भोंका बांध की समस्या को लेकर भाकियू टिकैत का एक प्रतिनिधि मंडल सोनभद्र सांसद से मिला
चंदौली, भारतीय किसान यूनियन टिकैत और चकिया ब्लाक के किसानों का एक प्रतिनिधि मंडल 40 गांवों क्रमशः गांव कुशही, करवदिया, गनेशपुर, बलिया कलां, बलिया खुर्द, ऊँचेहरा, कुष्महा, जोगिया, सीतापुर, ताजपुर, गड़वा, शिकारगंज, लठियां, अमरा, अलीपुर भंगडा, मगन दीवाना, हिनौती, गायघाट, भांगड़ा, मजगावां, सुरथापुर, शहामदपुर, चतुरीपुर, मिसिरपुरा, जियनपुरा, उसरापुर, नौडीहा तिवारीपुर, बोदलपुर, पंडी, मुडहुवाँ आदि गांवों की समस्या को लेकर सोनभद्र सांसद छोटे लाल खरवार से मिलकर अपना दर्द बताया ।
किसानों ने कहा कि लगभग 64 साल से 40 गांव के किसान आज भी भोंका बांध में पानी के लिए तरस रहे है। भाकियू टिकैत के मंडल प्रवक्ता मणि देव चतुर्वेदी ने बताया कि भोंका बांध में पहाड़ों से पानी इकठ्ठा होने के लिए जो भोंका फीडर बनाया गया था, लगभग 64 साल बीत जाने पर भी उद्देश्य की पूर्ति नही हो पाई है। 40 गांव के किसान आज भी पानी के लिए तरस रहें है। कागज में फीडर चल रहा है।
हर साल उस फीडर की मेंटिनेंस के नाम से शासन द्वारा धन जारी किया जाता है और पैसा कागज से शुरू होकर कागज पर ही खत्म हो जाता है। ठेकेदार से अधिकारी तक पैसे का बंदरबांट कर लेते है। पिछले साल करोड़ों रुपये भोंका फीडर की मरम्मत के लिए जारी किए गए थे,उस धन का चकिया विधायक द्वारा फीडर पर बकायदा नारियल फोड़कर उद्घाटन भी किया गया। लेकिन मरम्मत के नाम पर शून्य काम हुवा।
उस उद्घाटन मे विधायक चकिया द्वारा घोषणा भी की गई कि जो फीडर 9 किमी घूमकर बांध में जाता है,जिससे पूरा पानी बांध में नहीं जाता पाता, 5 किमी के आसपास जो 700 मीटर का टीला है, उसको इस धन से कटिंग कर सीधे पानी भोंका बांध में गिरेगा और 40 गांवों को समुचित पानी मिलेगा। पर यह घोषणा किसानों को बरगलाने वाली थी। वो टीला तो कटने की बात दूर, फीडर की मरम्मत पर भी एक धेला पैसा नहीं खर्च किया गया।
इसको लेकर 40 गांवों के किसानों में रोष ब्याप्त है। चूंकि वो क्षेत्र लोकसभा सोनभद्र में आता है,इसलिए भोंका बांध की समस्या सांसद सोनभद्र के समक्ष रखी गयी। सांसद द्वारा किसानों को पूरा आस्वाशन दिया गया कि जल्द ही इस समस्या से किसानों को निजात दिलवाएंगे। धन की कोई कमी आड़े नही आने दिया जाएगा। खुद सांसद द्वारा इस काम की मॉनिटरिंग करेंगे।वही किसानों ने चेतावनी दिया कि अगर किसानों की समस्या का निवारण नहीं किया गया तो खुद किसान दशरथ मांझी की तरह 700 मीटर का टीला काटकर फीडर को भोंका बांध में मिलाने का काम करेंगे।
जिलाध्यक्ष सतीश सिंह चौहान ने कहा कि चकिया, शिकारगंज, नौगढ़ ब्लाकों के कई सौ गांव हमेशा सूखे की चपेट में रहते है। पूर्व में इस इलाके को बाण सागर परियोजना से जोड़ने की बात हुई थी। फाइलें भी चली। पर दब गई। जो चकिया क्षेत्र के किसानों के साथ एक धोखा हुवा है। सांसद से इस बात का जिक्र किया गया तो उन्होंने आने वाले संसद सत्र में इस मुद्दे को संसद में उठाने का आसवसन दिया।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि अगर शासन प्रशासन गंभीरता के साथ चकिया तहसील के किसानों की समस्या को सुलझाने का प्रयास नही किया तो क्षेत्र में किसानों का एक बड़ा आंदोलन होगा। जिसमें भाकियू टिकैत के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत शामिल होंगे। तहसील अध्यक्ष रूपेंद्र सिंह ने कहा कि 1956 में मौजूदा इंजीनियर द्वारा कुछ दबंग किसानों द्वारा गलत सर्वे कराकर उल्टा 4 किमी घूमकर पानी भोंका बांध में गिराने का फीडर बनाया गया, वहां पानी पहुंचते पहुंचते बिखकर कर चंद्रप्रभा नदी में गिर जाता है, जो किसानों के कोई काम का पानी नही रह जाता और जिस उद्देश्य के लिए भोंका बांध बनाया गया था,अर्थहीन होकर रह गया है। गलत सर्वे के कारण 64 साल से किसान आज भी उसकी सजा भुगत रहे है।
प्रतिनिधि मंडल में भाकियू टिकैत के मंडल मंडल प्रवक्ता मणि देव चतुर्वेदी,जिलाध्यक्ष सतीश सिंह चौहान, तहसील अध्यक्ष चकिया रूपेंद्र सिंह, ब्लाक अध्य्क्ष चकिया सदाफल प्रजापति, सरोज यादव,हनुमान प्रसाद यादव,उदयनाथ यादव, लक्ष्मण आदि आदि किसान शामिल रहे।