रिपोर्ट! संदीप कुमार मुगलसराय
डीडीयू नगर (चन्दौली) नगर के जीटी रोड के किनारे हर सोमवार को लगने वाले सोमवारी बाजार के कारण जाम की समस्या से जूझता रहता है।इसके अलावा क्षेत्र के छोटे बड़े व्यवसायी का व्यवसाय चौपट हो जाने का रोना रो रहे हैं ।साथ ही नगर व आसपास के बेरोजगार युवकों को भी काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पिछले कई सालों से नगर के जीटी रोड के किनारे सोमवार को एक दिवसीय बाजार लग रहा है।इस बाजार में वाराणसी सहित आसपास के क्षेत्रों ने लोग सस्ते सामानों की बिक्री करते हैं। इस बाजार में ग्रामीण क्षेत्रों के लोग खरीददारी करते हैं। इसका असर स्थानीय व्यापारियों को उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा सड़क पर जाम की स्थिति बनी रहती है।
कुछ दुकानदारों को इसका फायदा जरूर हो रहा है। सूत्र बताते हैं कि अपने दुकान के सामने दुकान लगवाने के एवज में 500 से 1500 रुपये एक-एक दुकानों से वसूला जाता है। हालांकि इस बाजार में उच्च कोटि के सामान तो नहीं मिलते लेकिन सस्ते सामानों की वजह से अत्यधिक भीड़ के बीच उच्चके भी सक्रिय रहते हैं।जिसमें हमेशा चेन स्नैचिंग व पाकेटमारी सहित पर्स से पैसे चोरी हो जाने की घटनाएं आम बात है। भीड़ की वजह से पुलिसकर्मियों को भी अतिरिक्त ड्यूटी करनी पड़ रही है ।
नगर के कुछ प्रतिष्ठित दुकानदारों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि सोमवारी बाजार में जहां सस्ते और ज्यादा टिकाऊं सामान नहीं होते हैं।वहीं अधिकांश विक्रेता डीडीयू नगर से बाहर के होते हैं। सस्ते और कम टिकाऊं सामानों की खरीददारी ग्राहक कर लेते हैं। जिसके वजह से उन लोगों की बिक्री काफी घट गई है। वहीं बाहरी दुकानदारों द्वारा बाजार लगाये जाने से नगर के बेरोजगार युवकों को भी व्यवसाय करने में परेशानी हो रही है। अत्यधिक भीड़ के वजह से जाम होता है जिसमें उच्चक्के भी अपना हाथ साफ करते रहते हैं। बताते चलें कि इसकी शुरुआत यहां के कुछ दुकानदारों ने ही की है।
जिन दुकानदारों के कपड़े काफी दिन से नहीं बिक रहे थे या कटपीस बचे थे या कोई डिफेक्टिव थे उन्हें अपने ही कुछ आदमियों के माध्यम से सोमवार को पटरी ओर दुकान लगवाकर औने-पौने भाव में विक्रय करवाना शुरू कर दिया। जो आज सोमवारी बाजार के नाम से प्रचलित हो गया और अब काफी बड़ा रूप ले चुका है। जबकि पूरा शहर आज भी मात्र 1 किलोमीटर के अंदर ही सिमटा हुआ है। जिसमें जाम की समस्या बनी रह रही है।ऐसे में सोमवारी बाजार को बंद कराये जाने की मांग स्थानीय लोगों व दुकानदारों ने जिला प्रशासन से की है।
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