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सकलडीहा के गांवों में भीम आर्मी का धमाकेदार सदस्यता

चंद्रशेखर आजाद के इशारे पर उमड़ी भीड़, सैकड़ों नए सदस्यों का जुड़ाव

चंदौली जिले के सकलडीहा तहसील क्षेत्र में भीम आर्मी ने चंद्रशेखर आजाद 'रावण' के स्पष्ट निर्देश पर जोरदार जनसंपर्क और सदस्यता अभियान चलाया। टीकापुर, कवई पहाड़पुर और बंधवापर जैसे गांवों में जिला अध्यक्ष रामचंद्र राम के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान ने ग्रामीण इलाकों में सामाजिक जागरूकता की लहर पैदा कर दी। 

सैकड़ों ग्रामीणों—खासकर दलित, पिछड़े और गरीब वर्ग के लोगों—ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। न केवल नई सदस्यताओं की बाढ़ आई, बल्कि शिक्षा, रोजगार, जातिगत भेदभाव और महिलाओं की सुरक्षा जैसे ज्वलंत मुद्दों पर खुली चर्चाएं हुईं, जिससे लोगों में एकजुटता का मजबूत संकल्प जगा।
अभियान की शुरुआत टीकापुर गांव से हुई, जहां सुबह 10 बजे से ही भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर लोगों से मुलाकात की। 

 जिला अध्यक्ष रामचंद्र राम ने बताया, "चंद्रशेखर आजाद का विजन बिल्कुल स्पष्ट है—हर गांव में भीम आर्मी की गूंज होनी चाहिए। उत्पीड़न, जातिवाद और आर्थिक शोषण के खिलाफ हम लोहा लेंगे। यह अभियान उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में सामाजिक क्रांति की नींव रखेगा।" रामचंद्र ने चंद्रशेखर आजाद को सलाम करते हुए कहा, "यह तो बस शुरुआत है। सकलडीहा पूरे चंदौली जिले की मिसाल बनेगा।"

गांववार आंकड़े और उत्साहजनक सहभाग
टीकापुर: 200 से अधिक नई सदस्यताएं। यहां बुजुर्ग निवासी लल्लन राम ने भावुक होकर कहा, "भीम आर्मी ने हमें पहली बार अपनी आवाज बुलंद करने का हौसला दिया। अब ऊंची जातियों का डर नहीं लगेगा। हम शिक्षा और रोजगार के लिए लड़ेंगे।"
कवई पहाड़पुर: युवाओं का जबरदस्त उत्साह, खासकर लड़कियों का। 150 से ज्यादा सदस्य बने। एक युवती सदस्य ने कहा, "भीम आर्मी ने हमें जातिगत भेदभाव से लड़ने की ताकत दी। लड़कियों की सुरक्षा हमारा प्रमुख मुद्दा होगा।"
बंधवापर: लोगों का अभूतपूर्व सहयोग। ग्राम पंचायत प्रतिनिधि श्यामलाल ने खुला समर्थन घोषित करते हुए कहा, "बंधवापर के हर घर से भीम आर्मी को पूरा साथ मिलेगा। हम जातिवाद और गरीबी के खिलाफ एकजुट हैं।" गांव के युवाओं और महिलाओं ने सड़कों पर जुलूस निकाला, 120 नई सदस्यताएं बनीं। एक महिला ने बताया, "पहली बार गांव में ऐसी एकता दिखी। अब भूमि विवाद और बेरोजगारी पर लड़ेंगे।" कुल 470 से अधिक सदस्य बने।

अभियान के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए, जिसमें डॉ. भीमराव आंबेडकर के गीत गाए गए और नारे लगाए गए—"जय भीम! जय भारत!"। लोगों ने अपनी समस्याओं—जैसे बेरोजगारी, स्कूलों की खराब स्थिति और भूमि विवाद—पर खुलकर बोला। एक किसान ने बताया, "रोजगार की तलाश में शहर जाना पड़ता है, लेकिन अब गांव में ही संघर्ष करेंगे।"

यह अभियान न केवल सदस्यता बढ़ाने तक सीमित रहा, बल्कि सामाजिक न्याय की नई लहर का संकेत दे रहा है। रामचंद्र राम ने घोषणा की कि अगले सप्ताह सकलडीहा के अन्य गांवों में इसी तरह के अभियान चलाए जाएंगे। चंदौली में भीम आर्मी की पैठ मजबूत हो रही है, जो राज्य स्तर पर एक बड़ा बदलाव ला सकता है।

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