसी तरह की समस्या आने की स्थिति में बैकअप व्यवस्था के माध्यम से सिग्नलिंग सिस्टम को संचालित रखने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा सुरक्षा की दृष्टि से फायर अलार्म, फ्यूज ऑटो चेंजओवर सहित अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरण और व्यवस्थाएं भी स्थापित की गई हैं। इन सभी तकनीकी एवं सुरक्षा उपायों का उद्देश्य तीसरी लाइन के परिचालन को सुरक्षित, व्यवस्थित और विश्वसनीय बनाना है।

रेलवे के इस कार्य से डीडीयू जंक्शन और ब्लॉक हट-के के बीच तीसरी लाइन के उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। विशेष रूप से व्यस्त रेलखंड में ट्रेनों की संख्या और परिचालन दबाव को देखते हुए अतिरिक्त लाइन के उपलब्ध होने से ट्रेनों के संचालन को व्यवस्थित करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

तीसरी लाइन के इस हिस्से की सिग्नलिंग व्यवस्था के कमीशनिंग के बाद अब मौजूदा रेल नेटवर्क में उपलब्ध लाइन क्षमता का अधिक प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे डाउन दिशा में ट्रेनों के आवागमन को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने तथा डीडीयू जंक्शन पर ट्रेनों के संचालन में सुविधा मिलने की संभावना है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सिग्नलिंग प्रणाली में किए गए तकनीकी बदलाव, एक्सल काउंटर आधारित ट्रेन डिटेक्शन, डेटा लॉगर, आईपीएस और बैटरी बैंक सहित सुरक्षा व्यवस्थाएं तीसरी लाइन के सुरक्षित परिचालन के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस पूरी व्यवस्था के सफल कमीशनिंग के साथ प्रयागराज-डीडीयू तीसरी लाइन परियोजना के डीडीयू मंडल से जुड़े हिस्से में एक महत्वपूर्ण तकनीकी चरण पूरा हुआ है।