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धरना स्थल से किसान नेता मणि देव चतुर्वेदी गिरफ्तार, कस्टडी में शुरू किया आमरण अनशन

चंदौली। विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण और किसानों की मांगों को लेकर चल रहे अनिश्चितकालीन धरने के बीच सोमवार की देर रात किसान नेता मणि देव चतुर्वेदी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता सतीश सिंह चौहान के अनुसार, रात करीब 11 बजे सदर सीओ की मौजूदगी में थाना चंदौली पुलिस की टीम धरना स्थल पर पहुंची और वहां मौजूद किसान बाबूलाल यादव, संरोष यादव तथा दशरथ राम को भी अपने साथ ले गई। हालांकि, बाद में तीनों किसानों को छोड़ दिया गया, जबकि किसान नेता मणि देव चतुर्वेदी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

संयुक्त किसान मोर्चा ने पुलिस की इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब किसान अपनी मांगों को लेकर जिले में निर्धारित धरना स्थल पर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे थे, तो किसान नेता को वहां से गिरफ्तार किए जाने का औचित्य क्या है। किसान नेताओं का कहना है कि यदि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के लिए निर्धारित धरना स्थल भी सुरक्षित नहीं रहेगा तो किसान आखिर अपनी समस्याएं और मांगें प्रशासन तक किस माध्यम से पहुंचाएंगे।

सतीश सिंह चौहान ने बताया कि विंध्य एक्सप्रेसवे को लेकर प्रभावित किसान लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में उनकी समस्याओं का अपेक्षित समाधान नहीं किया गया है। इसी को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन धरना चल रहा है। किसान नेताओं का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि प्रशासन और सरकार तक किसानों की बात पहुंचाना है।

धरना स्थल से गिरफ्तारी पर उठे सवाल

किसान नेता मणि देव चतुर्वेदी की गिरफ्तारी के बाद आंदोलनकारी किसानों में नाराजगी देखी गई। संयुक्त किसान मोर्चा के सतीश सिंह चौहान ने कहा कि किसानों को अपनी बात रखने के लिए प्रशासन की ओर से निर्धारित स्थानों पर धरना देने का अधिकार होना चाहिए। ऐसे में यदि उसी धरना स्थल से किसान नेता को गिरफ्तार किया जाता है, तो इससे आंदोलन कर रहे किसानों के बीच असंतोष पैदा होना स्वाभाविक है।

सतीश सिंह चौहान ने कहा कि किसान अपनी जमीन और भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि भूमि उनके लिए केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उनकी आजीविका और परिवार की आर्थिक सुरक्षा का आधार है। इसलिए जमीन से जुड़े मामलों में किसानों की सहमति, उचित मुआवजा और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना जरूरी है।

किसान नेताओं ने कहा कि आंदोलन के दौरान प्रशासन के साथ वार्ता का रास्ता खुला रहना चाहिए। उनका आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे धरने के बीच किसान नेता की गिरफ्तारी से स्थिति और तनावपूर्ण हो सकती है। हालांकि पुलिस की ओर से गिरफ्तारी के संबंध में दर्ज मुकदमे और उसके आधार की विस्तृत जानकारी समाचार लिखे जाने तक किसान पक्ष द्वारा उपलब्ध नहीं कराई गई थी।

कस्टडी में किसान नेता ने शुरू किया आमरण अनशन

गिरफ्तारी के बाद किसान नेता मणि देव चतुर्वेदी ने पुलिस कस्टडी में ही आमरण अनशन शुरू कर दिया। किसान नेता ने सदर थाना प्रभारी को मीडिया की मौजूदगी में अपनी मांग से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासन बिछिया स्थित धरना स्थल पर किसानों को शांतिपूर्ण धरना देने की अनुमति नहीं देता, तब तक उनका आमरण अनशन जारी रहेगा।
मणि देव चतुर्वेदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसानों की जमीन का सवाल उनके लिए बेहद गंभीर है। उन्होंने आंदोलन के दौरान कहा कि किसान अपनी जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर अपनी जान तक देने को तैयार हैं, लेकिन जमीन नहीं देंगे। उनके इस ऐलान के बाद किसान आंदोलन को लेकर प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।

किसान नेता की गिरफ्तारी और उनके द्वारा कस्टडी में आमरण अनशन शुरू किए जाने की सूचना के बाद बड़ी संख्या में किसान सदर तहसील पहुंच गए। किसानों ने वहां डटे रहकर मणि देव चतुर्वेदी की रिहाई और शांतिपूर्ण धरने की अनुमति दिए जाने की मांग उठाई।

सदर तहसील में जुटे सैकड़ों किसान

समाचार लिखे जाने तक मणि देव चतुर्वेदी की रिहाई नहीं हुई थी। वहीं, किसान नेता की गिरफ्तारी के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े किसान और समर्थक सदर तहसील परिसर में डटे रहे। आंदोलनकारियों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।
संयुक्त किसान मोर्चा के सतीश सिंह चौहान, अशोक सिंह, महेश्वर सिंह, राम नारायण यादव, डॉ. राजीव, पूर्व सैनिक बाबूलाल, कन्हैया मौर्या, प्रभाकर सिंह, हाकिम सुलेमानी, विनोद चौहान समेत बड़ी संख्या में किसान सदर तहसील में मौजूद रहे।

किसानों के जुटने के कारण प्रशासन की गतिविधियां भी बढ़ गईं।

किसानों का कहना है कि आंदोलन को दबाने के बजाय प्रशासन को किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता करनी चाहिए। उनका कहना है कि जमीन से जुड़े मुद्दे बातचीत और सहमति के माध्यम से हल किए जा सकते हैं। किसान नेताओं ने प्रशासन से मांग की कि गिरफ्तार किए गए मणि देव चतुर्वेदी को तत्काल रिहा किया जाए और बिछिया स्थित धरना स्थल पर शांतिपूर्ण आंदोलन की अनुमति दी जाए।

आखिर किसान अपनी बात कहां रखेंगे?’

गिरफ्तारी के बाद किसान नेता मणि देव चतुर्वेदी ने सवाल उठाया कि यदि जिले में चिन्हित धरना स्थल पर भी किसानों को अपनी बात रखने की अनुमति नहीं मिलेगी तो आखिर वे अपनी समस्याएं कहां और किस माध्यम से रखेंगे। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण आंदोलन के माध्यम से अपनी मांगों को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना किसानों का अधिकार है।

किसान पक्ष का कहना है कि विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना से जुड़े किसानों के बीच लंबे समय से भूमि अधिग्रहण को लेकर असंतोष है। किसान चाहते हैं कि उनकी समस्याओं पर अधिकारियों और संबंधित विभाग के स्तर से गंभीरता से सुनवाई हो। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।

संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रशासन से टकराव की स्थिति पैदा करने के बजाय वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है। किसान नेताओं का कहना है कि वे किसी भी प्रकार की हिंसा या अशांति के पक्ष में नहीं हैं और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठाते रहेंगे।

प्रशासन और किसानों के बीच बढ़ सकता है टकराव

मणि देव चतुर्वेदी की गिरफ्तारी के बाद आंदोलन का मुद्दा अब और गंभीर होता दिखाई दे रहा है। एक तरफ किसान नेता की रिहाई और धरने की अनुमति की मांग को लेकर किसान सदर तहसील में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ गिरफ्तार किसान नेता द्वारा कस्टडी में आमरण अनशन शुरू किए जाने से प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है।

किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं की तो आंदोलन और व्यापक किया जा सकता है। वहीं किसान नेता की गिरफ्तारी के कारण आंदोलनकारी किसानों में नाराजगी बढ़ने की बात भी सामने आ रही है।

फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। किसान नेता की रिहाई होगी या नहीं और बिछिया स्थित धरना स्थल पर किसानों को दोबारा शांतिपूर्ण धरने की अनुमति मिलेगी अथवा नहीं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। समाचार लिखे जाने तक किसान नेता मणि देव चतुर्वेदी पुलिस कस्टडी में थे और उनके समर्थन में संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े सैकड़ों किसान सदर तहसील में मौजूद रहकर आंदोलन जारी रखे हुए थे।

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