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तीन साल से मानदेय नहीं मिलने पर NRLM कैडर का तहसील पर हल्लाबोल, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

समूह सखी, बुककीपर और बैंक सखी समेत आजीविका से जुड़ी महिलाओं ने जताया आक्रोश, मांगें पूरी न होने पर काम बंद कर धरना-प्रदर्शन की चेतावनी

सकलडीहा, चंदौली। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़े समूह सखी, बुककीपर, बैंक सखी समेत विभिन्न कैडर समूहों की महिलाओं ने तीन वर्षों से मानदेय नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को सकलडीहा तहसील परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में एकजुट हुई महिलाओं ने लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान कराने, मानदेय में वृद्धि करने और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को लेकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के बाद महिलाओं के प्रतिनिधिमंडल ने उपजिलाधिकारी आकांक्षा सिंह को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं के समाधान की मांग की।

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गांव-गांव स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनसे लगातार कार्य लिया जा रहा है। समूह सखी, बैंक सखी, बुककीपर और आजीविका मिशन से जुड़े अन्य कैडर गांव स्तर पर स्वयं सहायता समूहों के संचालन से लेकर बैंकिंग, अभिलेखों के रखरखाव, योजनाओं की जानकारी पहुंचाने और आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने जैसे कार्यों में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

महिलाओं का कहना था कि जिम्मेदारियां लगातार निभाने के बावजूद पिछले करीब तीन वर्षों से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। लंबे समय से भुगतान लंबित होने के कारण उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना था कि अधिकांश कैडर ग्रामीण परिवारों से जुड़ी महिलाएं हैं और अपने काम के बदले मिलने वाले मानदेय से परिवार की जरूरतों में सहयोग करती हैं। ऐसे में लगातार तीन वर्षों तक भुगतान नहीं होना उनके लिए गंभीर आर्थिक परेशानी का कारण बन गया है।



प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने कहा कि वे केवल मानदेय के भुगतान की मांग नहीं कर रही हैं, बल्कि काम के अनुरूप मानदेय बढ़ाने की मांग भी कर रही हैं। उनका कहना था कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, जबकि आजीविका मिशन से जुड़े कैडर की जिम्मेदारियां भी कम नहीं हुई हैं। ऐसे में वर्तमान मानदेय में आवश्यक वृद्धि की जानी चाहिए, ताकि काम करने वाली महिलाओं को उनके श्रम के अनुरूप आर्थिक सहयोग मिल सके।

महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि अपनी समस्याओं को लेकर वे कई बार संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख चुकी हैं, लेकिन उनकी समस्या का अपेक्षित समाधान नहीं हो सका। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, जब वे मानदेय भुगतान को लेकर अधिकारियों से सवाल करती हैं तो कथित तौर पर उन्हें यह कहकर टाल दिया जाता है कि "कोई और काम ढूंढ लो।" महिलाओं का कहना था कि यदि उनसे लगातार सरकारी मिशन से जुड़े कार्य लिए जा रहे हैं तो उनके पारिश्रमिक और मानदेय को लेकर भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।



प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान को गांवों तक पहुंचाने में कैडर की भूमिका महत्वपूर्ण है। समूहों की बैठकें कराने, महिलाओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने, बैंकिंग संबंधी कार्यों में सहयोग करने, समूह के अभिलेखों को व्यवस्थित रखने और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में कैडर लगातार सक्रिय रहते हैं।

महिलाओं का कहना था कि जब उन्हें जिम्मेदारी देकर काम कराया जा रहा है तो मानदेय का समय से भुगतान भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। तीन वर्षों से मानदेय लंबित होने के कारण अब उनके सामने आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। इसी मांग को लेकर मंगलवार को तहसील परिसर में प्रदर्शन किया गया।

इस दौरान प्रदर्शनकारी महिलाओं ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की कि उनके लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान कराया जाए। इसके साथ ही वर्तमान महंगाई और कार्य के बढ़ते दायरे को देखते हुए मानदेय में वृद्धि की जाए तथा आजीविका से जुड़े कैडर को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

महिलाओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो वे अपने कार्य से विरत होने के लिए मजबूर होंगी। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि तीन वर्षों से लंबित मानदेय का भुगतान नहीं हुआ और उनकी अन्य मांगों पर भी ध्यान नहीं दिया गया तो वे काम बंद कर तहसील स्तर पर धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगी। उन्होंने कहा कि आंदोलन की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।

महिलाओं का कहना था कि उनका उद्देश्य किसी अधिकारी या प्रशासन से टकराव करना नहीं है। वे केवल अपने श्रम का भुगतान और सम्मानजनक सुविधाएं चाहती हैं। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए उनकी मांगों को संबंधित विभाग और उच्चाधिकारियों तक पहुंचाया जाए, ताकि लंबे समय से लंबित मानदेय के भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो सके।

प्रदर्शन के बाद महिलाओं का प्रतिनिधिमंडल उपजिलाधिकारी आकांक्षा सिंह से मिला और उन्हें अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से तीन वर्षों से लंबित मानदेय का भुगतान कराने, मानदेय में वृद्धि करने तथा NRLM कैडर को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई।

महिलाओं ने कहा कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द किया जाता है तो वे पहले की तरह पूरी जिम्मेदारी और निष्ठा के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में काम करती रहेंगी। उनका कहना था कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए वे लगातार मेहनत कर रही हैं, लेकिन स्वयं उनका मानदेय वर्षों से लंबित है। इससे उनमें असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है।

प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने प्रशासन से स्पष्ट कहा कि अब उन्हें आश्वासन से अधिक ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है। उनका कहना था कि लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान के लिए भुगतान की स्पष्ट व्यवस्था और समयसीमा तय होनी चाहिए। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को तहसील से आगे बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा।

इस मौके पर सविता देवी, किरण देवी, ममता देवी, रेखा देवी, रीना देवी, गीता मौर्य, राजेश्वरी चतुर्वेदी, सरोज कुमारी, सुभावती देवी, शकुंतला देवी, रीता देवी, बिंदु कुमारी, अनीता यादव, कस्तूरी सिंह, चंद्रकला देवी, गुड़िया, किरण, सरिता देवी, अनीता, रीमा देवी, उषा देवी, शाहजहां, शिवकुमारी, आरती, चमेली समेत बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।

एसडीएम को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब प्रदर्शनकारी महिलाओं की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है। महिलाओं को उम्मीद है कि उनकी मांगों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग से समन्वय कर तीन वर्षों से लंबित मानदेय के भुगतान की दिशा में जल्द ठोस कदम उठाया जाएगा। वहीं, कार्रवाई में देरी होने की स्थिति में महिलाओं ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।