Hot Posts

6/recent/ticker-posts

चंदौली: गन हाउस लाइसेंस के नाम पर महाफर्ज़ीवाड़ा, दो दुकानों पर FIR

जांच में नाम पते निकले फर्जी, 700 से ज्यादा कारतूस गायब

सटीक संवाद, 26 मार्च 2026। चंदौली में दो लाइसेंसी गन हाउस संचालकों के फर्जी दस्तावेजों से जारी कराए गए शस्त्रों के घोटाले का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस छापेमारी में मालिकों के नाम‑पते फर्जी पाए गए, जबकि इन गन हाउसों से 700 से अधिक कारतूस गायब मिले, जिससे अवैध हथियार व्यापार की आशंका बढ़ गई है। आर्म्स एक्ट के तहत FIR दर्ज कर अब फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह और तस्कर नेटवर्क की गहन जांच चल रही है।

घटना विवरण 
स्थानीय पुलिस ने गुरुवार को चंदौली के दो लाइसेंसी गन हाउसों पर छापेमारी की, जहां लाइसेंस धारकों के दस्तावेजों की पड़ताल में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। मालिकों के नाम, पते और अन्य विवरण जाली साबित हुए, जो महाफर्जीवाड़े का संकेत देते हैं। इन गन हाउसों से 700 से ज्यादा कारतूस लापता पाए गए, जो अवैध हथियार व्यापार या आपराधिक गतिविधियों से जुड़े हो सकते हैं।

पुलिस कार्रवाई
FIR आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई है। जांच टीम ने गन हाउसों की रिकॉर्ड बुक, स्टॉक रजिस्टर और लाइसेंस फाइलें जब्त कीं। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि ये गन हाउस वर्षों से संचालित हो रहे थे, लेकिन वास्तविक मालिक कहीं और के निवासी हैं। पुलिस अब फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह और गायब कारतूसों की तस्करी के नेटवर्क की तलाश में छापेमारी कर रही है।

संभावित परिणाम
यह मामला चंदौली में अवैध हथियारों की उपलब्धता पर सवाल उठाता है, जो स्थानीय अपराध दर बढ़ाने का कारण बन सकता है। पुलिस ने जिलाधिकारी और उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपी है, जिसके बाद लाइसेंस रद्द करने और अन्य गन हाउसों की जांच की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। स्थानीय निवासियों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि यह घटना क्षेत्रीय सुरक्षा को चुनौती देती है।

एक साल में 399 कारतूस की 'रिकॉर्ड' खरीद
जांच में पता चला कि लाइसेंस धारक मुकुन्द रावत (चैनपुर, भभुआ बिहार) ने मात्र एक वर्ष में 399 कारतूस खरीदे, जबकि मोहम्मद कल्लू (बड़गांवा, शहाबगंज) ने 160 और जितेन्द्र सिंह (चौथी, कैमूर बिहार) ने 125 कारतूस लिए। चौंकाने वाली बात—ये सभी पते फर्जी निकले, और इन कारतूसों का 'नियम विरुद्ध' इस्तेमाल हुआ। कुल 700 से ज्यादा कारतूसों का पता लगाना पुलिस की प्राथमिकता।

धांधली की पोल कैसे खुली?
पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने गन हाउसों के रिकॉर्ड सत्यापित किए। दर्जनों लाइसेंस धारकों के नाम-पते फर्जी पाए गए। भौतिक सत्यापन पर उन पतों पर कोई व्यक्ति ही नहीं मिला। जीएस गन हाउस (पड़ाव, पीडीडीयू नगर) और वीर गन हाउस (चंदौली) का नवीनीकरण भी 2021 के बाद नहीं हुआ था, फिर भी वे वर्षों से कार्यरत रहे; अब सवाल उठ रहे हैं कि फर्जी दस्तावेजों पर जारी हथियारों का वास्तविक उपयोग किसने किया। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमें फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह और कारतूस तस्करी नेटवर्क की गहन जांच कर रही हैं, साथ ही अन्य गन हाउसों की जांच की प्रक्रिया आरंभ करने की संभावना जताई जा रही है। ये सुपरफ्लुअस खरीद “नियमविरुद्ध” मानी जा रही है, जिससे गायब कारतूसों की अवैध तस्करी की आशंका बढ़ गई है। 

5 साल पुराने लाइसेंस पर जारी हुए हथियार
ये गन हाउस बिना नवीनीकरण के सालों से कारोबार चला रहे थे। अब सवाल उठ रहा है—फर्जी दस्तावेजों से जारी असलहे और कारतूस किनके हाथ लगे? पुलिस गहन छानबीन कर रही है, और विभागीय कार्रवाई शुरू। प्रशासन ने शस्त्र लाइसेंस धारकों को सत्यापन अनिवार्य करवाने की चेतावनी दी है और लापरवाही बरतने पर सख्त कार्रवाई की बात कही है। अब सवाल जनता और सुरक्षा पर असर का है। स्थानीय निवासियों में चिंता बढ़ी है, क्योंकि यह घटना चंदौली में अवैध हथियारों की उपलब्धता और आपराधिक घटनाओं की दर बढ़ने की संभावना को उजागर करती है। 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ