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सभी शहीदों की प्रतिमाएं लगने तक शहादत दिवस कार्यक्रम का बहिष्कार करेगी सपा

शहीद शिलापट पर नौ नाम, तीन की ही प्रतिमाएं स्थापित; अंगनू बिंद, चिंगनू चमार समेत छह शहीदों की प्रतिमाएं लगाने की मांग

धानापुर, चंदौली। धानापुर कस्बा स्थित ऐतिहासिक शहीद स्मारक स्थल पर आयोजित शहादत दिवस कार्यक्रम को लेकर समाजवादी पार्टी और शहीद स्मारक समिति के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गया है। समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह, सकलडीहा विधायक प्रभु नारायण यादव और पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू ने शहीद स्मारक समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया है। सपा नेताओं का आरोप है कि शहीद स्मारक समिति सत्ता पक्ष के दबाव में काम कर रही है और स्वतंत्रता संग्राम में बलिदान देने वाले सभी शहीदों को स्मारक पर समान सम्मान नहीं दिया जा रहा है।

हालांकि कार्यक्रम में शामिल नहीं होने के बावजूद सपा नेताओं ने शहीदों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए शहीद स्मारक स्थल और धानापुर थाना परिसर पहुंचकर स्वतंत्रता संग्राम के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। नेताओं ने शहीदों को नमन करते हुए कहा कि देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों का सम्मान किसी राजनीतिक दल या संस्था की सीमा में नहीं बंधना चाहिए।

सपा नेताओं ने मुख्य रूप से मांग उठाई कि शहीद शिलापट पर जिन सभी शहीदों के नाम अंकित हैं, उन सभी की प्रतिमाएं शहीद स्मारक परिसर में स्थापित की जाएं। नेताओं के अनुसार शहीद शिलापट पर कुल नौ शहीदों के नाम अंकित हैं, लेकिन वर्तमान में इनमें से केवल तीन शहीदों की प्रतिमाएं ही स्थापित की गई हैं। सपा नेताओं का आरोप है कि शेष छह शहीदों की प्रतिमाएं अभी तक स्थापित नहीं की गई हैं।

सपा नेताओं द्वारा बताए गए शेष शहीदों में अंगनू बिंद, चिंगनू चमार, पुरुषोत्तम कोइरी, विश्वनाथ गोंड, शिवमंगल चौधरी और राजकुमार गिरी के नाम शामिल हैं। नेताओं का आरोप है कि इन शहीदों की प्रतिमाएं अभी तक स्थापित नहीं की गई हैं, जबकि इनके नाम शहीद शिलापट पर अंकित हैं। सपा नेताओं का कहना है कि जब शहीदों के नाम स्मारक पर दर्ज हैं तो उनके योगदान को प्रतिमा के माध्यम से भी सम्मान मिलना चाहिए।

सांसद वीरेंद्र सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए सभी वीरों का सम्मान समान रूप से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई किसी एक व्यक्ति, परिवार, जाति या वर्ग की लड़ाई नहीं थी। देश को अंग्रेजी हुकूमत से मुक्त कराने के लिए समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों ने संघर्ष किया और अनेक लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी।

सांसद ने शहीद स्मारक समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि समिति सत्ता पक्ष के दबाव में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति अथवा संस्था का विरोध करना नहीं है, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के सभी शहीदों को समान सम्मान दिलाना है।

सांसद वीरेंद्र सिंह के मुताबिक शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित करने के लिए उनके प्रयास से 20 लाख रुपये का बजट स्वीकृत कराया जा चुका है। इसके बावजूद शेष शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित नहीं किए जाने पर उन्होंने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब सरकार की ओर से बजट उपलब्ध कराया जा चुका है तो प्रतिमाओं की स्थापना में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि शहीद स्मारक केवल पत्थर, प्रतिमाओं और भवनों का परिसर नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को जानने और समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए स्मारक परिसर में उन सभी वीरों को स्थान मिलना चाहिए, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना जीवन न्योछावर किया।

सांसद ने स्पष्ट किया कि जब तक स्वतंत्रता संग्राम में बलिदान देने वाले सभी शहीदों की प्रतिमाएं शहीद स्मारक परिसर में स्थापित नहीं की जातीं, तब तक समाजवादी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता शहीद स्मारक समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने इसे किसी राजनीतिक कार्यक्रम का विरोध न बताते हुए शहीदों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया।

सकलडीहा विधायक प्रभु नारायण यादव ने भी सांसद के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शहीदों के सम्मान में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। जिन वीरों ने देश की आजादी के लिए अपना जीवन बलिदान किया, उन्हें आने वाली पीढ़ियों के सामने सम्मान के साथ प्रस्तुत करना समाज की जिम्मेदारी है।

पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू ने कहा कि धानापुर की धरती स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यहां के लोगों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया और अनेक लोगों ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। ऐसे में स्मारक परिसर में सभी शहीदों को समान स्थान मिलना चाहिए।

सपा नेताओं ने कहा कि शहीद शिलापट पर नौ नाम अंकित होना इस बात का प्रमाण है कि स्वतंत्रता संग्राम में क्षेत्र के कई वीरों ने बलिदान दिया था। यदि शिलापट पर सभी के नाम दर्ज हैं तो स्मारक पर उनकी प्रतिमाएं स्थापित करने की मांग स्वाभाविक है। नेताओं ने सवाल उठाया कि जब केवल तीन शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं तो अन्य शहीदों को समान सम्मान क्यों नहीं दिया जा रहा है।

सपा नेताओं का आरोप है कि अंगनू बिंद, चिंगनू चमार, पुरुषोत्तम कोइरी, विश्वनाथ गोंड, शिवमंगल चौधरी और राजकुमार गिरी की प्रतिमाएं अभी तक स्थापित नहीं की गई हैं। उन्होंने कहा कि इन शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित होने से धानापुर के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास और अधिक व्यापक रूप से सामने आएगा।

सपा नेताओं ने शहीद स्मारक स्थल के साथ धानापुर थाना परिसर में भी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनका विरोध शहीद दिवस अथवा शहीद स्मारक का नहीं है। वे स्वयं शहीदों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे हैं। उनका विरोध स्मारक समिति की कार्यप्रणाली और सभी शहीदों को समान सम्मान नहीं मिलने को लेकर है।

धानापुर का शहादत दिवस वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं की स्मृति में मनाया जाता है। अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलन के दौरान धानापुर क्षेत्र में भी आंदोलनकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी थी। इस संघर्ष में कई स्वतंत्रता सेनानियों ने गिरफ्तारी, यातना और बलिदान का सामना किया। इसी गौरवशाली इतिहास की स्मृति में प्रत्येक वर्ष शहादत दिवस मनाया जाता है।

सपा नेताओं का कहना है कि धानापुर का शहीद स्मारक क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है। यहां आने वाले विद्यार्थियों और युवा पीढ़ी को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि उनके क्षेत्र के किन-किन लोगों ने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया था। यदि सभी शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित होती हैं और उनके जीवन एवं बलिदान का परिचय भी स्मारक परिसर में प्रदर्शित किया जाता है तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक धरोहर साबित होगा।

स्थानीय स्तर पर भी शहीद स्मारक के विकास और संरक्षण को लेकर समय-समय पर मांग उठती रही है। लोगों का कहना है कि स्मारक स्थल को ऐसा स्वरूप दिया जाना चाहिए जहां धानापुर के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े सभी प्रमुख सेनानियों और शहीदों की जानकारी उपलब्ध हो। इससे युवा पीढ़ी को अपने क्षेत्र के इतिहास से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

शहादत दिवस के मौके पर सपा नेताओं के बहिष्कार के ऐलान से कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक चर्चा भी तेज हो गई है। एक तरफ सपा नेताओं ने सभी शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित करने की मांग को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ अब निगाहें शहीद स्मारक समिति की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

सांसद वीरेंद्र सिंह द्वारा 20 लाख रुपये के बजट की बात सामने रखे जाने के बाद यह मुद्दा और महत्वपूर्ण हो गया है। सपा नेताओं का कहना है कि यदि धनराशि उपलब्ध है तो शेष शहीदों की प्रतिमाओं की स्थापना की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जानी चाहिए।

सपा नेताओं ने कहा कि शहीदों के सम्मान का सवाल राजनीति से ऊपर है। आजादी की लड़ाई में जिसने भी अपना जीवन बलिदान किया, उसका योगदान देश की अमूल्य धरोहर है। इसलिए किसी भी शहीद को उसके नाम, जाति, वर्ग अथवा किसी अन्य आधार पर सम्मान से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

फिलहाल सपा नेताओं ने स्पष्ट ऐलान किया है कि जब तक शहीद स्मारक स्थल पर आजादी की लड़ाई में बलिदान देने वाले सभी शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित नहीं होतीं, तब तक पार्टी के नेता और कार्यकर्ता शहीद स्मारक समिति के कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे।

अब देखने वाली बात होगी कि सपा नेताओं की इस मांग पर शहीद स्मारक समिति और प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाया जाता है। क्या शहीद शिलापट पर अंकित सभी नौ नामों के अनुरूप प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी और क्या इसके लिए उपलब्ध बजट का इस्तेमाल किया जाएगा—यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल धानापुर का शहादत दिवस शहीदों की श्रद्धांजलि के साथ-साथ सभी शहीदों को समान सम्मान देने की मांग के कारण भी चर्चा में है।