शिक्षक काली पट्टी बांध कर रहे विरोध,अदालत में राहत‑याचिकाएँ चल रही हैं।
लखनऊ। यूपी के लगभग 1.86 लाख बेसिक शिक्षकों की नौकरी इस समय टीईटी (Teacher Eligibility Test) की अनिवार्यता के कारण “संकट” में दिख रही है।
सुप्रीम कोर्ट और RTE‑NCTE नियम: सुप्रीम कोर्ट के एक सितंबर 2025 के आदेश के बाद कक्षा 1–8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए TET पास होना अनिवार्य माना गया है, चाहे वे पहले से नियुक्त हों या नए हों।
1.86 लाख “बिना टीईटी” शिक्षक: यूपी में ऐसे लगभग 1.86 लाख परिषदीय शिक्षक हैं जो पहले से विद्यालय में कार्यरत हैं, पर अभी तक टीईटी पास नहीं किया है; इनके लिए यह आदेश नौकरी के लिए खतरा बन गया है।
TET परीक्षा दें या फिर?
सरकार और न्यायिक दबाव यही कह रहा है कि या तो शिक्षक TET पास कर लें (CTET/UTET आदि),या फिर RTE‑NCTE नियमों के तहत उनकी नियुक्ति/पदोन्नति पर रोक या अनिश्चितता रह सकती है, और लंबे समय में नौकरी पर सवाल उठ सकते हैं। अभी तक सीधे “नौकरी निकाल देने” का बल्क आदेश नहीं है,लेकिन
पदोन्नति रुकी हुई है, अदालत में राहत‑याचिकाएँ चल रही हैं, शिक्षक “काली पट्टी पहनकर” विरोध भी कर रहे हैं।
SIR और जनगणना टारगेट का क्या कनेक्शन?
SIR और जनगणना व घर‑घर चलने वाले सर्वे आदि काम अलग‑से शिक्षकों पर डाले जाते हैं (जैसे SIR‑डेटा भरवाना, जनगणना/लाइसेंस‑ रजिस्ट्रेशन जैसे टारगेट)। ये टारगेट “नौकरी खतरा” का कानूनी आधार नहीं, बल्कि प्रशासनिक दबाव और अतिरिक्त काम के रूप में देखे जाते हैं।अगर टारगेट पूरे नहीं होते तो शिक्षकों पर अनुशासनात्मक या वेतन‑संबंधी दबाव बन सकता है,लेकिन TET‑नॉन कंप्लायंस ही वह कानूनी बुनियाद है जो 1.86 लाख शिक्षकों की नौकरी के लिए असली “संकट” बन रही है।
शिक्षकों की मांग और अभी क्या स्थिति है?
शिक्षक मांग कर रहे हैं कि 2010 से पहले नियुक्त अनुभवी शिक्षकों को TET से राहत दी जाए, या कम से कम स्पष्ट राहत‑मॉडल (जैसे तमिलनाडु जैसी स्कीम) लागू किया जाए। उधर, सरकार और नियामक यह तर्क दे रहे हैं कि TET अनिवार्यता राष्ट्रीय मानक (RTE/NCTE) है, इसलिए अगर कोर्ट अब इसे ढीला नहीं करता तो अंततः शिक्षकों पर TET पास करने का दबाव ही बना रहेगा।
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