भीम आर्मी व आजाद समाज पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता ने मौजूदा सरकार की निंद उड़ा दी है - विनय सागर

निठल्लों पाखंडियों ने भाग्य भूत भगवान का भय दिखाकर बहुजनों को पहले अपाहिज कर शोषण किया, लूटा और फिर राज कर रहे हैं- अर्जुन आर्या

चंदौली, सटीक संवाद। जिले के तहसील सकलडीहा अंतर्गत खडेहरा और एवती गांव में गुरुवार को भीम आर्मी एवं आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के बैनर तले प्रबुद्ध जन सम्मेलन एवं भाईचारा बनाओ अस्तित्व बचाओ कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरूआत सर्व प्रथम डॉ. अंबेडकर के तैल चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर किया गया.

फोटो: विनय सागर खड़ेहरा गांव में प्रबुद्ध जन सम्मेलन को संबोधित करते हुए 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विनय सागर ने लोगो को संबोधित करते हुए कहा कि दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों महिलाओं सहित समाज के समस्त गैर बराबरी के नागरिकों को मूल अधिकार प्रदान कराने के लिए बहुजन समाज में समय समय पर जन्में उन सभी संतों- महापुरुषों, ऋषियों - महर्षियों ने सामाजिक न्याय के प्रणेता बने. जिन्होंने रूढ़िवादी कुरीतियों परंपराओं और अंधविश्वास, पाखंड और जातिवाद का घोर विरोध किया. साथ ही इन सभी समस्याओं से दूर होने और उनकी दयनीय दशा और दिशा बदलने के लिए अनेक विद्यालयों की स्थापना किए, धर्मशालाएं खोले और निःशुल्क शिक्षा देकर शिक्षित बनने के लिए प्रेरित किया. आधुनिक भारत में डॉ. भीमराव अम्बेडकर को मौका मिला तो उन्होंने भारतीय संविधान के जरिए सबको समता समानता का अधिकार दिया. देश को आजादी दिलाने के बाद बाबा साहब जब दुनिया से चले गए तो इस वंचित समाज की आवाज उठाने वाला काफी दिनों तक कोई रहनुमा नहीं रहा. लंबे अरसे बाद मा0 कांशीराम मसीहा बन कर आए और बहुजन हिताय बहुजन सुखाय के तर्ज पर बामसेफ डीएस4 और फिर बहुजन समाज पार्टी बनाए. उन्होंने बहुजन समाज के उन सभी संतों- महापुरुषों ऋषियों - महर्षियों एवं बाबा साहब के मिशन को घर- घर तक पहुंचाया और कहा कि हक अधिकार मांगने से नहीं मिलेगा, इसको पाने के लिए उन्हें छीनना पड़ेगा. उनके इस मूवमेंट से बहन कुमारी मायावती उत्तर प्रदेश जैसे सबसे बड़े सूबे की चार बार मुख्यमंत्री बनी. कांशीराम साहब के जाने के बाद बहन जी ने उनके नारे को बदलकर सर्वजन सुखाय सर्वजन हिताय का कर दिया. तबसे बहुजन की राजनीति में सुखा पड़ गया और सत्ता उन धन्नासेठों और मनुवादियों के हाथों में चला गया. तबसे बहुजन समाज के लोगो पर हो रहे जुर्म और ज्यादती ने भाई चंद्रशेखर आजाद को इसका जवाब देने के लिए भीम आर्मी संगठन बनाने पर मजबूर कर दिया. संगठन के जरिए बहुजनों पर हो रहे जुर्म अत्याचार की जब वह बुलंद आवाज बने तो इसके लिए मौजूदा सरकार ने उनको कई कई बार मुकदमों में पाबंद कर जेल भेजा. इसके दौरान उनके  शुभचिंतकों के द्वारा मिल रहे साथ ने उनका हौसला और बुलंद कर दिया और जब उन्होंने देखा कि बिना शासन सत्ता के बहुजन समाज को न्याय और उनका हक अधिकार मिलने वाला नहीं है तो उन्होंने आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की स्थापना किया. नगीना लोक सभा सीट से विजई होने के बाद देश की सदन में उन्होंने बहुजन समाज में जन्में संतों महापुरुषों ऋषियों - महर्षियों बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर और मा0 कांशीराम को सम्मान देने का काम किया. बहुजन समाज के हक हकूक धन धरती और राज पाठ बंटवाने की मांग को दोहराया. आज देश में भीम आर्मी एवं आजाद समाज पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता ने मौजूदा सरकार की निंद उड़ा दी है. जिसका जीता जागता उदाहरण सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर लगातार देखा जा रहा है.

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अर्जुन प्रसाद आर्य ने कहा कि निठल्लों पाखंडियों ने भाग्य भूत भगवान का भय दिखाकर बहुजनों को पहले अपाहिज किया शोषण करके लूटा और फिर उनपर आज राज कर रहे हैं. बेसिर पैर की बातों से हमारे भोले भाले समाज को भ्रमित किया. जातियों में बांटा. ऊंच नीच, छुआछूत, भेदभाव, अवतारवाद और कर्मकांड में उलझा दिया. भारतीय समाज की जटिल संरचना, दुराग्रही और कुटिलतावादी विचारधारा के संकट ने समाज के रूपांतरण की पूरी प्रक्रिया को भोथरा बना दिया. आज उस ठोस वैचारिकी के व्यक्तिवाद और कुलीनतावाद से हमारा समाज कुंठित हो गया. ऐसे में ग्रसित दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की रहनुमाई करने वाले नेताओं ने स्वयं के स्वार्थ को लेकर जातिगत पार्टियां बनाकर टुकड़े टुकड़े हो गए. बहुजन समाज का दलों में बटना निठल्लों के लिए बेस प्वाइंट बना. यहीं नहीं बहुजन का शोषण ब्राह्मणवादी विचार धारा के बहुजनो ने भी किया और आज भी कर रहे हैं. इसे स्वीकारना होगा. अन्यथा आंख मूंदकर समर्थन करने पर गड्ढ़े में गिरने की संभावना इसी तरह बनी रहेगी. बात रही बहुजन समाज को न्याय और उनके हक अधिकार की तो यह तभी संभव होगा जब हमारा रहनुमा देश का शासक बनेगा. देश का शासक बनने के लिए हमें पहले बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर जी के विचारों पर चलकर पाखंडियों के विभिन्न कारकों को जड़ से खत्म करना होगा और यह तभी संभव है जब हमारा समाज समग्र होकर बहुजन राजनीति के स्वरूप और सीमाओं पर एकता की आवाज बनेगा. आज की राजनीति में मौलिकता के अभाव में बहुजन राजनीति अपने लक्ष्य से कोसों दूर नजर आ रही है. समतामूलक समाज की स्थापना के लिए बहुजन राजनीति को सामाजिक जागृति और बहुजन एकता पर बल देना होगा. नई पैदा हुई राजनीतिक परिस्थितियों ने वैकल्पिक राजनीति के लिए एक स्पेस बना दिया है. बहुजन राजनीति को अपने हित में इसका सार्थक उपयोग करने के लिए भाई चंद्रशेखर के हाथों को मजबूत करना होगा. 

जिलाध्यक्ष अरविंद कुमार ने कहा कि हमें जो स्वतंत्रता मिली है उसके लिए हम क्या कर रहे हैं? यह स्वतंत्रता हमें अपनी सामाजिक व्यवस्था को सुधारने के लिए मिली है. जो असमानता, भेदभाव और अन्य चीजों से भरी हुई है, जो हमारे मौलिक अधिकारों के साथ संघर्ष करती है. समाज में अनपढ़ लोग हैं ये हमारे समाज की समस्या नही है. लेकिन जब समाज के पढ़े लिखे लोग भी गलत बातों का समर्थन करने लगते हैं और गलत को सही दिखाने के लिए अपने बुद्धि का उपयोग करते हैं. यही हमारे समाज की सबसे बड़ी समस्या है.

वहीं आनंद प्रकाश मौर्य ने चेताया कि बहुजन समाज को अब एकजूट होने का आखिरी चरण चल रहा है, और अब एकजूट होकर बहुजन हितैषी आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) को शासन सत्ता में बैठाकर अपना हक और अधिकार नहीं ले लेता है तो वह दिन दूर नहीं जब काले अंग्रेज देश को गुलाम बना देंगे. कार्यक्रम का संचालन सिद्धार्थ प्राण बाहु ने किया. इस दौरान सैकड़ों की संख्या में महिलाएं पुरुष और नौजवान उपस्थित रहकर कार्यक्रम में संबल प्रदान किया।

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