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साहित्यिक शोध में पत्र पत्रिकाएं विचारों की पहिया हैं -डॉ. जितेंद्र यादव

पत्र पत्रिकाओं की उपयोगिता, समकालीन शोध प्रवृत्तियों पर विमर्श,शोध परक शिक्षा पर जोर 

दिल्ली। लक्ष्मीबाई महाविद्यालय में हिंदी विभाग एवं संस्कृत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “साहित्यिक शोध में पत्र-पत्रिकाओं की भूमिका” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन महाविद्यालय के एलटी-2 सभागार में प्रातः 11:30 बजे किया गया।

फोटो: डॉ. जितेंद्र यादव लक्ष्मीबाई महाविद्यालय दिल्ली में साहित्यिक शोध में पत्र-पत्रिकाओं की भूमिका” विषय पर अपने विचार रखते हुए 

कार्यक्रम का उद्देश्य साहित्यिक शोध की प्रक्रिया में पत्र-पत्रिकाओं के महत्व, शोध सामग्री के स्रोत के रूप में उनकी उपयोगिता तथा समकालीन शोध प्रवृत्तियों पर गंभीर विमर्श करना था।

संगोष्ठी में मुख्य वक्ताओं के रूप में डॉ. राहुल राज आर्य, सहायक प्राध्यापक, लक्ष्मीबाई महाविद्यालय, डॉ. जितेंद्र यादव, सहायक प्राध्यापक, सकलडीहा पी.जी. कॉलेज, चंदौली एवं संपादक अपनी माटी पत्रिका तथा डॉ. दोलामणि आर्य सह-प्राध्यापक, लक्ष्मीबाई महाविद्यालय ने अपने विचार व्यक्त किए।

विशिष्ट वक्ता डॉ. जितेंद्र यादव ने कहा साहित्यिक शोध में पत्र-पत्रिकाओं की ऐतिहासिक भूमिका है। वह विचारों की पहिया होती हैं। उनके बिना विचारों का आदान -प्रदान असम्भव है। नई शिक्षा नीति में शोध परक शिक्षा पर अत्यधिक जोर दिया गया है। इसलिए छात्र -छात्राओं को ज्ञानवर्धक और विचार परक शोध पत्र लिखना चाहिए। जिसमें नए तथ्यों की जानकारी और निष्कर्ष हो।

संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष कुमार तथा हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रजत शर्मा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए शोधपरक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर बल दिया।

कार्यक्रम का आयोजन हिंदी साहित्य परिषद के तत्वावधान में डॉ. सत्यवन्त यादव (संयोजक), डॉ. सुमित कुमार मीना एवं डॉ. प्रियंका कुमारी के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रियंका झा ने किया। संगोष्ठी में महाविद्यालय के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही।

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