राहत-बचाव कार्यों की सराहना कर जवानों को सेवा, अनुशासन और समर्पण के साथ कार्य करने के लिए किया प्रेरित
रिपोर्ट ! संदीप कुमार बड़ा बाबू
वाराणसी, 5 सितंबर। शिक्षक दिवस के अवसर पर पद्म श्री से सम्मानित प्रो. मंगला कपूर शनिवार को 11वीं एनडीआरएफ, वाराणसी पहुंचीं। उन्होंने एनडीआरएफ के अधिकारियों एवं बचावकर्मियों से संवाद कर उनके राहत एवं बचाव कार्यों की सराहना की। इस दौरान उन्होंने जवानों का उत्साह बढ़ाते हुए उन्हें सेवा, अनुशासन और समर्पण की भावना के साथ राष्ट्र एवं मानवता की सेवा करते रहने के लिए प्रेरित किया।
11वीं एनडीआरएफ के कमांडिंग ऑफिसर अनूप सिंह बिष्ट ने प्रो. मंगला कपूर का स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों और बचावकर्मियों के साथ संवाद किया। बातचीत के दौरान प्रो. मंगला कपूर ने आपदा के समय एनडीआरएफ के जवानों द्वारा किए जाने वाले राहत एवं बचाव कार्यों को बेहद चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि आपदा की विषम परिस्थितियों में अपनी जान की परवाह किए बिना जरूरतमंद लोगों की सहायता करना आसान कार्य नहीं है। बाढ़, भूकंप, भवन हादसे या अन्य आपदाओं के दौरान जब लोग भय और संकट में होते हैं, तब एनडीआरएफ के बचावकर्मी पूरी जिम्मेदारी और साहस के साथ राहत कार्य में जुट जाते हैं। उनका समर्पण समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
प्रो. मंगला कपूर ने कहा कि एनडीआरएफ के जवानों की पहचान केवल उनके साहस से नहीं, बल्कि अनुशासन, संवेदनशीलता और मानवीय सेवा की भावना से भी होती है। संकट की घड़ी में किसी अनजान व्यक्ति की जान बचाने के लिए जोखिम उठाना मानवता की सबसे बड़ी सेवा में शामिल है।
उन्होंने जवानों को निरंतर सीखते रहने और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप अपने कौशल को विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच, अनुशासन और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति किसी भी चुनौती का सामना करने की क्षमता को मजबूत करती है। उन्होंने बचावकर्मियों से राष्ट्रहित और मानवता की सेवा के संकल्प को सदैव सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
शिक्षक दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रो. मंगला कपूर ने कहा कि यह दिन केवल शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने तक सीमित नहीं है। शिक्षक दिवस ज्ञान, अनुशासन, संस्कार, सेवा और मानवीय मूल्यों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को याद करने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि सीखने की प्रक्रिया जीवनभर चलती रहती है और हर व्यक्ति अपने अनुभवों से कुछ न कुछ सीख सकता है।
इस दौरान उन्होंने अपने जीवन के अनुभव और विचार भी बचावकर्मियों के साथ साझा किए। जवानों ने उनके अनुभवों को ध्यानपूर्वक सुना और उनसे प्रेरणा ली। संवाद के दौरान एनडीआरएफ के कार्यों, आपदा के समय आने वाली चुनौतियों और मानवीय सेवा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा हुई।
11वीं एनडीआरएफ के कमांडिंग ऑफिसर अनूप सिंह बिष्ट ने प्रो. मंगला कपूर के आगमन और उनके प्रेरणादायी विचार साझा करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पद्म श्री से सम्मानित प्रतिष्ठित शिक्षाविद् एवं विदुषी का एनडीआरएफ के अधिकारियों और बचावकर्मियों के साथ संवाद जवानों के लिए उत्साहवर्धक है।
उन्होंने कहा कि बचाव अभियान के दौरान शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक मजबूती, धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण भी बेहद जरूरी होता है। ऐसे प्रेरणादायी संवाद जवानों को अपने दायित्वों के प्रति और अधिक समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देते हैं।
कार्यक्रम में 11वीं एनडीआरएफ के अधिकारियों एवं बचावकर्मियों ने प्रो. मंगला कपूर से संवाद किया। उन्होंने जवानों के कार्यों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
शिक्षक दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम एनडीआरएफ के बचावकर्मियों के लिए प्रेरणादायी रहा। प्रो. मंगला कपूर के विचारों से जवानों में सेवा, समर्पण और उत्कृष्टता की भावना को और बल मिला। कार्यक्रम ने आपदा के समय राष्ट्र और मानवता की सेवा के प्रति एनडीआरएफ के संकल्प को और मजबूत करने का संदेश दिया।