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आखिरकार देशव्यापी आंदोलन के आगे झुकी सरकार: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा

मायावती बोलीं—यह फैसला पहले ही हो जाना चाहिए था, FIR वापस लेने की भी उठी मांग

नई दिल्ली। देशभर में पेपर लीक, परीक्षा अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहे छात्र-युवा आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा कि यह फैसला छात्रों के भविष्य, राष्ट्रीय एकता और आंदोलन के और अधिक राजनीतिक व कानूनी विवादों में उलझने से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है। 
इस्तीफे के बाद आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सोनम वांगचुक, काकरोच जनता पार्टी (CJP) तथा समर्थन देने वाले विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने इसे आंदोलन की बड़ी सफलता बताया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आजाद समाज पार्टी, बसपा सहित कई दल पहले से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। 

इधर उत्तर प्रदेश में शनिवार को आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी ने प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्र-युवाओं के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग दोहराई। 

इस बीच बसपा प्रमुख मायावती ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केंद्र सरकार को यह निर्णय पहले ही ले लेना चाहिए था। उन्होंने मांग की कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, महिला प्रदर्शनकारियों से कथित बदसलूकी करने वालों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएं तथा आंदोलनकारी छात्रों और युवाओं के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएं। साथ ही उन्होंने आंदोलनकारियों से अपील की कि वे अपने संघर्ष का अनावश्यक राजनीतिकरण न होने दें और अपने भविष्य पर भी ध्यान दें।

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