चंदौली में स्वास्थ्य विभाग की अपील—किशोरियों का समय पर कराएं एचपीवी टीकाकरण, ग्राम की आशा से करें संपर्क
चंदौली। ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) संक्रमण महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। सर्वाइकल कैंसर यानी गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर एचपीवी संक्रमण से गहराई से जुड़ा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामलों में हाई-रिस्क एचपीवी संक्रमण की प्रमुख भूमिका होती है। ऐसे में समय पर टीकाकरण, नियमित जांच और जागरूकता इस बीमारी की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विश्व स्तर पर प्रत्येक वर्ष लगभग 6 लाख से अधिक महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के नए मामले सामने आते हैं और बड़ी संख्या में महिलाओं की इस बीमारी से मृत्यु होती है। इसका सबसे अधिक प्रभाव निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में देखने को मिलता है, जहां स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच अपेक्षाकृत सीमित है।
भारत में भी गंभीर स्थिति
भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में प्रमुख कैंसरों में शामिल है। देश में हर वर्ष बड़ी संख्या में इसके नए मामले सामने आते हैं और हजारों महिलाओं की जान चली जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, नियमित जांच का अभाव और टीकाकरण को लेकर जानकारी की कमी इस चुनौती को और गंभीर बना सकती है।
टीकाकरण से रोका जा सकता है सर्वाइकल कैंसर
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में एचपीवी वैक्सीन बेहद प्रभावी हथियार है। एचपीवी संक्रमण के संपर्क में आने से पहले टीकाकरण कराने पर इसका अधिक लाभ मिलता है। इसके साथ ही आगे चलकर नियमित सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग भी जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जनपद में पात्र किशोरियों के लिए एचपीवी टीकाकरण की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराए जाने की जानकारी दी गई है। इच्छुक अभिभावक अपनी ग्राम की आशा कार्यकर्ता से संपर्क कर टीकाकरण के संबंध में जानकारी एवं उपलब्धता सुनिश्चित कर सकते हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपनी बेटियों के स्वास्थ्य को लेकर जागरूक रहें और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार समय पर एचपीवी टीकाकरण कराएं। जागरूकता, टीकाकरण और नियमित स्वास्थ्य जांच के जरिए सर्वाइकल कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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