ट्रकों की तेज रफ्तार से धूल उड़ने के कारण दुकानदारों का माल गंदा हो रहा है और दृश्य व पर्यावरण प्रदूषण बढ़ा है। कई व्यापारियों ने बताया कि शटर व अलमारियों को नुकसान हुआ है तथा छोटे-मोटे हादसे भी सामने आए हैं। दुकानों के आगे और बाजार के गले में गुजरने वाली आवाज़ व झटके के कारण सुबह‑सुबह दुकानें खोलना मुश्किल हो गया है और ग्राहकों की संख्या में गिरावट आई है।
स्थानीय बाइक चालक अंगद ने बताया कि कल वह तेज रफ्तार ट्रक की वजह से चोटिल होने से बचा ; ऐसे कैसा महसूस होता है, यह रोजाना की चिंता बन चुकी है। दुकानदार भोला कहते हैं कि बच्चों को स्कूल भेजना भी असुरक्षित हो गया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार और माल ढुलाई करने वाले वाहन बिना उचित अनुमति व निगरानी के खुलेआम भारी माल ले जा रहे हैं, जबकि शासन‑प्रशासन मौन साधे हुए हैं। ग्राम प्रधान, व उप‑जिला अधिकारी को कई बार शिकायतें दी गईं, परन्तु अभी तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बाजार में सीसीटीवी कैमरों की कमी और मार्गों पर कानूनी निगरानी के अभाव में दण्डात्मक कार्रवाई भी नहीं हो सकी।
नागरिकों की मांगों में मुख्य मार्ग पर स्पीड ब्रेकर व संकेत‑बोर्ड लगाना, धूल नियंत्रण के लिए नियमित पानी छिड़काव, और दिन के व्यस्त घंटे में भारी वाहनों का प्रतिबंध शामिल है। वे समयबद्ध नियम लागू करने, पुलिस चेकिंग कड़ी करने और बाजार के अंदर से भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित करने की भी मांग कर रहे हैं। साथ ही व्यापारियों, नागरिकों व पंचायत का एक निगरानी समूह बनाकर प्रशासन से साझा समाधान की अपील की जा रही है। स्थानीय लोग चेतावनी देते हैं कि अगर समय रहते नियमन व निगरानी नहीं हुई तो किसी बड़े हादसे की संभावना बढ़ जाएगी; इसलिए संबंधित अधिकारी शीघ्र और कड़े कदम उठाएं।
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