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पुत्र-प्राप्ति के लिए जामडीह तालाब में स्नान कर शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं लोग

जामेश्वर महादेव के मंदिर में दीपावली की सुबह महिलाओं की लगती है भीड़

चन्दौली जनपद के सकलडीहा तहसील मे जामडीह गांव में स्थित है जामेश्वर महादेव मंदिर

रिपोर्ट ! संजय कुमार दिनकर

चंदौली,
 सकलडीहा ! तहसील क्षेत्र के जामडीह गांव में स्थित जामेश्वर महादेव के मंदिर में दीपावली की सुबह महिलाओं की भीड़ बढ़ती है। भैया दूज के अवसर पर होने वाले इस पौराणिक आयोजन पर भारी संख्या में दूर दराज से महिलाएं आती हैं। इस पर्व पर खास तौर पर यहां महिलाएं पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए मन्नत मांगने आती हैं।

 चंदौली जिले के सकलडीहा रेलवे स्टेशन से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित जामेश्वर महादेव जी का यह मंदिर लगभग 177 साल पुराना है। यहां पर महिलाएं पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए मन्नतें मांगने के लिए आती हैं और जिनकी मन्नत पूरी होती है वह दीपावली के सुबह स्नान करने और अपने बच्चों का मुंडन कराने का कार्य करतीं है l

कहा जाता है कि यहां पर केवल चंदौली जिले से ही नहीं बल्कि आसपास के कई जनपदों, प्रदेशों के लोग भी पूजन अर्चन के साथ अपने पति व बच्चे के साथ दर्शन व पूजन के लिए आते हैं। यहां के बारे में खास मान्यता है कि जो कपड़ा पहन कर लोग स्नान करते हैं उसे यहीं छोड़कर चले जाते हैं।

 बताया जाता है कि 177 साल पहले गाजीपुर जिले के सराय पोस्ता स्ट्रीमर घाट के सुखलाल अग्रहरी चंदौली जिले में अपने एक रिश्तेदार के घर से लौट रहे थे। वह जामडीह गांव में स्थित एक पीपल के पेड़ के नीचे बैठ गए थे, जहां पर उन्हें भगवान शिव का दर्शन हुआ और उनको यह संदेश मिला कि उनकी इच्छा की पूर्ति हो जाएगी। उनको संतान की प्राप्ति भी हुयी। उन्हीं ने यहां भगवान शिव का मंदिर बनवाया और तब से दिवाली की सुबह लोग इस जगह पर लोग आते हैं।

लोग कहते हैं कि इस मंदिर व तालाब के स्थान का महत्व बढ़ने लगा है। जामेश्वर महादेव के मंदिर में दीपावली के अगले दिन लोग यहां के तालाब में स्नान और रामेश्वर महादेव के शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए आते हैं। यहां पर पूजा अर्चना करने से महिलाओं को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है।

 मंदिर के व्यवस्थापक हरेंद्र राय ने बताया कि मंदिर के आसपास साफ सफाई करते हुए महिलाओं के रहने और पूजा अर्चना को लेकर खासतौर पर व्यवस्था कर दी गई है वहीं कार्यक्रम कों सफल बनाने मे पुलिस प्रशासन भी मुस्तैद है। हर साल की तरह इस साल भी दूर दराज के लोग आकर पूजा अर्चना और तालाब में स्नान का कार्य करेंगे।

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