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किसानों की जमीन बचाने की लड़ाई को मिला सीपीआई का साथ

संयुक्त मोर्चा बनाने की घोषणा, कल होगी रणनीतिक बैठक

चंदौली। विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नेतृत्व में बिछिया स्थित धरना स्थल पर चल रहे अनिश्चितकालीन धरने के आठवें दिन सोमवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) [सीपीआई (एमएल)] ने अपना समर्थन दिया।

धरना स्थल पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए सीपीआई (एमएल) के सचिव अनिल पासवान ने कहा कि सरकार किसानों की उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण कर उसे औने-पौने दामों पर पूंजीपतियों के हित में उपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी किसी भी ऐसी नीति का विरोध करती है, जिसमें किसानों और मजदूरों की जमीन कानून की आड़ में जबरन छीनी जाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि धान उत्पादन वाले क्षेत्रों की उपजाऊ भूमि पर लगातार एक्सप्रेसवे और हाईवे बनाए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में कृषि और खाद्य सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर संसद और विधानसभा में विंध्य एक्सप्रेसवे का मुद्दा उठाने तथा किसानों के हित में इस परियोजना का विरोध करने की अपील की।

किसान संघर्ष मोर्चा के संयोजक एवं भाकियू (टिकैत) के वाराणसी मंडल प्रवक्ता मणि देव चतुर्वेदी 'फौजी' ने बताया कि आंदोलन की आगामी रणनीति तय करने के लिए 21 जुलाई को दोपहर 1 बजे जिले के विभिन्न किसान संगठनों तथा राजनीतिक दलों के किसान प्रकोष्ठों की बैठक बुलाई गई है। उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा का गठन कर आंदोलन को और मजबूत किया जाएगा, जिसमें मिर्जापुर और सोनभद्र के किसान भी शामिल होंगे।

धरने में आनंद कुमार मौर्य, गोपाल सिंह, रोशन सिंह, उपेंद्र सिंह, रोहित सिंह सहित भाकपा (माले) के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं किसान मौजूद रहे।

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