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शिष्यों ने याद किए गुरु के कारनामे--कहा जोड़ी, गदा, कुश्ती के बादशाह थे अदालत पहलवान

ढाई मन का गदा एक हाथ से फेरा, नायाब कौशल पर श्रद्धांजलि

चंदौली। पारंपरिक पहलवानी और व्यायाम की दुनियाँ में एक अलग पहचान रखने वाले श्यामबृक्ष पांडेय उर्फ"अदालत पहलवान" की 7वीं पुण्यतिथि पर सोमवार को उनके पैतृक गांव बथावर में धूमधाम से मनाई गई। समारोह में उनके शिष्यों, ग्रामीणों और स्थानीय गणमान्यों ने पहलवान की नायाब कलाओं व जीवन‑संघर्ष को याद कर श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में विशेष रूप से अदालत पहलवान द्वारा ढाई मन वजनी गदा को एक हाथ से घुमाने की प्रतिबद्धता और निपुणता को याद किया गया।

उनके पूर्व शिष्य "प्रभाकर पहलवान" ने बताया कि सकलडीहा क्षेत्र के बथावर के ग्रामीण परिवार में जन्मे अदालत पहलवान ने कुश्ती के साथ-साथ जोड़ी और गदा में भी अपना अनूठा स्थान बनाया। "उनका जोश और शक्ति आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा है।" उनके संरक्षण और प्रशिक्षण के कारण कई शिष्य पहलवानी के दम पर प्रशासनिक पदों व सरकारी नौकरियों में कार्यरत हैं। उनका अनुशासनात्मक प्रशिक्षण ने आने वाली पीढ़ियों को शारीरिक मजबूती के साथ-साथ आत्मसम्मान भी सिखाया। "वह सख्त थे, पर दिल के बहुत बड़े थे; उनका हमेशा मानना था कि शक्ति का सही उपयोग सम्मान और सुरक्षा के लिए होना चाहिए

समारोह के दौरान पहलवान के जीवन से जुड़ी पुरानी तस्वीरों और पुरस्कारों का प्रदर्शन भी रखा गया, जिसमें भारी संख्या में लोग आए और नजरे जमा कर दीं। आयोजकों के अनुसार यह पुण्यतिथि हर वर्ष इस व्यायाम शाला स्थान पर इसलिए मनायी जाती है ताकि नई पीढ़ी उनके आदर्शों और पारंपरिक खेलों की महत्ता को याद रखे।

अवसर पर उनके पुत्र रजनीकांत पांडेय ने शिष्यों को अंगवस्त्र और माला पहनाकर उनका सम्मान किया। समारोह में प्रधान अर्जुन मौर्या, सेवानिवृत्त शिक्षक शिवमूरत गुप्ता, शिवशंकर पाठक, गुड्डू गुप्ता, अभय पाठक एवं सैकड़ों ग्रामीण भी मौजूद थे।

बालकिशुन, मोहन, कांता, विक्रमा, भोला, अजीत, रामअवतार, नवीन और जितेंद्र सहित कई शिष्यों ने गुरु की कलाओं व यादों का स्मरण कराया और बताया कि अदालत पहलवान की कला का प्रभाव अन्य जनपदों तक भी फैला हुआ था। आयोजकों ने कहा कि इस तरह की पुण्यतिथियाँ स्थानीय पारंपरिक खेलों के संरक्षण तथा नई पीढ़ी में रुचि जागृत करने का माध्यम बनी रहेंगी।

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