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------- डीएम साहब एक नजर इधर भी, चंदौली में मनरेगा योजना बनी 'दुधारू गाय'

पंचायतें और अधिकारी मिलकर लूट रहे लाखों, धरातल पर शून्य काम, पिंटू पाल ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग 

चंदौली, 05अप्रैल 2026: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का हाल कुछ ऐसा है कि यह गरीबों के लिए रोजगार का साधन कम, अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों की जेब भरने का जरिया ज्यादा बन गई है। क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत और ग्राम पंचायत के तिकड़ी मिलकर इस योजना को खूब 'दूह' रही हैं। कागजों पर हर गांव में 10-20 मजदूर काम कर रहे दिखाए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में एक भी काम नहीं हो रहा। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, इस बड़े भ्रष्टाचार में अधिकारियों की लंबी मिलीभगत से लूट मची हुई है।

कागजों पर काम, जमीनी सच्चाई शून्य
जिले के ग्रामीण इलाकों में मनरेगा के तहत सड़क निर्माण, तालाब खुदाई, वृक्षारोपण जैसे कामों का दावा किया जाता है, लेकिन स्थानीय निवासियों और जॉब कार्ड धारकों से बातचीत में सामने आया कि अधिकांश गांवों में कोई काम ही नहीं चल रहा। कागजी खानापूर्ति के जरिए मजदूरी के भुगतान दर्ज किए जा रहे हैं, जबकि वास्तविकता में मजदूरों को काम ही नहीं मिला। एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "कागज पर हमारा नाम लिखा जाता है, लेकिन न काम होता है, न मजदूरी। सब पंचायत के ठेकेदारों की जेब में चला जाता है।"

जॉब कार्ड धारकों से 10% कटौती, बाकी लूट
सूत्रों का दावा है कि जॉब कार्ड धारकों के बैंक खातों में भेजे जाने वाले पैसे का खेल लंबे समय से चल रहा है। मजदूरों को उनके खाते में आने वाले धन का मात्र 10 प्रतिशत हिस्सा दिया जाता है, जबकि शेष 90 प्रतिशत पंचायत प्रतिनिधि और अधिकारी हड़प लेते हैं। कई मामलों में जॉब कार्ड धारक खुद इस खेल में शामिल हो जाते हैं, क्योंकि दबाव और लालच के कारण वे चुप रहते हैं। एक पूर्व जॉब कार्ड धारक ने कहा, "पैसे आते हैं तो प्रतिनिधि आ जाते हैं। 10 फीसदी ले लो, बाकी हमें दो, वरना अगली बार नाम ही कट जाएगा।"

अधिकारियों की निष्क्रियता, शिकायतों पर 'बल्ले-बल्ले'
शिकायतों के बावजूद जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। सूत्र बताते हैं कि 'सैयां भई कोतवाल' वाली स्थिति है—ऊपरी स्तर के अधिकारी खुद कमीशनखोरी में लिप्त हैं, इसलिए निचले स्तर पर दबाव बनाकर पैसे वसूले जा रहे हैं। मनरेगा योजना अब कमाई का सबसे बढ़िया जरिया बन चुकी है, जहां करोड़ों रुपये का खेल चल रहा है। पिछले एक साल में जिले में मनरेगा के तहत सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया गया, लेकिन निरीक्षण में अधिकांश कार्य अधूरे या काल्पनिक पाए गए।

जिला प्रशासन की चुप्पी, भविष्य में क्या?
जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से जब इस बारे में संपर्क किया गया, तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। हालांकि, एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हम जांच के आदेश दे चुके हैं। दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।"  सकलडीहा सेक्टर 1 जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशी व किसान नेता पिंटू पाल अब उच्च न्यायालय या केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। यदि यह भ्रष्टाचार थमा नहीं, तो मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।

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