शारदा नदी की कटान रोकने के लिए सरकार स्थायी तटबंध का करे निर्माण-माले

पीलीभीत में हजारों परिवार प्रभावित, 26 दिनों से नदी किनारे धरना-अनशन जारी

अनसूना किए जाने पर पार्टी आंदोलन तेज करेगी 

लखनऊ, 30 अक्टूबर, बुधवार। भाकपा (माले) की राज्य इकाई ने पीलीभीत में शारदा नदी की कटान से पीड़ित परिवारों की स्थायी तटबंध बनाने की प्रमुख मांग पर विगत 26 दिनों से राहुल नगर में नदी किनारे चल रहे धरना-भूख हड़ताल को लेकर सरकार द्वारा जारी उपेक्षात्मक रवैये की आलोचना की है.

फोटो : राहुल नगर में नदी किनारे धरना दे रहे भाकपा माले व पीड़ित 

राज्य सचिव सुधाकर यादव ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि शारदा नदी की कटान से हजारों परिवार प्रभावित हैं. दलित बहुल ट्रांस-शारदा क्षेत्र के पीड़ित परिवारों की मांग है कि धनारा घाट से खिरकिया बरगदिया तक स्थायी तटबन्ध बनाया जाए, बर्बाद फसलों का मुआवजा दिया जाए और कटान से नदी में समा गई खेती की जमीन के एवज में कृषि भूमि दी जाए, ताकि प्रभावित परिवारों का गुजारा हो सके.

स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब बरसात में कटान शुरु होती है, तब प्रशासन द्वारा बचाव कार्य के नाम पर दिलासा देने के लिए खानापूर्ति की जाती है. आधा-अधूरा काम पानी में बह जाता है. यह समस्या वर्षों से है, मगर सरकार क्षेत्र को बचाने के नाम पर कोरे अश्वाशन ही देती आई है. स्थायी समाधान नहीं हुआ है.

कटान प्रभावित परिवारों के सामने जीवन और रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। वे पलायन के लिए विवश हो रहे हैं। किसान परिवारों का यह भी आरोप है कि सरकार पूरे क्षेत्र की जनता को उजाड़ कर जंगल और टाइगर रिजर्व क्षेत्र बनाना चाहती है। लेकिन वे अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए लड़ेंगे और हर बार की तरह कोरे आश्वासनों के झांसे में नहीं आएंगे। 

राहुक नगर में भाकपा (माले) के बैनर तले प्रभावित परिवारों का विगत पांच अक्टूबर से शुरु हुआ धरना 19 अक्टूबर से क्रमिक भूख हड़ताल में बदल गया और लगातार जारी है। आंदोलन की कमान महिलाओं ने संभाल ली है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक स्थायी तटबंध बनाने का काम शुरु नहीं हो जाता, आंदोलन जारी रहेगा। 

माले राज्य सचिव ने कहा कि योगी सरकार संवेदनहीन रवैया त्यागकर पीड़ितों की न्यायपूर्ण मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करे. उन्होंने चेतावनी दी कि अनसुना किये जाने पर पार्टी आंदोलन तेज करेगी.