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स्वतंत्रता दिवस पर भदाहुं में गूंजा हरियाली का संदेश, जगधारी राम ने लगाए आम्रपाली के दो पौधे

35 से अधिक वृक्ष लगा चुके हैं जगधारी राम, बोले—पौधा लगाना ही नहीं, उसे वृक्ष बनने तक बचाना भी हमारी जिम्मेदारी

धानापुर, चंदौली। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जहां देशभर में राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति की भावना देखने को मिली, वहीं चंदौली जिले के धानापुर विकासखंड के भदाहुं गांव में पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश भी सामने आया। गांव निवासी जगधारी राम ने 15 अगस्त के अवसर पर आम्रपाली प्रजाति के दो फलदार पौधों का रोपण कर स्वतंत्रता दिवस को प्रकृति संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने की प्रेरणादायक पहल की। उन्होंने पौधारोपण करते हुए ग्रामीणों से अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ ही उनकी नियमित देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।

जगधारी राम का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस केवल तिरंगा फहराने, राष्ट्रगान गाने और देशभक्ति की भावना व्यक्त करने का पर्व नहीं है, बल्कि यह ऐसा अवसर भी है जब प्रत्येक नागरिक को अपने समाज, गांव और आने वाली पीढ़ियों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों पर विचार करना चाहिए। इसी भावना से प्रेरित होकर उन्होंने इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर दो फलदार पौधे लगाए।

उन्होंने बताया कि पौधारोपण उनके लिए किसी एक दिन या विशेष अभियान तक सीमित नहीं है। यह लंबे समय से उनके जीवन का हिस्सा रहा है। वह अब तक अपने जीवनकाल में 35 से अधिक वृक्ष लगा चुके हैं, जिनमें फलदार और छायादार दोनों प्रकार के पेड़ शामिल हैं। उनका प्रयास रहता है कि जहां भी उपयुक्त स्थान उपलब्ध हो, वहां पौधारोपण कर पर्यावरण को हरा-भरा बनाने में अपना योगदान दिया जाए।

जगधारी राम का मानना है कि पौधा लगाना जितना जरूरी है, उससे कहीं अधिक जरूरी उसकी देखभाल करना है। अक्सर पौधारोपण अभियानों के दौरान बड़ी संख्या में पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन उचित संरक्षण और देखभाल के अभाव में उनमें से कई पौधे जीवित नहीं रह पाते। ऐसे में पौधे लगाने के साथ उन्हें नियमित पानी देने, पशुओं से बचाने और समय-समय पर उनकी निगरानी करने की जिम्मेदारी भी उठानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ता प्रदूषण, घटता हरित क्षेत्र और मौसम में लगातार हो रहे बदलाव पर्यावरण के प्रति गंभीर चिंता का विषय हैं। ऐसे समय में वृक्ष मानव जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। पेड़ वातावरण को स्वच्छ रखने के साथ गर्मी से राहत देते हैं, मिट्टी के संरक्षण में सहायक होते हैं और वर्षा चक्र को संतुलित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा पेड़-पौधे पक्षियों और अनेक जीव-जंतुओं के लिए आश्रय एवं भोजन का स्रोत भी हैं।

उन्होंने ग्रामीणों और विशेषकर युवाओं से अपील की कि वे अपने जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों को पौधारोपण से जोड़ें। जन्मदिन, शादी की वर्षगांठ, राष्ट्रीय पर्व अथवा किसी अन्य विशेष अवसर पर पौधा लगाने की परंपरा शुरू की जा सकती है। यदि प्रत्येक परिवार साल में कुछ पौधे लगाए और उन्हें सुरक्षित रखते हुए वृक्ष बनने तक उनकी देखभाल करे, तो कुछ ही वर्षों में गांवों की तस्वीर बदल सकती है।

जगधारी राम ने कहा कि राष्ट्रप्रेम केवल नारों और आयोजनों तक सीमित नहीं होना चाहिए। देश, समाज और पर्यावरण की बेहतरी के लिए किया गया प्रत्येक सकारात्मक कार्य राष्ट्र निर्माण का हिस्सा है। जिस तरह स्वतंत्रता सेनानियों ने देश के भविष्य के लिए अपना योगदान दिया, उसी तरह वर्तमान पीढ़ी की भी जिम्मेदारी है कि वह आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और हरा-भरा वातावरण तैयार करे।

उन्होंने कहा कि आज लगाया गया एक छोटा-सा पौधा आने वाले वर्षों में विशाल वृक्ष का रूप ले सकता है। वह किसी राहगीर को छाया दे सकता है, पक्षियों को आश्रय प्रदान कर सकता है और फल के रूप में किसी परिवार के काम आ सकता है। इस दृष्टि से पौधारोपण को वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक तरह का निवेश मानते हैं।

भदाहुं गांव में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर किए गए इस पौधारोपण की स्थानीय स्तर पर चर्चा भी रही। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी स्तर पर चलाए जाने वाले पौधारोपण अभियानों के साथ यदि आम नागरिक भी व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेते हुए पौधे लगाएं और उनकी देखभाल करें, तो पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को काफी मजबूती मिल सकती है।

ग्रामीणों के बीच यह संदेश भी पहुंचा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक व्यक्ति, संस्था या विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। यह सामूहिक प्रयास से ही प्रभावी हो सकता है। प्रत्येक परिवार यदि अपने आसपास कम से कम एक-दो पौधों की जिम्मेदारी ले, तो आने वाले वर्षों में गांवों में हरियाली का दायरा तेजी से बढ़ाया जा सकता है।

स्वतंत्रता दिवस पर आम्रपाली के दो फलदार पौधे लगाते हुए जगधारी राम ने यह संदेश दिया कि देश की स्वतंत्रता के साथ प्रकृति की स्वतंत्रता और सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। स्वच्छ हवा, पर्याप्त हरियाली और सुरक्षित पर्यावरण आने वाली पीढ़ियों का अधिकार है और उसे सुरक्षित रखना वर्तमान पीढ़ी का दायित्व।



जगधारी राम ने संकल्प व्यक्त किया कि वह आगे भी अपने स्तर से पौधारोपण का कार्य जारी रखेंगे। उनका लक्ष्य अधिक से अधिक पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि उन्हें वृक्ष के रूप में विकसित होते देखना भी है। उनका कहना है कि यदि उनके लगाए पेड़ों की छाया और फल का लाभ आने वाले वर्षों में किसी व्यक्ति को मिलता है, तो यही उनके प्रयास की सबसे बड़ी सफलता होगी।

स्वतंत्रता दिवस पर भदाहुं गांव में जगधारी राम की यह पहल भले ही व्यक्तिगत स्तर पर उठाया गया छोटा कदम हो, लेकिन इसका संदेश व्यापक है। 35 से अधिक वृक्ष लगाने वाले जगधारी राम ने अपने प्रयासों से यह साबित करने की कोशिश की है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े संसाधनों से अधिक जरूरी इच्छाशक्ति, संवेदनशीलता और निरंतरता है। उनका यह प्रयास निश्चित रूप से ग्रामीणों और युवाओं को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने तथा पौधारोपण को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित कर सकता है।