चंदौली। देश का अन्नदाता इन दिनों दोहरी मार झेलने को मजबूर है। एक तरफ प्रकृति का लगातार बदलता मिजाज किसानों की मेहनत पर पानी फेर रहा है, तो दूसरी ओर सिंचाई और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी उनकी मुश्किलों को और बढ़ा रही है। कई इलाकों में नहरें सूखी पड़ी हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में लो-वोल्टेज, बार-बार ट्रिपिंग और अनियमित बिजली आपूर्ति के कारण खेतों की सिंचाई प्रभावित हो रही है।
किसानों का कहना है कि खेती अब भगवान भरोसे होती जा रही है। कभी सूखा, कभी बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और भीषण गर्मी जैसी प्राकृतिक आपदाएं फसलों को नुकसान पहुंचा रही हैं। ऐसे में जब फसल बचाने के लिए सिंचाई की सबसे अधिक जरूरत होती है, तब नहरों में पानी नहीं मिलता और बिजली व्यवस्था भी जवाब दे जाती है।खेती से घटती आय का असर अब किसानों के पारिवारिक जीवन पर भी साफ दिखाई देने लगा है। आर्थिक तंगी के चलते बच्चों की पढ़ाई, इलाज और बेटियों के विवाह जैसी आवश्यक जिम्मेदारियां प्रभावित हो रही हैं।महंगे बीज, खाद, सिंचाई और बढ़ते कर्ज के बोझ ने किसानों की कमर तोड़ दी है। मेहनत बढ़ती जा रही है, लेकिन आमदनी लगातार घट रही है।
किसानों का आरोप है कि हर चुनाव में सिंचाई, बिजली और कृषि सुधार के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात नहीं बदलते। उनका कहना है कि यदि समय रहते नहरों में पर्याप्त पानी, निर्बाध एवं पर्याप्त वोल्टेज वाली बिजली और प्रभावी सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, तो कृषि संकट और गंभीर हो जाएगा। किसानों ने सरकार से मांग की है कि युद्धस्तर पर नहरों में पानी छोड़ा जाए, ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए तथा प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को समयबद्ध मुआवजा और राहत प्रदान की जाए।
किसान नेता पिंटू पाल ने किसानों की बदहाल स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि खेती लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है, जिसका सबसे अधिक असर किसानों के परिवारों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा, "खेती से आमदनी नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई, दवाई और बेटियों के विवाह जैसी जरूरी जिम्मेदारियां भी प्रभावित हो रही हैं। किसान मजबूरी में कर्ज ले रहा है, लेकिन उसकी समस्याओं का स्थाई समाधान नहीं हो पा रहा है। यदि नहरों में समय पर पानी, पर्याप्त बिजली आपूर्ति और बेहतर सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, तो किसान आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट जाएगा। सरकार को किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए, क्योंकि अन्नदाता मजबूत होगा तभी गांव, कृषि और देश का भविष्य सुरक्षित रहेगा।"
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