चंदौली के सकलडीहा पीजी कॉलेज में आज, 24 अप्रैल 2026 को एक प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित हुआ, जहां सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने धूम्रपान और तंबाकू सेवन के खिलाफ कड़ा संकल्प लिया। 'धूम्रपान निषेध' विषय पर केंद्रित इस शपथ समारोह ने न केवल कैंपस को नशामुक्त बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया, बल्कि पूरे समाज को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। क्या आप जानते हैं कि धूम्रपान से हर साल भारत में लाखों युवा अपनी सेहत खो देते हैं? इस कार्यक्रम ने ठीक इसी खतरे को रोशनी में लाकर जागरूकता फैलाई।
कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर प्रदीप कुमार पांडेय की अध्यक्षता में हुई। उन्होंने छात्रों को धूम्रपान के घातक दुष्परिणामों—जैसे फेफड़ों की कैंसर, हृदय रोग और समय से पहले बुढ़ापे—के बारे में विस्तार से बताया। प्राचार्य महोदय ने जोर देकर कहा कि नशा केवल शरीर ही नहीं, बल्कि परिवार और समाज को भी बर्बाद कर देता है। इस संकल्प के साथ सभी ने प्रतिज्ञा की कि वे कभी धूम्रपान या तंबाकू का सेवन नहीं करेंगे और अपने दोस्तों को भी इससे दूर रखेंगे।
उप-प्राचार्य प्रोफेसर दया निधि सिंह यादव ने अपने प्रेरक संबोधन में युवाओं से अपील की कि वे धूम्रपान जैसी बुरी आदतों से दूर रहें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। उन्होंने एक चौंकाने वाला तथ्य साझा किया: विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, तंबाकू से प्रतिवर्ष 80 लाख मौतें होती हैं, जिनमें से 80% विकासशील देशों में।
प्रोफेसर दयाशंकर सिंह यादव ने कहा कि शिक्षा संस्थानों का दायित्व केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार और स्वस्थ आदतें विकसित करना भी है। वहीं, डॉ. यज्ञनाथ पांडेय ने जोर दिया कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाते हैं और युवाओं को सही राह दिखाते हैं।
कार्यक्रम में प्रोफेसर विजेंदर सिंह, प्रोफेसर समीम राईन, डॉ. अजय यादव, डॉ. अमन मिश्रा समेत महाविद्यालय के सभी शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। अंत में, सभी ने एक साथ धूम्रपान-मुक्त भारत बनाने का संकल्प दोहराया, जो कैंपस में उत्साह का संचार कर गया। यह आयोजन न केवल एक शपथ तक सीमित रहा, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ।
0 टिप्पणियाँ