भारत के ग्रामीण क्षेत्रों, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में, हैंडपंप रीबोरिंग के नाम पर भ्रष्टाचार एक आमबात बन चुकी है। कागजों पर काम दिखाकर सरकारी फंड का दुरुपयोग किया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं होता।
प्रधान-सचिव की मिलीभगत से फंड हड़पना।
सूत्रों के अनुसार, इस घोटाले में उच्चाधिकारी जानकर भी चुप्पी साधे हुए हैं, जिसके चलते भ्रष्टाचार का फैलाव जारी है। इस गांव में कई भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं, जैसे ग्राम पंचायत विकास कार्यों में भारी अनियमितताएँ और स्वच्छता अभियान के तहत गुणवत्ता की कमी।सार्वजनिक स्थानों पर कहीं भी नल रिबोर नहीं हुआ। इसके बावजूद बीडीओ और एडीओ पंचायत शिकायतों पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे और मामलों को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।
शिकायतों की अनदेखी, बिना भौतिक सत्यापन के निस्तारण
बीडीओ और एडीओ पंचायत घोटाले को छुपाने के लिए भौतिक सत्यापन किए बिना ही शिकायतों का निस्तारण कर रहे हैं। इस प्रकार, ग्रामीणों और आम जनता की शिकायतों का समाधान नहीं हो रहा, जबकि भ्रष्टाचार के मामलों को नजरअंदाज किया जा रहा है। वहीं, ग्राम निधि योजना में भी कमीशनखोरी के चलते भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुका है।
ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार, कोई कार्रवाई नहीं
भ्रष्टाचार के खिलाफ कई बार कई समाचार एजेंसियां ने प्रमुखता से खबरें प्रकाशित की हैं, लेकिन आज तक किसी भी भ्रष्टाचारी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। जिससे भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद हैं और भ्रष्टाचार की समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, कोई भी हैंडपंप रिबोर नहीं कराया गया, जिससे अधिकारियों और भ्रष्टाचारियों के गठजोड़ का पर्दाफाश हो रहा है।
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