कुष्ठ रोग का संचरण रोकने टीम पहुंची रोगी के घर
पड़ोसियों को खिलाया एसडीआर, घर घर जाकर किया जांच पड़ताल
चंदौली, जिले के धानापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से कुष्ठ रोग संचरण रोकने के लिए शुक्रवार को चिकित्सकों की एक टीम क्षेत्र के शिवदासीपुर गांव में पंहुची और रोगी के घर एवं उसके आस पास पड़ोसियों को एसडीआर की दवा खिलाया. तत्पश्चात घर घर जाकर कुष्ठ रोगियों की जांच पड़ताल किया.
भारत सरकार कुष्ठ रोग के संचरण को रोकने के लिए राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम और राष्ट्रीय रणनीतिक योजना चलाकर कुष्ठ रोग के मामलों का शीघ्र पता लगाने, उपचार प्रदान करने, विकलांगता को रोकने और कुष्ठ रोग के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं और अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नियमित रूप से कुष्ठ रोग के मामलों का पता लगा रही है.
इसी क्रम में आज शिवदासीपुर गांव में
कुष्ठ रोगी के घर चिकित्सकों की एक टीम पहुंचकर रोगी के घर एवं उसके आस पास के लोगों को भी एसडीआर खिलाया और घर घर जाकर पता लगाया कि कोई व्यक्ति कुष्ठ रोग से पीड़ित तो नहीं है न. इस दौरान चिकित्सकों की टीम में चंद्रधर सिंह यादव (HE), सुनील दत्त (NMS) एवं आशा सोनम मिश्रा रहे।
राष्ट्रीय रणनीतिक योजना (एनएसपी) और रोडमैप 2023-2027 तथा कुष्ठ रोग के लिए एंटी-माइक्रोबियल प्रतिरोध के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश 30 जनवरी, 2023 को जारी किए गए हैं.
कुष्ठ रोग मामले का पता लगाने का अभियान (एलसीडीसी), सक्रिय मामले का पता लगाना और नियमित निगरानी, ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आशा और अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से नियमित आधार पर और प्रारंभिक चरण में कुष्ठ रोग के मामलों का पता लगाना सुनिश्चित किया जा सके और ग्रेड II विकलांगता को रोका जा सके।
बच्चों (0-18 वर्ष) की स्क्रीनिंग के लिए कुष्ठ रोग स्क्रीनिंग को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) और राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) के साथ एकीकृत किया गया है।
30 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की जांच के लिए आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत कुष्ठ रोग जांच को व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की गतिविधियों के साथ एकीकृत किया गया है।
संपर्क का पता लगाया जाता है और संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने के लिए सूचकांक मामले के रोगियों को पोस्ट एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (पीईपी) दिया जाता है।
विकलांगता निवारण एवं चिकित्सा पुनर्वास (डीपीएमआर) कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न सेवाएं प्रदान की जा रही हैं, जैसे प्रतिक्रिया प्रबंधन, माइक्रोसेलुलर रबर (एमसीआर) फुटवियर, सहायक उपकरण, स्व-देखभाल किट आदि प्रदान करना।
पुनर्निर्माण सर्जरी (आरसीएस) जिला अस्पतालों/मेडिकल कॉलेजों/केन्द्रीय कुष्ठ संस्थानों में की जाती है तथा आरसीएस कराने वाले प्रत्येक रोगी को 12,000/- रुपये का कल्याण भत्ता दिया जाता है।