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16 करोड़ का ROB का स्लैब गिरा, ठेकेदार पर सिर्फ 2500 रुपये का जुर्माना

ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप, राजनीतिक और जनहलचल तेज 

चंदौली जिले में पीडीडीयू (मुगलसराय)–गया रेल खंड पर निर्माणाधीन रेल उपरिगामी सेतु (ROB) का एक बड़ा स्लैब भरभराकर ढह गया, मगर इस गंभीर लापरवाही और जोखिम भरे हादसे के बावजूद आरोपी ठेकेदार पर सिर्फ “लापरवाही” की हल्की धारा लगाकर अधिकतम 2500 रुपये का जुर्माना या तीन महीने की जेल तक से छूटने की व्यवस्था ही की गई है। यह फैसला स्थानीय लोगों, सपा नेताओं और विपक्ष के लिए अधिकारियों की मिलीभगत और मामले को रफा‑दफा करने का साफ संकेत माना जा रहा है।

हादसा कैसे हुआ?
18 मार्च की देर रात बनौली खुर्द गांव के पास निर्माणाधीन ROB पर दो पिलरों के बीच स्लैब की ढलाई चल रही थी कि अचानक यह संरचना कमजोर पड़ कर गिर गई। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक तीन मजदूर घायल हुए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। दर्जनों मजदूर बाल‑बाल बच गए; वरना जनहानि भी हो सकती थी। घटना के बाद ठेकेदार और कई मजदूर मौके से गायब हो गए। रेलवे और संबंधित विभाग के अधिकारी तत्काल मौके पर नहीं पहुंचे, जिससे ग्रामीणों और ठेका कर्मियों में आक्रोश और असुरक्षा का भाव और बढ़ गया। 

लापरवाही और घटिया सामग्री के आरोप
स्थानीय ग्रामीणों और मजदूरों का दावा है कि स्लैब की ढलाई में बिना किसी उपयुक्त इंजीनियर की मौजूदगी के ही काम कराया जा रहा था। निर्माण में इस्तेमाल सामग्री भी मानकों के अनुरूप नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है।सपा‑कार्यकर्ता और स्थानीय लोगों ने घटिया निर्माण, घटिया सीमेंट‑सरिया और लापरवाही को हादसे की मुख्य वजह बताया। इन आरोपों के बीच शासन की ओर से एमडी सेतु निगम ने तीन सदस्यीय तकनीकी जांच समिति गठित कर तीन दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं, जबकि एक अवर अभियंता को निलंबित कर दिया गया है।

सांसद‑विधायक धरने पर, अधिकारी भी मौके पर
हादसे की सूचना मिलते ही सपा सांसद वीरेंद्र सिंह और विधायक प्रभुनारायण सिंह यादव मौके पर पहुंचे। उनके साथ सपा कार्यकर्ताओं ने धरना‑प्रदर्शन शुरू कर दिया और पीडब्ल्यूडी, सेतु निगम और ठेकेदार समेत तमाम जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग रखी।सांसद ने इसे सिर्फ दुर्घटना नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण और सरकारी लापरवाही का “जीता‑जागता सबूत” बताया। 

उन्होंने दावा किया कि हादसे में एक मजदूर की मौत हुई है, जबकि प्रशासन इसे अभी तक नहीं स्वीकार कर रहा। पूर्व विधायक मनोज सिंह ‘डब्लू’ ने भी ठेकेदार और अधिकारियों पर कमीशनखोरी का सीधा आरोप लगाया। 

पुलिस ने दर्ज किया “लापरवाही” का मामला
सांसद‑कार्यकर्ता के दबाव के बावजूद पुलिस ने ठेकेदार के खिलाफ बेहद हल्की धारा बीएनएस‑125 (लापरवाही और जल्दबाजी में गुणवत्ताहीन काम करना) में ही मुकदमा दर्ज किया है। इस धारा के तहत अधिकतम 2500 रुपये का जुर्माना और जुर्माने के भुगतान की अनुपस्थिति में अधिकतम 3 महीने की जेल का प्रावधान है।

 स्थानीय आलोचकों का कहना है कि ऐसे गंभीर हादसे के लिए गैर‑इरादतन हत्या या लापरवाही से गंभीर व्यक्तिगत नुकसान की जैसी सख्त धाराएं लगाई जानी चाहिए थीं, न कि यह “लापरवाही” का छोटा सा प्रावधान, जिसे आमतौर पर रोक‑टोक या रफा‑दफा के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 

प्रशासन की तरफ से क्या कहा गया?
घटना के बाद खेत से पानी के रिसाव के कारण पिलर‑सपोर्ट के नीचे चल रही मिट्टी के धंसने से स्लैब गिरा, ऐसा प्रारंभिक कारण एसडीएम दिव्या ओझा ने बताया। उन्होंने इसे अधिकतर तकनीकी और परिस्थितिजन्य खामी का मामला बताकर अफसरों पर सीधे आरोप से बचने की कोशिश की। 

सांसद वीरेंद्र सिंह ने इस तर्क पर सख्त ऐतराज जताते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन असली दोषियों को बचाने और मामले को कमजोर दिखाने की कोशिश कर रहा है।

अधिकारी‑इंजीनियरों पर आरोप और जांच
सेतु निगम की ओर से तीन सदस्यीय तकनीकी जांच समिति के गठन के साथ अवर अभियंता को निलंबित कर दिया गया है, जबकि सहायक अभियंता और परियोजना प्रबंधक चंदौली के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जा चुकी है। 
स्थानीय लोग चाहते हैं कि जांच में यह साफ‑साफ तय हो कि क्या निर्माण में गैर‑मानक सामग्री का उपयोग हुआ, किस स्तर पर इंजीनियर और अधिकारी अनुपस्थित रहे, और क्या इस हादसे ने भविष्य में ऐसे ROB की सुरक्षा को भी डगमगाने का खतरा पैदा किया है। 

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