कर्पूरी ठाकुर पिछड़ों के हक और अधिकार के आवाज थे : अर्जुन आर्या
मुख्यधारा में स्थान दिलाने के लिए सड़क से सदन तक लड़ा, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई, सादगी और ईमानदारी से जीवन व्यतीत किया
चहनियां, चंदौली। क्षेत्र के लक्षु ब्रम्ह बाबा मंदिर परिसर में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और एक प्रखर समाजवादी नेता भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती बड़े ही श्रद्धा और हर्ष पूर्वक मनाई गई. वक्ताओं द्वारा उनके जीवन संघर्षों पर प्रकाश डाला गया और बहुजन महापुरुषों के सत्कर्मों पर चलने का संकल्प लिया गया.
इस दौरान अर्जुन प्रसाद आर्य ने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के निर्विवाद मसीहा थे, उन्हें मुख्यधारा में स्थान दिलाने के लिए सड़क से सदन तक लड़ाई लड़े, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई,बिहार मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए शिक्षा, चिकित्सा, स्वाभिमान, सेवा, सुरक्षा और संविधान के सम्मान के प्रति समर्पित थे. अपना पूरा जीवन सादगी और ईमानदारी से व्यतीत किया.
उन्होंने अपनी सादगी, ईमानदारी और दबे-कुचले वर्गों के उत्थान के लिए संघर्ष करते हुए बिहार में मैट्रिक तक शिक्षा मुफ्त की, हिंदी को बढ़ावा दिया, और 'कर्पूरी फॉर्मूला' के तहत आरक्षण लागू किया, और पिछड़ों को नौकरियों में भर्ती की. बिहार के विकास व हाशिए पर पड़े लोगों के उत्थान के लिए उन्हें 2024 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया.
उनका नारा था कमाने वाला खायेगा लूटने वाला जायेगा, हक अधिकार चाहो तो अड़ना सीखो, कदम कदम पर लड़ना सीखो, जीना है तो मरना सीखो। जब स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में जब संघर्ष कर रहे थे तब उन्होंने सोई कौन को जगाने के लिए नारा दिया था हम सोए वतन को जगाने चले हैं हम मुर्दा दिलों को जिलाने चले हैं.
आज तक देश चलाने वाले शिक्षा का केंद्रीकरण न करके प्राइवेट और सरकारी दो तरह की शिक्षाएं लागू किए हुए हैं. आज जब समाज के कुछ जगे व शिक्षित लोग अपने हक अधिकार के लिए मुखर हो रहे हैं तो सरकारें पाठशाला को बंद कर रहीं हैं और मधुशाला की संख्या में बढ़ोत्तरी कर रही हैं. अब आप को स्वयं सोचना है कि आने वाला भविष्य कैसा होगा.
इस दौरान पूर्व मंत्री आरपी कुशवाहा, विधायक प्रभुनारायण सिंह यादव, धनंजय सिंह, सूबेदार सिंह, पिंटू पाल, केशव राजभर, जोखू सिद्दीकी,रामलाल मौर्य, अंबिका प्रजापति, बसंत शर्मा,शतीश शर्मा, राजेश शर्मा, सिकंदर,लालमोहम्मद, इंद्रजीत शर्मा, अध्यक्षता मोहन शर्मा और संचालन दीपक शर्मा ने किया।