डॉक्टर ने पर्ची पर लिखा पांच दवा तो स्टोर बाबू ने एक ही दिया और बोला बाकी बाहर से ले लेना-पिंटू पाल
कहा, मरीजों को थोपा जा रहा आर्थिक बोझ, कब होगा सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार,मामला चंदौली जिला अस्पताल का है
चंदौली, सटीक संवाद। पंडित कमला पति त्रिपाठी जिला संयुक्त अस्पताल में जब डॉक्टर ने पर्ची पर पांच दवाएं लिखी तो स्टोर बाबू ने एक ही दवा दिया और बोला कि बाकि सभी बाहर से ले लेना. कमीशनखोरी के चक्कर में मरीजों और उनके साथ में आए तीमारदारों खासकर गरीब मरीजों को जानबूझकर आर्थिक बोझ थोपा जा रहा है. जीवन रक्षक निःशुल्क दवाएं लेने के चक्कर में आए मरीजों को बाहर से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं. भले ही अस्पताल में वे दवाएं उपलब्ध हों. बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाओं का दावा करने वाली योगी सरकार सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में पदस्थ इन डॉक्टरों में सुधार कब लायेगी? उक्त बातें भारतीय किसान मजदूर संयुक्त यूनियन के वाराणसी युवा मंडल अध्यक्ष पिंटू पाल ने जिला अस्पताल पर बुधवार को कहा.
उन्होंने आरोप लगाया कि आज वह अपने कान में हुए इन्फेक्शन का इलाज कराने जब चंदौली जिला अस्पताल पहुंचे तो नाक कान और गला विशेषज्ञ डॉ तृप्ति अग्रवाल द्वारा उनकी पर्ची पर पांच दवाएं लिखी गई. पर्ची लेकर जब वह दवा स्टोर रुम में गए तो उन्हें एक ही दवा मिली और बाकि की सभी चार दवाएं बाहर से लेने को बताया गया. यहीं नहीं उनकी मौजूदगी में आए कई मरीजों के साथ ऐसा ही हुआ था.
उन्होंने आगे बताया कि जिला अस्पताल के डॉक्टर धड़ल्ले से सरकारी पर्चे पर प्राइवेट दवाएं लिख रहे हैं. इसके पीछे डाक्टर अस्पताल में दवाएं न होने का तर्क दे रहे हैं. वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि कमीशन खोरी के चलते बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं. मामले को लेकर सरकार का दावा है कि सभी सरकारी अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाएं निशुल्क यानी कि फ्री हैं. ऐसे में तर्कों के लिहाज से कौन सच है और कौन झूठ, अपने आप में बड़ा सवाल है?
जमीन की सच्चाई की बात करें तो जिला अस्पताल में इलाज कराने जा रहे गरीबों को सरकारी पर्चे पर लिखी बाहर की दवाएं प्राईवेट अस्पतालों से भी महंगी पड़ रही हैं. इससे सरकार की बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के दावे हवाहवाई बन गए हैं. जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टरों द्वारा बाहर की लिखी दवाओं को मरीजों को मजबूरी में खरीदना पड़ रहा है. आज एक के बाद एक मरीजों और तीमारदारों को हाथों में पर्चा लटकाए जिला अस्पताल से निकलकर मेडिकल स्टोरों पर जाते देखा गया.
उन्होंने चेताया कि मुख्य चिकित्साधिकारी और जिलाधिकारी चंदौली तत्काल इस मामले को संज्ञान में ले और स्वास्थ्य व्यवस्था में भारी गड़बड़ी का सुधार करें अन्यथा किसान यूनियन बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे.