मा.कांशीराम की 92वीं जयंती पर बहुजन समाज में उत्साह, देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा पर्व
सटीक संवाद, 15 मार्च 2026, लखनऊ। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के गंज ख्वाजा में लॉर्ड बुद्धा डॉ अंबेडकर सेवा समिति के प्रदेश सचिव रामसुभाष के नेतृत्व में बसपा संस्थापक और बहुजन मसीहा मान्यवर कांशीराम जी की 92वीं जयंती केक काटकर हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। साथ ही कांशीराम पुस्तकालय भी खोला गया।आज बहुजन समाज में उत्साह का माहौल है, जबकि देशभर में यह पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है।
लोगों को संबोधित करते हुए श्री रामसुभाष ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने वंचित वर्गों को संवैधानिक अधिकार प्रदान कर आरक्षण, समानता और सामाजिक न्याय के मौलिक अधिकार दिलाए, ताकि शासन-प्रशासन में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो। मान्यवर कांशीराम ने इन अधिकारों को राजनीतिक शक्ति में बदलकर बहुजन समाज को शासक वर्ग बनाने का कार्य किया। उन्होंने दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को संगठित कर बसपा के दम पर सत्ता में भागीदारी सुनिश्चित की तथा जातिगत भेदभाव के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया।
आंबेडकर और कांशीराम का योगदान
डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने संविधान बनाकर वंचितों को समानता, आरक्षण और छुआछूत उन्मूलन जैसे कानूनी अधिकार दिए, लेकिन यह नींव कागजी रूप में रही। कांशीराम ने 1978 में DS-4 संगठन से बहुजन समाज को संगठित किया और 1984 में बसपा की स्थापना कर आंबेडकरवाद को व्यावहारिक रूप दिया। उत्तर प्रदेश में बसपा को सत्ता दिलाकर उन्होंने वास्तविक सशक्तिकरण प्रदान किया, साथ ही नारे जैसे "हमारी लड़ाई सबसे नहीं, बल्कि उनसे है जो जाति मानते हैं" से जागृति फैलाई।
कांशीराम के प्रमुख नारे और संघर्ष
"वोट हमारा, राज तुम्हारा नहीं चलेगा", "वोट से लेंगे सीएम-पीएम, आरक्षण से लेंगे एसपी-डीएम", "ठाकुर-बनिया-बाभन छोड़, बाकी सब हैं डीएस-फोर" तथा "जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी"—ने जातिगत भेदभाव के खिलाफ आंदोलन तेज किया। वे कहते थे, "सत्ता ही सामाजिक बदलाव की कुंजी है।" ब्राह्मणवाद विरोधी दृष्टि से उन्होंने कहा, "जहां ब्राह्मणवाद सफल है, कोई अन्य वाद सफल नहीं हो सकता।
सत्ता में भागीदारी:
कांशीराम जी ने अंबेडकरवादी विचारधारा को जमीन पर उतारकर, वोट बैंक को एक संगठित राजनीतिक ताकत में बदल दिया। अपने संघर्ष के दम पर उत्तर प्रदेश में दलित बेटी बहन कुमारी मायावती को मुख्यमंत्री बनवाकर (1995 में) वंचितों को सम्मानजनक शासन का अहसास कराया।
जयंती पर आयोजन
उत्तर प्रदेश में बसपा ने लखनऊ के कांशीराम स्मारक स्थल (पुरानी जेल रोड) और नोएडा में लाखों समर्थकों के साथ बड़े आयोजन किए। समाजवादी पार्टी ने इसे 'बहुजन समाज दिवस' या 'पीडीए दिवस' के रूप में मनाया, जबकि कांग्रेस ने 'सामाजिक परिवर्तन दिवस' घोषित किया। आजाद समाज पार्टी, अपनी जनता पार्टी सहित अन्य संगठनों ने भी कार्यक्रम आयोजित किए। यह जयंती वंचितों को सत्ता की याद दिलाती है।
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