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सैयदराजा में समाजसेवी सुनील विश्राम का साहसिक कदम

पत्नी के निधन पर मृत्यु भोज का बहिष्कार, ब्राह्मणवादी कर्मकांड छोड़ा

चंदौली — सैयदराजा क्षेत्र के मानिकपुर सानी गांव के समाजसेवी सुनील विश्राम ने अपनी पत्नी जानकी देवी (42) के देहांत के बाद परंपरागत मृत्यु भोज न कर बहुउद्देश्यीय श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर सामाजिक कुरीति का बहिष्कार कर एक मिसाल कायम की है। दीर्घकालिक बीमारी के बाद हुई मृत्यु के समय सुनील ने परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ और दिखावटी रीतियों के खिलाफ यह निर्णायक कदम उठाया।


सुनील ने बताया कि परंपरा के मुताबिक होने वाला मृत्यु भोज गरीब और मध्यम वर्गीय घरों पर भारी आर्थिक दबाव डालता है और कई परिवारों को कर्ज में फँसा देता है। “हमने देखा है कि शोक के समय लोग सामाजिक दबाव में आकर बड़ी मात्रा में खर्च कर देते हैं; यह दिखावा और संसाधनों की बर्बादी है,” उन्होंने कहा। इसलिए उन्होंने परंपरागत ब्राह्मणवादी कर्मकांड का पालन न करते हुए परिवारिक और ग्रामीण लोगों के साथ मिलकर सर्वधर्म प्रार्थना, दीप प्रज्वलन और मौन श्रद्धांजलि रखी।

स्थानीय लोगों ने इस कदम की सराहना की है। कई ग्रामीणों का कहना है कि अब समय आ गया है कि वे परंपरागत रस्म-रिवाजों को विवेक के साथ अपनाएँ और अनावश्यक खर्चों से बचें। एक ग्रामीण ने कहा, “यह पहल दूसरों के लिए प्रेरणा बनेगी; शोक में गरिमा और आर्थिक समझ दोनों जरूरी हैं।”

समाजसेवी सुनील का मानना है कि सच्ची श्रद्धांजलि पैसे या भोज से नहीं, बल्कि दिवंगत की याद और समाज में सामंजस्य बनाए रखने से जतायी जाती है। उन्होंने स्थानीय समाजसेवियों और गाँव के बुजुर्गों से अपील की है कि वे भी ऐसे परंपराओं की समीक्षा करें और जरूरत के अनुसार सरल, सादे तरीके अपनाएँ।

सुनील की इस पहल से न केवल परिवारिक बजट की रक्षा हुई बल्कि सामाजिक संदेश भी फैलता दिख रहा है। ग्रामीणों में चर्चा है कि यह कदम क्षेत्र में अनावश्यक धार्मिक खर्चों और दिखावटी रीति-रिवाजों पर पुनर्विचार की शुरुआत कर सकता है।

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