मेरठ। दलित छात्रा ललिता गौतम के परिवार से मिलने जा रहे सांसद चंद्रशेखर आज़ाद के काफिले को शुक्रवार को रूहाना टोल प्लाजा पर रोक दिए जाने के बाद विवाद बढ़ गया। रोकथाम को लेकर सांसद और पुलिस के बीच तीखी बहस हुई, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई घंटे तक ट्रैफिक बाधित रहा और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई।
पार्टी सूत्रों और सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो के अनुसार चंद्रशेखर मेरठ में पीड़ित परिवार से मिलने के लिए आ रहे थे। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को देखते हुए उन्हें टोल प्लाज़ा पर रोकने का निर्णय लिया। पुलिस और अर्धसैनिक बल व्यापक स्तर पर तैनात रहे।
घटना स्थल से मिली जानकारी के मुताबिक सांसद तथा उनके समर्थकों ने रोक को अवैध बताया और टोल के पास जोरदार नोकझोंक शुरू हो गई। कुछ समय के लिये धक्का‑मुक्की भी हुई, पर किसी बड़े हिंसक घटनाक्रम की सूचना नहीं मिली। पुलिस ने माहौल को काबू करने के बाद सांसद को पीछे भेज दिया और स्थिति शांत कराई।
थाना रूहाना के प्रभारी व वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि सांसद के काफिले ने प्रशासन से पूर्व समन्वय और सुरक्षा व्यवस्थाओं के बारे में सूचना नहीं दी थी, इसलिए रोक आवश्यक थी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने पत्रकारों से कहा, "हम किसी सार्वजनिक व्यक्ति के अधिकार का हनन नहीं करते, पर बिना सूचना व सुरक्षा के बड़े पैमाने पर आने से कानून‑व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।" पुलिस ने बताया कि कोई गंभीर चोट या गिरफ्तारी नहीं हुई।
सांसद और उनके सहयोगियों ने प्रशासन की कार्रवाई की निन्दा की और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश मानते हुए पुलिस पर 'गुंडागर्दी' का आरोप लगाया। सहयोगियों ने सोशल मीडिया पर घटनाक्रम के वीडियो साझा किए, जिनमें अधिकारियों से तीखी बहस दिखती है।
स्थानीय तौर पर रूहाना टोल प्लाजा पर वाहनों के घंटों रुकने से राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लग गया। यात्री और मालवाहक वाहन रूट बदलने या लंबा इंतजार करने को मजबूर रहे। स्थानीय व्यापारी व राहगीर प्रशासन से बेहतर समन्वय और पूर्व सूचना की मांग कर रहे हैं। बाद में प्रशासन ने ट्रैफिक नियंत्रित कर मार्ग खोला।राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज रही।
विपक्षी दलों ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए और इसे आवाज दबाने का प्रयास बताया। वहीं कुछ स्थानीय प्रतिनिधियों व अधिकारियों ने कहा कि कानून‑व्यवस्था बनाए रखने के लिए तत्काल रोक आवश्यक थी और किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम के लिए पूर्व अनुमति व सुरक्षा प्रबंध जरूरी हैं।
आगे क्या होगा — सांसद व प्रशासन के बीच संपर्क स्थापित करने की कोशिशें जारी हैं। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि विधायक व जिलाधिकारी स्थिति की समीक्षा कर सकते हैं और पीड़ित परिवार से मिलने के लिए किसी नियंत्रित स्थान पर बैठक कराई जा सकती है। पुलिस ने कहा है कि यदि सांसद शांति बनाए रखते हुए उचित अनुमति लेकर आते हैं, तो उन्हें परिवार से मिलने में सहायता दी जाएगी।
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