धानापुर (चंदौली), 22 मार्च 2026: कस्बा क्षेत्र में अवैध पैथोलॉजी सेंटरों, क्लीनिकों और अल्ट्रासाउंड केंद्रों का जाल तेजी से फैल रहा है। स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता और कथित संरक्षण के चलते बिना मानक, बिना प्रशिक्षित स्टाफ और बिना पंजीकरण के दर्जनों सेंटर धड़ल्ले से चल रहे हैं, जो जन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, इनमें से अधिकांश सेंटरों पर न तो एमडी पैथोलॉजिस्ट उपलब्ध हैं और न ही डीएमएलटी या प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ। कई सेंटर दूर-दराज के पंजीकरण के सहारे चलाए जा रहे हैं। गंभीर बात यह है कि कुछ जगहों पर नाबालिग किशोर ही रक्त संग्रह (ब्लड कलेक्शन) कर रहे हैं, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
गांव‑गांव में “झोलाछाप डॉक्टर” कर रहे गंभीर बीमारियों का इलाज
आज‑कल गांव‑गांव में “झोलाछाप डॉक्टर” बिना डिग्री के ही न सिर्फ हल्की बुखार‑खांसी का बल्कि गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, डायबिटीज, ब्लड‑प्रेशर, इन्फेक्शन और कभी‑कभी ऑपरेशन जैसी सर्जरी तक का इलाज कर रहे हैं, जो बहुत जोखिम भरा है।
झोलाछाप डॉक्टर कैसे काम करते हैं?
वे अक्सर किसी मेडिकल डिग्री के बिना ही छोटे दुकानदार या घर‑घर के बीच खुले “क्लीनिक” या फोड़ा‑फुंसी की दुकान से दवा देते हैं। कई जगह वे खुद को डॉक्टर या सर्जन बताकर एंटीबायोटिक, इंजेक्शन, ड्रिप और छोटे ऑपरेशन भी कर देते हैं, जिससे संक्रमण या अन्य जटिलताएं होती हैं।
गांवों में अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और क्वालिफाइड डॉक्टरों की कमी के कारण लोग मजबूरन झोलाछाप के पास जाते हैं,ये लोग सस्ती दवाइयों और “रातों‑रात ठीक होने” के दावे से गरीब मरीजों को लुभाते हैं, जिससे बार‑बार दवा चलती रहती है और असली इलाज नहीं होता।अनक्वालिफाइड इलाज के कारण कई मामलों में बीमारी बढ़ी है और झोलाछाप दवा लेने के बाद गंभीर रोगियों की मौत भी हो चुकी है।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि इन सेंटरों के पास कोई वैध पंजीकरण दस्तावेज नहीं हैं। कई सेंटर सड़क किनारे या संकरी गलियों में छिपे हुए संचालित हो रहे हैं, जहां स्वच्छता, सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों की पूरी तरह अनदेखी हो रही है। इससे मरीजों में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
विभागीय संरक्षण के आरोप
सूत्र बताते हैं कि इन अवैध सेंटरों द्वारा मोटी रकम देकर विभागीय संरक्षण हासिल किया जाता है, ताकि जांच या कार्रवाई न हो। कस्बा क्षेत्र में आधा दर्जन से ज्यादा पैथोलॉजी सेंटर खुले आम अवैध हैं, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा न नियमित निरीक्षण हो रहा है और न कोई कार्रवाई।
क्षेत्रीय नागरिकों और समाजसेवियों ने जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि इन अवैध इकाइयों की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर सक्रिय होंगे या अवैध स्वास्थ्य कारोबार यूं ही फलेगा-फूलेगा।
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