जिला प्रशासन पर पक्षपात के सवाल, केवल सिपाही की ही गिरफ्तारी क्यों?
चंदौली के ARTO डॉ. सर्वेश गौतम पर ट्रांसपोर्टरों से अवैध वसूली के कई गंभीर आरोप लगे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ट्रकों को बिना वजह रोककर चालान काटना और ₹5000 प्रति गाड़ी 'एंट्री फीस' वसूलने का दावा किया गया है। सिपाही दुर्गा श्रीवास्तव के साथ मिलकर यह कृत्य करने का आरोप है तो केवल सिपाही की ही गिरफ्तारी क्यों हुई हैं?
मई 2025: गुजरात से बिहार जा रही बस को मंडी पुलिस चौकी पर रोका गया, जहाँ महिलाओं-बच्चों को घंटों खड़ा रखा और 7 लाख तक की मांग की गई। महिलाओं-बच्चों समेत 19 यात्रियों को गर्मी में घंटों खड़ा किया, पहले ₹20,500 जुर्माना लगाया फिर अतिरिक्त वसूली। ARTO ने इसे इमरजेंसी गेट जांच बताया, लेकिन ट्रांसपोर्टरों ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
मार्च 2026: ट्रांसपोर्टर सुनील यादव ने ARTO की टीम और सिपाही दुर्गा श्रीवास्तव पर ट्रकों से हर महीने ₹5000 वसूली का आरोप लगाया। सदर पुलिस ने सिपाही को गिरफ्तार कर जेल भेजा, लेकिन ARTO पर कोई कार्रवाई नहीं।
जिला प्रशासन पर पक्षपात के सवाल उठे हैं, क्योंकि इन मामलों में जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न दिखने से विवाद बढ़ रहा है।शिकायतों के बावजूद ARTO पर कोई जांच या निलंबन नहीं हुआ। ट्रांसपोर्टरों ने पुलिस और मुख्यमंत्री से न्याय की मांग की है।
परिवहन विभाग पहले भी वसूली कांडों से बदनाम रहा है, लेकिन वर्तमान मामलों में DM या उच्चाधिकारियों ने जांच के आदेश नहीं दिए। सिपाही की गिरफ्तारी हुई, पर ARTO को बचाने का आरोप। इससे जिला प्रशासन पर पक्षपात के सवाल उठे।सदर पुलिस ने जांच शुरू की, पर ARTO को जांच एजेंसी ने क्लीन चिट या बचाव का मौका दिया प्रतीत होता है।
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