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विद्यासागर (डी. लिट्.) की मानद उपाधि से अलंकृत हुए ज़मानियाँ के साहित्यकार डॉ.सुरेश कुमार

गाजीपुर l जहाँ चाह वहाँ राह को चरितार्थ कर रहे हैं डॉ. सुरेश कुमार जी । जी हाँ ! आम्बेडकरवादी साहित्य के जाने-माने साहित्यकार डॉ. सुरेश कुमार जी को विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ भागलपुर, बिहार ने विद्यासागर (डी. लिट्.) की मानद उपाधि से विभूषित किया है । यह उपाधि डॉ. सुरेश कुमार जी को उनकी सुदीर्घ हिन्दी सेवा, सारस्वत साधना, कला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ, शैक्षिक प्रदेयों, महनीय शोध कार्य तथा राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा के आधार पर विद्यापीठ के कुल सचिव आ. देवेन्द्र नाथ शाह जी ने डाक के माध्यम से प्रेषित किया ।

इस सम्मान के प्राप्त होने से पूरे परिवार, गाँव, क्षेत्र और विद्यालय परिवार व शिक्षा विभाग में खुशी की लहर व्याप्त है । बताते चलें कि डॉ. सुरेश कुमार ग्राम- रामपुर फुफुआँव, तहसील- ज़मानियाँ, जनपद-ग़ाज़ीपुर (उत्तर प्रदेश) के मूल निवासी हैं ।

 ये बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश में प्राथमिक विद्यालय मच्छरमारा, ज़मानियाँ, ग़ाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश में शिक्षक के रूप में लगभग 8 वर्षों से सेवा देते हुए साहित्य साधना कर रहे हैं ।

डॉ सुरेश कुमार ने हिन्दी साहित्य की सेवा करते हुए अपने उपनाम डॉ. बुध्दप्रिय सुरेश सौरभ ग़ाज़ीपुरी के नाम से  तीन काव्यसंग्रह - स्वतन्त्र लेखनी की ललकार सुनो!, कलयुगी आदमी तथा सुलगती संवेदनाएँ  लिख चुके हैं जो प्रकाशित हो चुकी हैं । आज इनकी किताबें साहित्य जगत में धूम मचा रही हैं । इनकी रचनाओं में रोटी, कपड़ा और मकान के साथ-साथ सम्मान की ज़िंदगी जीने के पक्ष को सबसे ज्यादा तवज्जो दिया जाता है ।

 डॉ बुध्दप्रिय सुरेश सौरभ ग़ाज़ीपुरी जी की अब तक सैकड़ों रचनाएँ राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में छप चुकी हैं । अनेक साझा संकलनों में इनकी रचनाएँ छपी हैं । आपको अनेक संस्थाओं के द्वारा सैकडों सम्मान पत्र और प्रशस्ती पत्र प्राप्त हुए है ।

डॉ. सुरेश कुमार ने इस  सम्मान को प्राप्त होने का श्रेय अपने पूजनीय माता-पिता, भाई-बहन, जीवन संगिनी कुमारी ममता और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर जी के साथ-साथ सभी संतों, गुरुओं व महापुरुषों को दिया है ।

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