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सकलडीहा में भ्रष्टाचार का नंगा नाच

बीडीओ-सचिव-प्रधान की तिकड़ी पर 1.28 करोड़ के गबन का साया, सलेमपुर में पशु आश्रय और सड़क निर्माण में करोड़ों का खेल

चंदौली जिले के सकलडीहा विकास खंड में भ्रष्टाचार का काला अध्याय फिर से खुला है। बीडीओ, सचिव और प्रधान की तिकड़ी पर भारी अनियमितताओं के आरोप लगे हैं, जिसके खिलाफ भाकपा माले के कार्यकर्ता चार दिनों से धरने पर बैठे हैं। नाराज ग्रामीणों का आरोप है कि 'सचिव से बीडीओ बने' इस अधिकारी को भ्रष्टाचार का 'पूरा दावपेंच' मालूम है, और विकास खंड की ग्राम पंचायतें उनके रहमो-खम पर चल रही हैं।

ताजा मामला: सलेमपुर में करोड़ों का घोटाला
सलेमपुर ग्राम पंचायत में पशु आश्रय केंद्र के निर्माण और सड़क बनवाने के नाम पर भारी घोटाला उजागर हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार, करोड़ों रुपये के फंड का दुरुपयोग किया गया—कागजों पर भव्य आश्रय केंद्र और पक्की सड़कें बनीं, लेकिन जमीन पर सिर्फ खानापूर्ति। चार दिनों से धरना दे रहे ग्रामीण चिल्ला रहे हैं, "जांच हो, दोषी को सजा दो।" भाकपा माले के नेता ने बताया कि यह घोटाला सकलडीहा ब्लॉक का सबसे बड़ा कांड है, जो ग्रामीण विकास को कुचल रहा है।

पुराना इतिहास: 1.28 करोड़ का गबन और डस्टबिन घोटाला
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले सकलडीहा ग्राम पंचायत में 1.28 करोड़ रुपये के गबन का आरोप लग चुका है। सरकारी फंड से बनीं योजनाओं के नाम पर सिर्फ कागजी कारनामा हुआ। ऊपर से डस्टबिन खरीद में भी लाखों की अनियमितता—गिनती से कम डस्टबिन आए, लेकिन बिल भारी। ग्रामीणों का कहना है, "बीडीओ साहब के इशारे पर प्रधान और सचिव नाच रहे हैं, विकास का पैसा लूटा जा रहा है।"

रोचक तथ्य जो चौंकाएंगे:
सकलडीहा ब्लॉक में 50 से अधिक ग्राम पंचायतें हैं, लेकिन भ्रष्टाचार के 10 से ज्यादा मामले पिछले दो सालों में सामने आ चुके।'सचिव से बीडीओ' वाला यह अधिकारी पहले ग्राम सचिव थे, जहां से प्रमोशन लेकर ब्लॉक के प्रमुख बने—ग्रामीण कहते हैं, "भ्रष्टाचार का 'एक्सपर्ट' अब बॉस।"
सलेमपुर घोटाले में टेंडर प्रक्रिया में 'बैल' हुई हेराफेरी, जहां ठेकेदारों को 20% 'कमीशन' का फॉर्मूला चल रहा।
धरने में 200 से अधिक ग्रामीण शामिल, जो नारे लगा रहे: "भ्रष्टाचारियों को जेल हो।"

कार्रवाई की मांग तेज
भाकपा माले ने जिलाधिकारी से तत्काल जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर 48 घंटे में सीधी कार्यवाही न हुई, तो आंदोलन और तेज होगा। क्या सकलडीहा का यह 'महाभ्रष्टाचार' अब प्रशासन की नजर में आएगा, या विकास खंड में 'नंगा नाच' जारी रहेगा? जिला प्रशासन अभी चुप्पी साधे है।

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