शोषितों, वंचितों और पिछड़ों की हिस्सेदारी के लिए जगदेव बाबू का संघर्ष आज भी प्रासंगिक : अर्जुन प्रसाद आर्य
चंदौली। अपनी जनता पार्टी की ओर से शनिवार को भारत लेनिन एवं शहीद बाबू जगदेव प्रसाद का शहादत दिवस श्रद्धा और संकल्प के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन मालती कटरा, कमलापति त्रिपाठी अस्पताल के सामने, जनपद चंदौली में किया गया। इस दौरान पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बाबू जगदेव प्रसाद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम में सामाजिक न्याय, समानता, राजनीतिक भागीदारी और शोषित-वंचित समाज के अधिकारों को लेकर बाबू जगदेव प्रसाद के संघर्ष को याद किया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने उनके विचारों से जुड़े नारों के माध्यम से सामाजिक बराबरी और राजनीतिक हिस्सेदारी की आवाज बुलंद की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अपनी जनता पार्टी के प्रदेश सचिव अर्जुन प्रसाद आर्य रहे। उन्होंने कहा कि बाबू जगदेव प्रसाद ने अपना पूरा जीवन शोषित, पिछड़े, दलित और वंचित समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए समर्पित कर दिया। उनका संघर्ष केवल सत्ता हासिल करने के लिए नहीं था, बल्कि समाज में बराबरी, सम्मान और हिस्सेदारी स्थापित करने के लिए था।
उन्होंने आगे कहा कि जगदेव बाबू का संघर्ष आज भी प्रासंगिक है। समाज के जिस वर्ग को लंबे समय तक राजनीतिक और सामाजिक रूप से पीछे रखा गया, उसे लोकतांत्रिक व्यवस्था में उचित भागीदारी दिलाने की जरूरत आज भी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि जगदेव बाबू ने लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया और सत्ता में भागीदारी को सामाजिक न्याय का महत्वपूर्ण आधार बनाया।
उन्होंने कहा कि जगदेव बाबू की राजनीति का मूल संदेश था कि लोकतंत्र में केवल वोट देने का अधिकार ही पर्याप्त नहीं है। जिस समाज की लोकतंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका है, उसे शासन और निर्णय प्रक्रिया में भी उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से जगदेव बाबू के विचारों को गांव-गांव और जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।
इस दौरान ‘वोट हमारा, राज तुम्हारा नहीं चलेगा’ और ‘धन, धरती और राजपाट में नब्बे भाग हमारा है’ जैसे नारों के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक हिस्सेदारी का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में मुख्य भूमिका में मौजूद इंदु मेहता, प्रदेश अध्यक्ष एवं वाराणसी मंडल प्रभारी, ने कहा कि बाबू जगदेव प्रसाद का जीवन संघर्ष, त्याग और सामाजिक परिवर्तन की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि जगदेव बाबू ने समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का साहस दिया।
इंदु मेहता ने कहा कि सामाजिक न्याय की लड़ाई में महिलाओं की भागीदारी भी आवश्यक है। महिलाओं, पिछड़ों, दलितों, किसानों, मजदूरों और अन्य वंचित वर्गों को सम्मान और समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जगदेव बाबू की शहादत को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब उनके विचारों को केवल कार्यक्रमों तक सीमित न रखकर सामाजिक जीवन में आगे बढ़ाया जाए।
उन्होंने नई पीढ़ी से बाबू जगदेव प्रसाद के जीवन और संघर्ष को पढ़ने तथा उनके विचारों को समझने का आह्वान किया। कहा कि सामाजिक परिवर्तन लंबी प्रक्रिया है और इसके लिए निरंतर संघर्ष तथा जनजागरण की जरूरत होती है।
युवा प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रशेखर मौर्य ने कहा कि जगदेव बाबू की शहादत सामाजिक न्याय के आंदोलन की महत्वपूर्ण विरासत है। उन्होंने कहा कि युवाओं को उनके संघर्ष से प्रेरणा लेकर समाज में समानता और भाईचारे की भावना को मजबूत करना चाहिए।
जिला प्रभारी रामललित सिंह ने कहा कि जगदेव बाबू ने शोषित और वंचित समाज की आवाज को राजनीतिक मंच प्रदान किया। उनके विचार आज भी सामाजिक बराबरी की लड़ाई लड़ने वाले लोगों को प्रेरणा देते हैं।
जिला महासचिव धनंजय मौर्य ने कहा कि जगदेव प्रसाद ने सामाजिक असमानता और शोषण के खिलाफ संघर्ष किया। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है।
सैयदराजा विधानसभा अध्यक्ष कन्हैयालाल मौर्या और चकिया विधानसभा अध्यक्ष धनंजय कुमार ने भी जगदेव बाबू के जीवन और संघर्ष को याद करते हुए कहा कि सामाजिक न्याय और राजनीतिक भागीदारी के सवाल को मजबूत करने के लिए कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर काम करना होगा।
पूर्व प्रधान आदित्य नारायण मौर्य ने कहा कि जगदेव बाबू का संघर्ष केवल एक दौर तक सीमित नहीं है। उनके विचार आज भी सामाजिक और राजनीतिक चेतना को दिशा देने का काम करते हैं।
जिलाध्यक्ष सुजीत कुमार मौर्य ने कहा कि बाबू जगदेव प्रसाद ने शोषित और वंचित समाज को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जगदेव बाबू का सपना ऐसे समाज का था, जहां किसी व्यक्ति के साथ जाति, वर्ग या सामाजिक स्थिति के आधार पर भेदभाव न हो और प्रत्येक नागरिक को सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार मिले।
सुजीत कुमार मौर्य ने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि नई पीढ़ी जगदेव बाबू के संघर्ष और विचारों को समझे। केवल उनकी जयंती या शहादत दिवस मनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके बताए सामाजिक न्याय, समानता और राजनीतिक भागीदारी के रास्ते पर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से संगठन को गांव और बूथ स्तर तक मजबूत करने तथा समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज को मजबूती से उठाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि जगदेव बाबू ने जिस सामाजिक परिवर्तन का सपना देखा था, उसे पूरा करने के लिए संघर्ष और संगठन दोनों जरूरी हैं। जब तक समाज के वंचित वर्गों को उनके अधिकार और उचित हिस्सेदारी नहीं मिलती, तब तक सामाजिक न्याय की लड़ाई पूरी नहीं होगी।
इस अवसर पर शिवा धार सिंह, उदय नाथ कुशवाहा, रमेश मौर्य, नागेंद्र प्रताप सिंह, जसवंत कुमार मौर्य, शत्रुघ्न मौर्य और हृदय जी सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष लालमनि चौहान ने भी जगदेव प्रसाद को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि सामाजिक परिवर्तन में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करना जरूरी है। महिलाओं को शिक्षा, सम्मान, रोजगार और निर्णय प्रक्रिया में बराबर का अवसर मिलना चाहिए।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बाबू जगदेव प्रसाद ने सामाजिक और राजनीतिक असमानता के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपना जीवन न्योछावर कर दिया। 5 सितंबर 1974 को बिहार के कुर्था में आंदोलन के दौरान पुलिस की गोली लगने से उनकी शहादत हुई थी। उनकी शहादत के बाद भी उनके विचार सामाजिक न्याय के आंदोलनों में लगातार प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।
वक्ताओं ने कहा कि जगदेव बाबू की विरासत को किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उनके संघर्ष का केंद्रीय मुद्दा शोषित, पिछड़े, दलित और वंचित समाज को सम्मान, अधिकार तथा सत्ता में उचित भागीदारी दिलाना था।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने शहीद जगदेव प्रसाद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। साथ ही सामाजिक समानता, लोकतांत्रिक अधिकारों और वंचित समाज की राजनीतिक भागीदारी के लिए उनके विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर जगदेव बाबू के विचारों और सामाजिक न्याय से जुड़े नारों की गूंज सुनाई देती रही। कार्यकर्ताओं ने कहा कि शहीद जगदेव प्रसाद का संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को सामाजिक बराबरी और अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने की प्रेरणा देता रहेगा।