सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
महाकुंभ में ध्रुपद, कथक और भजनों की बही गंगा
प्रयागराज, 25 जनवरी 2025। महाकुंभ नगर में आयोजित गंगा पंडाल में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. दिन का आरंभ संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित और बिहार कला पुरस्कार विजेता ध्रुपद कलाकार पंडित प्रेम कुमार मलिक की भावपूर्ण गायकी से हुआ. राग भीपलासी और राग शंकरा में प्रस्तुत उनकी शास्त्रीय गायन ने दर्शकों को संगीत की गहराई का अनुभव कराया.
पंडित मलिक ने अपने विशेष रचनाओं "धन धन गंगे", "शम्भू हर रे", और "मन लागो मेरे यार फकीरी में" से गंगा, महादेव और कबीर के प्रति श्रद्धा व्यक्त की. कार्यक्रम के दौरान उनके ध्रुपद गायन को दर्शकों ने तालियों की गूंज से सराहा.
दोपहर के सत्र में, पद्मश्री शोवना नारायण ने अपनी नृत्य नाटिका से महाकुंभ की महिमा को अभिव्यक्त किया. कथक नृत्य के माध्यम से उन्होंने प्रयागराज के कुंभ पर्व, शिव विवाह, रावण द्वारा रचित 'जटाटवी गलज्जल' और भगवान शिव की महिमा का अद्वितीय प्रदर्शन किया. शोवना नारायण की प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक चेतना को एक नई ऊंचाई प्रदान की.
कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति मुंबई के प्रसिद्ध पार्श्वगायक रवि त्रिपाठी ने दी. उनके भजनों "नमो नमो", "हर हर गंगे", "महाकुंभ चलो" और "बम भोले" ने दर्शकों को जोश और भक्ति भाव से भर दिया. उन्होंने अपनी अवधी रचना 'कथरी' से भी श्रोताओं को भावविभोर किया.
आज एकादशी और साप्ताहिक अवकाश के कारण श्रद्धालुओं की भारी भीड़ महाकुंभ नगर में देखने को मिली. स्नान के साथ इन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को यादगार बना दिया।