चंदौली के बरहनी ब्लॉक के छोटे से गांव अमड़ा के वीर रामनरेश सिंह ने नंगे पैर बनारस, लखनऊ और दिल्ली तक पैदल यात्रा कर जन समस्याओं को दुनिया के सामने ला खड़ा किया। उन्होंने न केवल गांव में 25 बेड का संयुक्त अस्पताल, राजकीय पशु अस्पताल, विद्युत उपकेंद्र, सिंचाई विभाग का डाक बंगला और साधन सहायता समिति स्थापित करवाई, बल्कि एक मामूली गांव को विकास का जीवंत मॉडल बना दिया। यह साबित किया कि दृढ़ इच्छाशक्ति से असंभव कुछ भी नहीं। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में ब्रिटिश गोलियों का डटकर मुकाबला करने वाले रामनरेश ने जेल यात्राएं सहीं, लेकिन कभी हार न मानी। अमड़ा को आधुनिकता का पहला कदम देकर उन्होंने अपनी अटूट निष्ठा का प्रतीक गढ़ा। उक्त बातें चंदौली सांसद वीरेंद्र सिंह ने शनिवार को रामनरेश मेमोरियल हाल, अमड़ा में आयोजित स्वर्गीय रामनरेश सिंह की 38वीं भव्य श्रद्धांजलि सभा में उनके तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया और भाषण में उनकी कुर्बानियों को सलाम करते हुए कही। बताया कि उनकी यादें अमड़ा को हमेशा प्रेरित करती रहेंगी।ऐसी प्रेरणा आज भी जिले के विकास को गति दे रही है।
वक्ताओं ने गाई अमर गाथाएं: पूर्व विधान परिषद सदस्य अरविंद सिंह, प्रो. रमाकांत सिंह, प्रो. सतीश कुमार राय, सहित अन्य वक्ताओं ने रामनरेश के जीवन की अमर कहानियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। सभा में विशाल जनसमूह उमड़ा—सपा जिलाध्यक्ष सत्यनारायण राजभर, मनोज सिंह, बृजेश कुमार पांडेय, ऋषिकेश सिंह, योगेंद्र सिंह चकरु, कांग्रेस जिलाध्यक्ष अरुण द्विवेदी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण और गणमान्यजन उपस्थित रहे।राजनीतिक दलों का यह एकजुट समागम प्रेरक था। अध्यक्षता प्रो. रमाकांत सिंह ने की, जबकि संचालन डॉ. समर बहादुर सिंह ने किया। सभा में रामनरेश के आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया गया।
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