मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय स्थित सर छोटूराम इंजीनियरिंग कॉलेज में बीटेक प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को हॉस्टल नहीं मिलने का मामला गरमा गया है। हॉस्टल की मांग को लेकर विद्यार्थियों और उनके परिजनों को धरना-प्रदर्शन करना पड़ा। घंटों चले प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा के बेहोश होने की सूचना से मामला और गंभीर हो गया। छात्रा को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। घटना पर भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने चिंता जताते हुए विद्यार्थियों की मांग का समर्थन किया है।
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि छात्रों को सुरक्षित और किफायती हॉस्टल उपलब्ध कराना सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है। हॉस्टल कोई विलासिता नहीं, बल्कि विशेष रूप से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए शिक्षा पूरी करने की बुनियादी जरूरत है। उन्होंने छात्रा के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए कहा कि किसी विद्यार्थी को अपनी मूलभूत आवश्यकता के लिए धरने पर बैठने और संघर्ष करने की स्थिति नहीं आनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में विद्यार्थी दूर-दराज के क्षेत्रों से उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेते हैं। ऐसे विद्यार्थियों के सामने पढ़ाई के साथ सुरक्षित आवास की चुनौती रहती है। यदि विश्वविद्यालय में पर्याप्त हॉस्टल उपलब्ध नहीं है तो छात्रों को मजबूरी में निजी कमरों और मकानों में रहना पड़ता है, जहां उन्हें अधिक किराया देने के साथ सुरक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं से भी समझौता करना पड़ सकता है।
आजाद ने कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए बड़ी मुश्किल से फीस, किताबों और अन्य खर्चों की व्यवस्था करते हैं। ऐसे में महंगा किराया उनके ऊपर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में हॉस्टल की क्षमता बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि किसी भी छात्र को केवल आवास की कमी के कारण परेशानी न उठानी पड़े।
उन्होंने दिल्ली के मोती बाग स्थित सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित आवास की जरूरत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। छात्रों को ऐसे मकानों में रहने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए, जहां उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हों। विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों के आवास की समस्या का स्थायी समाधान तलाशना चाहिए।
चंद्रशेखर आजाद ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि सभी पात्र विद्यार्थियों को तत्काल हॉस्टल उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही हॉस्टल आवंटन की प्रक्रिया पारदर्शी रखी जाए और छात्र संख्या के अनुपात में नए हॉस्टल का निर्माण कराया जाए। उन्होंने हॉस्टल में सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाओं को भी सुनिश्चित करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने अधिकारों के लिए धरने पर बैठने की नौबत नहीं आनी चाहिए। विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों की समस्याओं को समय रहते सुनना और उनका समाधान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों की समस्याओं पर समय रहते ध्यान दिया जाए तो टकराव और प्रदर्शन जैसी परिस्थितियों से बचा जा सकता है।
आजाद ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं को शिक्षा, रोजगार और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं की बुनियादी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि सरकारों को राजनीतिक मुद्दों के साथ-साथ विद्यार्थियों और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों पर भी गंभीरता से काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था तभी मजबूत होगी, जब विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। केवल कॉलेज और विश्वविद्यालय में दाखिला देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दूर से आने वाले छात्रों के लिए सुरक्षित और किफायती आवास की व्यवस्था भी शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने विद्यार्थियों की हॉस्टल संबंधी मांग का समर्थन करते हुए कहा कि संगठन छात्रों के अधिकारों की आवाज उठाता रहेगा। संगठन की ओर से विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की गई कि विद्यार्थियों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं का समाधान निकाला जाए।
फिलहाल हॉस्टल को लेकर छात्रों का विरोध और प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदम पर सभी की नजर है। विद्यार्थियों की मांग है कि उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया जाए, जबकि संगठन ने भी इस मांग को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।