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लाइब्रेरी की आड़ में चल रहा था शेयर मार्केट ठगी का नेटवर्क, 12 गिरफ्तार

250 क्लाइंट का विवरण मिला, तीन लोगों से करीब 9.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा; 24 मोबाइल, चार लैपटॉप, 42 सिम और हार्ड डिस्क बरामद

चंदौली। बलुआ थाना पुलिस और जनपदीय साइबर सेल की संयुक्त टीम ने साइबर ठगी के एक नए मॉडल का पर्दाफाश करते हुए लाइब्रेरी की आड़ में संचालित कथित फर्जी शेयर मार्केट एवं इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में मुख्य संचालक सहित कुल 12 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। मौके से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, लैपटॉप, सिम कार्ड, हार्ड डिस्क, हस्तलिखित डायरी और रजिस्टर बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार बरामद दस्तावेजों में करीब 250 क्लाइंट के नाम, मोबाइल नंबर और शेयर मार्केट ट्रेडिंग से संबंधित प्रविष्टियां मिली हैं। इनमें से तीन लोगों से बातचीत के दौरान करीब 9.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी अथवा आर्थिक क्षति की जानकारी सामने आई है।

पुलिस के मुताबिक बलुआ थाना क्षेत्र के ग्राम सराय रसूलपुर में “Readers Community Club” नाम से एक परिसर संचालित किया जा रहा था। बाहर से यह स्थान लाइब्रेरी जैसा दिखाई देता था, लेकिन पुलिस को सूचना मिली थी कि परिसर के अंदर संदिग्ध गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। मुखबिर की सूचना के आधार पर 24 अगस्त को बलुआ पुलिस और जनपदीय साइबर सेल की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की।

पुलिस टीम ने देखा कि परिसर में कई लोग मोबाइल फोन और लैपटॉप के माध्यम से काम कर रहे थे। मौके पर मौजूद लोगों से अलग-अलग पूछताछ की गई और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तथा दस्तावेजों को सुरक्षित कब्जे में लिया गया। पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली कि पूरे नेटवर्क का मुख्य संचालन आनन्द मौर्या द्वारा किया जाता था।

पुलिस के अनुसार नेटवर्क से जुड़े लोग संभावित ग्राहकों के मोबाइल नंबर हासिल करते थे और उन्हें फोन करके खुद को शेयर मार्केट अथवा स्टॉक मार्केट का विशेषज्ञ और इन्वेस्टमेंट एडवाइजर बताते थे। बातचीत के दौरान ग्राहकों को शेयर बाजार में निवेश कर कम समय में अधिक मुनाफा दिलाने का भरोसा दिया जाता था। ग्राहक जब उनके झांसे में आ जाते थे तो उनसे उनके डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट से जुड़ी जानकारी अथवा एक्सेस हासिल कर लिया जाता था।

आरोप है कि इसके बाद नेटवर्क से जुड़े लोग ग्राहकों के ट्रेडिंग अकाउंट को खुद हैंडल करते हुए शेयर बाजार में ट्रेडिंग करते थे। ट्रेडिंग में होने वाला नुकसान संबंधित खाताधारक को उठाना पड़ता था। पुलिस के अनुसार नुकसान होने के बाद आरोपित ग्राहकों से संपर्क बंद कर देते और मोबाइल फोन बंद कर देते थे। इस तरह कथित तौर पर ग्राहकों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जाता था।

पुलिस कार्रवाई के दौरान मौके से कुल 21 मोबाइल फोन और दो लैपटॉप बरामद हुए। इसके अलावा एक Seagate कंपनी की 250 जीबी इंटरनल हार्ड डिस्क भी बरामद हुई। पुलिस के अनुसार मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि हार्ड डिस्क मुख्य संचालक आनन्द मौर्या की है और इसका इस्तेमाल डेटा सुरक्षित रखने के लिए किया जाता था।

सबसे महत्वपूर्ण बरामदगी में एक हस्तलिखित डायरी और दो हस्तलिखित रजिस्टर शामिल हैं। पुलिस ने इनके अवलोकन में करीब 250 व्यक्तियों के नाम, मोबाइल नंबर और शेयर मार्केट/ट्रेडिंग से संबंधित प्रविष्टियां पाईं। इसके बाद पुलिस टीम ने डायरी में दर्ज कुछ मोबाइल नंबरों पर संपर्क किया। पुलिस के अनुसार बातचीत में तीन लोगों ने शेयर मार्केट से संबंधित गतिविधियों में उनके साथ करीब 9.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी अथवा आर्थिक क्षति होने की जानकारी दी।

इसी बीच मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने कथित मुख्य संचालक आनन्द मौर्या पुत्र सूबेदार मौर्या, निवासी सराय रसूलपुर को सुरतापुर काली माता मंदिर के पास से गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से एक Apple कंपनी का लैपटॉप, एक HP EliteBook लैपटॉप, एक iQOO मोबाइल, एक iPhone और एक Lava कीपैड मोबाइल बरामद किया गया।

पुलिस के मुताबिक पूरे मामले में एक ही परिसर में कई व्यक्तियों का मोबाइल और लैपटॉप के माध्यम से काम करना, शेयर मार्केट क्लाइंट से संबंधित रिकॉर्ड, अकाउंट हैंडलिंग, प्रॉफिट-लॉस, मेंबरशिप और शेयरिंग से संबंधित डायरी एवं रजिस्टरों का मिलना तथा दस्तावेजों में दर्ज लोगों द्वारा आर्थिक नुकसान की जानकारी देना महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं। इन तथ्यों के आधार पर पुलिस ने प्रथम दृष्टया परिसर में संगठित रूप से शेयर मार्केट/इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी और डीमैट-ट्रेडिंग अकाउंट हैंडलिंग से संबंधित संदिग्ध गतिविधियां संचालित किए जाने की बात कही है।

पूछताछ में मुख्य आरोपित आनन्द मौर्या ने पुलिस को बताया कि उसके साथ काम करने वाले लोग विभिन्न ग्राहकों के मोबाइल नंबरों पर फोन करते थे और खुद को शेयर मार्केट अथवा स्टॉक मार्केट का जानकार एवं इन्वेस्टमेंट एडवाइजर बताते हुए अधिक लाभ दिलाने का भरोसा देते थे। इसके बाद ग्राहकों के डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट की जानकारी हासिल कर उनके खातों से ट्रेडिंग की जाती थी। पुलिस के अनुसार आरोपित ने यह भी बताया कि ट्रेडिंग में नुकसान होने पर संबंधित ग्राहक को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था और उसके बाद मोबाइल फोन बंद कर दिया जाता था।

पुलिस ने मामले में कुल 12 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों में मुख्य संचालक आनन्द मौर्या के अलावा प्रकाश मौर्या, जोगिंदर मौर्या, सिद्धार्थ मौर्या, अभिषेक विश्वकर्मा, विकास शर्मा, कुशवाहा, प्रीतम कुमार मौर्या, अमन कुमार मौर्या, आकाश मौर्या, विशाल गौड़ और विशाल मौर्या शामिल हैं। इनमें कई आरोपित सराय रसूलपुर, जबकि कुछ धानापुर क्षेत्र के गांवों के निवासी बताए गए हैं।

पुलिस के अनुसार आरोपितों के कब्जे और मौके से कुल चार लैपटॉप, 24 मोबाइल फोन, मोबाइलों में लगे 42 सिम कार्ड, एक 250 जीबी Seagate इंटरनल हार्ड डिस्क, एक हस्तलिखित डायरी और दो हस्तलिखित रजिस्टर बरामद किए गए हैं। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच के आधार पर पुलिस मामले में और भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने की संभावना जता रही है।

इस मामले में बलुआ थाने पर मु0अ0सं0 254/2026 के तहत धारा 318(4), 61(2), 3(5) बीएनएस और 66डी आईटी एक्ट में अभियोग पंजीकृत किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले में NCRB पोर्टल सहित अन्य माध्यमों से विवेचनात्मक कार्रवाई जारी है। बरामद मोबाइल फोन, लैपटॉप, सिम कार्ड और हार्ड डिस्क से मिलने वाले डिजिटल डेटा की जांच के बाद नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संभावित पीड़ितों के बारे में भी जानकारी सामने आ सकती है।

इस कार्रवाई में बलुआ थाना प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार सिंह, वरिष्ठ उपनिरीक्षक अनन्त कुमार भार्गव, साइबर सेल के उपनिरीक्षक अभिषेक शुक्ला, बलुआ थाने के उपनिरीक्षक जमीलुद्दीन खान, कांस्टेबल सरोज कुमार यादव, साइबर सेल के हेड कांस्टेबल पवन यादव, कांस्टेबल नौशाद अली तथा बलुआ थाने के रिजर्व कांस्टेबल अनमोल वर्मा शामिल रहे।

पुलिस की इस कार्रवाई ने यह भी सामने ला दिया है कि साइबर ठगी करने वाले गिरोह अब पारंपरिक तरीके के बजाय वैध कारोबार या शैक्षणिक संस्थान जैसी दिखने वाली गतिविधियों की आड़ लेकर लोगों को अपने जाल में फंसाने का प्रयास कर सकते हैं। शेयर बाजार में निवेश के नाम पर मिलने वाले ऐसे फोन कॉल में लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। किसी अनजान व्यक्ति को डीमैट या ट्रेडिंग अकाउंट की लॉगिन जानकारी, पासवर्ड, ओटीपी अथवा अन्य संवेदनशील विवरण उपलब्ध कराना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। मामले की विवेचना आगे बढ़ने के साथ पुलिस द्वारा बरामद डिजिटल सामग्री और दस्तावेजों की जांच से कथित नेटवर्क के वास्तविक विस्तार का पता चलने की उम्मीद है।