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चंदौली का सबसे बड़ा गौशाला पड़ा खाली, परिसर जलमग्न; 1.68 करोड़ की लागत पर सवाल

सिहावल में बने वृहद गो संरक्षण केंद्र में एक भी गोवंश नहीं, जलनिकासी और समतलीकरण की व्यवस्था पर सवाल; ग्रामीणों ने जांच की उठाई मांग

धानापुर। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के धानापुर विकासखंड अंतर्गत सिहावल गांव में करीब 1.68 करोड़ रुपये की लागत से तैयार वृहद गो संरक्षण केंद्र इन दिनों अपनी बदहाल स्थिति को लेकर चर्चा में है। जिस केंद्र का निर्माण निराश्रित और छुट्टा गोवंश को सुरक्षित आश्रय देने तथा किसानों को छुट्टा पशुओं की समस्या से राहत दिलाने के उद्देश्य से किया गया है, वहां फिलहाल एक भी गोवंश नजर नहीं आ रहा है। दूसरी ओर बारिश के मौसम में केंद्र का बड़ा हिस्सा जलभराव की समस्या से जूझता दिखाई दे रहा है।

केंद्र परिसर में जगह-जगह बारिश का पानी जमा होने से निर्माण और व्यवस्थाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार परिसर में जलनिकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण बरसात का पानी बाहर नहीं निकल पा रहा है। कई स्थानों पर जमीन नीची होने तथा समतलीकरण ठीक से नहीं होने के कारण पानी जमा हो गया है। कैटल शेड के आसपास मिट्टी निकाले जाने से बने गड्ढों में भी पानी भर गया है।

करोड़ों की लागत के बाद भी खाली पड़ा केंद्र

वृहद गो संरक्षण केंद्रों की स्थापना का उद्देश्य निराश्रित गोवंश को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना है। ग्रामीण क्षेत्रों में छुट्टा पशुओं के कारण किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए रात-दिन खेतों की रखवाली करनी पड़ती है। ऐसे में बड़े गो संरक्षण केंद्र किसानों के लिए राहत का माध्यम माने जाते हैं।

सिहावल में भी इसी उद्देश्य से बड़े स्तर पर केंद्र का निर्माण कराया गया। करीब 1.68 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस केंद्र में कैटल शेड समेत विभिन्न निर्माण कार्य कराए गए हैं। लेकिन वर्तमान में परिसर में एक भी गोवंश दिखाई नहीं देना इसकी उपयोगिता को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब इतनी बड़ी धनराशि खर्च करके केंद्र तैयार कराया गया है तो उसका संचालन भी प्रभावी तरीके से होना चाहिए। यदि केंद्र संचालन के लिए तैयार है तो वहां गोवंश क्यों नहीं हैं और यदि संचालन अभी शुरू नहीं हुआ है तो इसकी वजह क्या है, यह जिम्मेदार अधिकारियों को स्पष्ट करना चाहिए।

बारिश में जलमग्न हो रहा परिसर

गो संरक्षण केंद्र जैसे स्थान पर जलनिकासी की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। पशुओं को रखने वाले परिसर में यदि बारिश का पानी लंबे समय तक जमा रहे तो कीचड़, गंदगी, दुर्गंध और संक्रमण जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसका सीधा असर भविष्य में यहां रखे जाने वाले गोवंश के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

सिहावल केंद्र में बारिश के बाद कई स्थानों पर पानी जमा दिखाई दे रहा है। परिसर से पानी बाहर निकालने के लिए प्रभावी नाली अथवा जलनिकासी व्यवस्था पर्याप्त नजर नहीं आती। ऐसे में सवाल यह भी है कि निर्माण के समय बरसाती पानी की निकासी को लेकर किस प्रकार की योजना बनाई गई थी।

यदि जलनिकासी की व्यवस्था निर्माण का हिस्सा थी तो परिसर में पानी क्यों जमा हो रहा है और यदि ऐसी व्यवस्था नहीं बनाई गई थी तो इतने बड़े गो संरक्षण केंद्र के निर्माण में इस जरूरी पहलू को क्यों नजरअंदाज किया गया, यह जांच का विषय हो सकता है।

कैटल शेड के आसपास बने गड्ढे

केंद्र परिसर में कैटल शेड के आसपास की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक शेड के आसपास से मिट्टी निकाले जाने के कारण कुछ स्थानों पर गड्ढे बन गए हैं। बारिश के बाद इन गड्ढों में पानी जमा हो गया है।

निर्माण कार्य के दौरान यदि किसी स्थान से मिट्टी निकाली गई थी तो कार्य पूरा होने के बाद उस स्थान को भरकर समतल किया जाना चाहिए था। लेकिन गड्ढों में पानी जमा होने से साफ है कि परिसर के समुचित समतलीकरण की आवश्यकता है।

भविष्य में यदि यहां बड़ी संख्या में गोवंश रखा जाता है तो ऐसे गड्ढे पशुओं के लिए भी खतरा बन सकते हैं। पशुओं के फिसलने या चोटिल होने की आशंका बनी रह सकती है। इसलिए केंद्र के संचालन से पहले परिसर का समुचित समतलीकरण और गड्ढों को भरना जरूरी होगा।

बाउंड्रीवाल और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल

गो संरक्षण केंद्र में केवल कैटल शेड का निर्माण कर देना पर्याप्त नहीं है। वहां रखे जाने वाले गोवंश की सुरक्षा के लिए पूरे परिसर की पर्याप्त घेराबंदी भी जरूरी है। सिहावल केंद्र में बाउंड्रीवाल की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार परिसर में बाहरी जानवरों की आवाजाही बनी रहती है। कुत्ते और सियार जैसे जानवर भी परिसर में पहुंच जाते हैं। यदि भविष्य में यहां बड़ी संख्या में गोवंश रखा जाता है तो उनकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी, यह महत्वपूर्ण प्रश्न है।

परिसर की पर्याप्त घेराबंदी नहीं होने पर गोवंश के बाहर निकलने तथा बाहरी जानवरों के अंदर प्रवेश करने की संभावना बनी रह सकती है। इसलिए केंद्र को संचालित करने से पहले सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा जरूरी है।

समतलीकरण के अभाव में बढ़ रही समस्या

केंद्र परिसर में कई स्थानों पर जमीन के समतल नहीं होने की स्थिति भी दिखाई दे रही है। बारिश का पानी स्वाभाविक रूप से नीची जगहों पर जमा हो रहा है। यदि परिसर में पर्याप्त ढलान और जलनिकासी की व्यवस्था होती तो बारिश के पानी को बाहर निकालना आसान होता।

गोवंश के लिए बनाए गए परिसर में समतलीकरण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पशुओं की लगातार आवाजाही होती है। गड्ढों, कीचड़ और जलभराव के कारण पशुओं के फिसलने तथा चोटिल होने का खतरा बढ़ सकता है।

इसके अलावा लंबे समय तक पानी जमा रहने से परिसर में दुर्गंध और गंदगी की समस्या भी पैदा हो सकती है। इससे केंद्र की स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।

किसानों को छुट्टा गोवंश से राहत की उम्मीद

धानापुर क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में छुट्टा गोवंश किसानों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। खेतों में घूमने वाले पशु फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। कई किसान रात में भी खेतों की रखवाली करने के लिए मजबूर होते हैं।

ऐसे में सिहावल में वृहद गो संरक्षण केंद्र के निर्माण से ग्रामीणों को उम्मीद थी कि निराश्रित और छुट्टा गोवंश को यहां सुरक्षित रखा जाएगा। इससे किसानों को भी बड़ी राहत मिलने की संभावना थी।

लेकिन केंद्र के परिसर में फिलहाल एक भी गोवंश नहीं होने से ग्रामीणों में यह सवाल उठ रहा है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस केंद्र का वास्तविक लाभ आखिर कब मिलेगा।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि केंद्र के संचालन में प्रशासनिक, तकनीकी या किसी अन्य प्रकार की बाधा है तो उसे तत्काल दूर किया जाना चाहिए। सरकारी धन से निर्माण के बाद केंद्र को प्रभावी रूप से संचालित नहीं किया गया तो निर्माण का उद्देश्य ही प्रभावित होगा।

निर्माण कार्य की जांच की मांग

सिहावल के वृहद गो संरक्षण केंद्र की मौजूदा स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों और क्षेत्रीय लोगों की ओर से निर्माण कार्य तथा वर्तमान व्यवस्थाओं की जांच की मांग उठ रही है।

विशेष रूप से करीब 1.68 करोड़ रुपये की लागत, जलनिकासी व्यवस्था, परिसर के समतलीकरण, कैटल शेड के आसपास मिट्टी निकाले जाने से बने गड्ढों और सुरक्षा व्यवस्था की जांच की मांग की जा रही है।

लोगों का कहना है कि संबंधित अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर केंद्र का निरीक्षण करना चाहिए। यह भी देखा जाना चाहिए कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ है या नहीं। साथ ही केंद्र का निर्माण कब पूरा हुआ, संचालन की जिम्मेदारी किस विभाग अथवा संस्था के पास है और अब तक यहां गोवंश रखने की व्यवस्था क्यों शुरू नहीं हुई, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

यदि निरीक्षण में निर्माण संबंधी कमियां सामने आती हैं तो उन्हें दूर कराने की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। वहीं यदि केंद्र के संचालन में प्रशासनिक प्रक्रिया बाधा बन रही है तो उसे शीघ्र पूरा कराया जाना चाहिए।

अब अधिकारियों के निरीक्षण का इंतजार

सिहावल का वृहद गो संरक्षण केंद्र सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर रहा है। एक ओर करीब 1.68 करोड़ रुपये की लागत से केंद्र का निर्माण कराया गया है, वहीं दूसरी ओर परिसर में एक भी गोवंश नहीं है और बरसात के दिनों में जलभराव की समस्या सामने आ रही है।

ऐसे में अब ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी है। जरूरत इस बात की है कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करें और जलनिकासी, समतलीकरण, सुरक्षा तथा अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराकर केंद्र का संचालन सुनिश्चित कराएं।

आखिर जिस उद्देश्य से सरकारी धन खर्च कर यह वृहद गो संरक्षण केंद्र तैयार कराया गया है, उसका लाभ निराश्रित गोवंश और किसानों दोनों को मिलना चाहिए। फिलहाल सिहावल का यह केंद्र करोड़ों की लागत के बावजूद खाली परिसर और बरसाती जलभराव के कारण सवालों के घेरे में है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में निरीक्षण और जांच कर कमियों को दूर कराने के लिए क्या कदम उठाता है।