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धान की नर्सरी डालने के लिए नहरें चालू करें, वरना बरसात का इंतजार लेट कर देगा रोपाई- पिंटू पाल

चंदौली- वाराणसी: धान की नर्सरी डालने का सही समय आ गया है, लेकिन नहरों का पानी न आने से हजारों एकड़ खेत सूखे पड़े हैं। मौसम विभाग की मानें तो अगले हफ्ते तक बरसात की कोई गुंजाइश नहीं, जिससे नर्सरी लेट होने का खतरा मंडरा रहा है। अगर समय पर नहरें चालू नहीं हुईं, तो रोपाई में देरी से फसल की पैदावार 20-30% तक गिर सकती है।

जिले के सिंचाई विभाग के अधिकारी बताते हैं कि नहरों का रखरखाव पूरा हो चुका है, लेकिन पानी छोड़ने का फैसला जलस्तर पर निर्भर करता है। पिछले साल भी इसी तरह की देरी से किसानों को करोड़ों का नुकसान हुआ था। धान की नर्सरी के लिए बीज बोने का आइडियल समय अप्रैल के आखिर से मई की शुरुआत है। अगर 10-15 दिन लेट हुई, तो पौधे कमजोर हो जाते हैं और रोपाई जून-जुलाई में खिसक जाती है, जब बरसात अनियमित हो सकती है।

किसान नेता पिंटू पाल, शेषनाथ यादव, दीनानाथ श्रीवास्तव, विजयकांत पासवान गुड्डू, मुन्ना सिंह, मोहन यादव ने कहा, "सरकार की 'एक बूंद ज्यादा पानी' योजना के तहत नहरें चालू होनी चाहिए। चंदौली के 50 हजार से ज्यादा किसान धान पर निर्भर हैं। देरी से नर्सरी डूबने या कमजोर होने का डर है।"

विशेषज्ञ बताते हैं नर्सरी के लिए प्रति एकड़ 8-10 किलो बीज इस्तेमाल करें, जमीन को अच्छी तरह तैयार रखें और डीएपी उर्वरक का छिड़काव करें। अगर नहर का पानी न मिले, तो ट्यूबवेल या ड्रिप सिंचाई का सहारा लें।

जिला प्रशासन ने किसानों को आश्वासन दिया है कि जल्द ही नहरों में पानी छोड़ा जाएगा। इससे समय पर रोपाई से न सिर्फ पैदावार बढ़ेगी, बल्कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बेहतर बिक्री भी सुनिश्चित होगी।

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