धानापुर/चंदौली। धानापुर विकासखंड क्षेत्र के शहीदगांव रमौली तिराहे पर करीब पांच लाख रुपये की लागत से लगाई गई हाईमास्ट लाइट पिछले कई महीनों से खराब पड़ी है। महत्वपूर्ण तिराहे और बाजार क्षेत्र में प्रकाश की व्यवस्था करने के उद्देश्य से लगाई गई यह हाईमास्ट लाइट लंबे समय से बंद होने के कारण अब महज शोपीस बनकर रह गई है। शाम होते ही पूरा तिराहा अंधेरे में डूब जाता है, जिससे स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार शहीदगांव रमौली तिराहा आसपास के कई गांवों के लोगों की आवाजाही का प्रमुख स्थान है। यहां दिनभर लोगों की चहल-पहल रहती है और बाजार में बड़ी संख्या में दुकानें भी संचालित होती हैं। शाम के बाद भी लोगों का आवागमन जारी रहता है। ऐसे में हाईमास्ट लाइट के महीनों से खराब रहने के कारण रात के समय तिराहे और आसपास के बाजार में अंधेरा छा जाता है।
बताया जाता है कि पूर्व सांसद एवं भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय की ओर से करीब पांच लाख रुपये की लागत से तिराहे पर हाईमास्ट लाइट लगवाई गई थी। लाइट लगने के बाद बाजार क्षेत्र में रात के समय रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था हो गई थी और दुकानदारों तथा राहगीरों को काफी सुविधा मिली थी। लेकिन तकनीकी खराबी आने के बाद यह लाइट बंद हो गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई महीने बीत जाने के बावजूद इसकी मरम्मत नहीं कराई गई है।
अंधेरे का फायदा उठा चुके हैं चोर
बाजार के दुकानदारों का कहना है कि रात के समय तिराहे पर अंधेरा रहने का फायदा असामाजिक तत्व उठा सकते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक पूर्व में अंधेरे का लाभ उठाकर चोर बाजार की कई दुकानों को अपना निशाना बना चुके हैं। दुकानों में चोरी की घटनाओं के बाद भी प्रकाश व्यवस्था को लेकर जिम्मेदार विभाग की ओर से गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
दुकानदारों का कहना है कि बाजार में पर्याप्त रोशनी होने से न केवल लोगों को आने-जाने में सुविधा होती है, बल्कि दुकानों की सुरक्षा में भी मदद मिलती है। हाईमास्ट लाइट बंद होने से रात के समय दुकानदारों को अपनी दुकानों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त चिंता रहती है।
लाखों रुपये खर्च के बाद भी नहीं मिल रहा लाभ
स्थानीय बाजारवासियों का कहना है कि जिस हाईमास्ट लाइट पर लाखों रुपये खर्च किए गए हैं, उसका लंबे समय तक खराब पड़े रहना चिंता का विषय है। लोगों का सवाल है कि यदि सार्वजनिक धन से लगाई गई लाइट महीनों तक खराब पड़ी रहेगी तो इसका लाभ आम जनता को कैसे मिलेगा।
दुकानदारों के अनुसार हाईमास्ट लाइट को लगवाने का उद्देश्य तिराहे और बाजार क्षेत्र में रात के समय पर्याप्त प्रकाश उपलब्ध कराना था। लेकिन वर्तमान में स्थिति यह है कि लाइट खराब होने के कारण जिस स्थान को रोशन होना चाहिए, वहां अंधेरा पसरा रहता है।
जिम्मेदारों की निगाह कब पड़ेगी?
स्थानीय दुकानदारों और ग्रामीणों ने संबंधित विभाग तथा प्रशासन से जल्द से जल्द हाईमास्ट लाइट को ठीक कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि समस्या की जानकारी होने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। यदि समय रहते लाइट की मरम्मत करा दी जाए तो बाजार क्षेत्र में प्रकाश व्यवस्था बेहतर होने के साथ-साथ चोरी और अन्य आपराधिक घटनाओं की आशंका भी कम हो सकती है।
बाजारवासियों का कहना है कि हाईमास्ट लाइट के खराब होने से रात में तिराहा पूरी तरह अंधेरे में रहता है। ऐसे में प्रशासन को मामले को केवल प्रकाश व्यवस्था की समस्या के रूप में नहीं, बल्कि सुरक्षा से जुड़े विषय के रूप में भी देखना चाहिए।
दुकानदारों ने की शीघ्र मरम्मत की मांग
स्थानीय दुकानदारों और ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित विभाग के कर्मचारियों को मौके पर भेजकर हाईमास्ट लाइट की तकनीकी जांच कराई जाए। यदि लाइट में किसी उपकरण की खराबी है तो उसे बदलकर जल्द चालू कराया जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी समस्या होने पर तत्काल मरम्मत की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
बाजारवासियों का कहना है कि रात में पर्याप्त रोशनी रहने से राहगीरों, महिलाओं, बुजुर्गों और दुकानदारों को काफी सुविधा मिलेगी। इसके अलावा बाजार की सुरक्षा व्यवस्था भी बेहतर होगी। लोगों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि जब तक हाईमास्ट लाइट ठीक नहीं होती, तब तक वैकल्पिक प्रकाश व्यवस्था कराई जाए।
फिलहाल शहीदगांव रमौली तिराहे पर महीनों से बंद पड़ी पांच लाख रुपये की हाईमास्ट लाइट स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। अंधेरे के कारण जहां दुकानदार अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, वहीं पूर्व में हुई चोरी की घटनाओं को देखते हुए लोगों में भय भी बना हुआ है। बाजारवासियों ने जिम्मेदार अधिकारियों से मामले में शीघ्र संज्ञान लेकर हाईमास्ट लाइट को जल्द चालू कराने की मांग की है।