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दिनदहाड़े 20 लाख की चोरी: सरेहुआ कला में चोरों का छत से धावा

दो महीने बाद भी पुलिस के हाथ खाली, न्याय बनी दूर की कौड़ी 

चंदौली के सकलडीहा कोतवाली क्षेत्र के सरेहुआ कला गांव में बीते 18 फरवरी को दिनदहाड़े हुई सनसनीखेज चोरी की घटना आज भी रहस्य बनी हुई है। पीड़ित अनिल कुमार पाण्डेय का परिवार पिछले दो महीनों से न्याय के लिए पुलिस के द्वार पर दर-दर भटक रहा है, लेकिन न चोरों का सुराग लगा और न ही चोरी के लाखों के माल की बरामदी। यह घटना इलाके की सबसे बड़ी चोरियों में शुमार हो चुकी है, फिर भी पुलिस के आश्वासनों के सिवा कुछ हाथ नहीं लगा।

फोटो: पीड़ित अनिल कुमार पाण्डेय व उनकी पत्नी अनीता पाण्डेय

अनिल पाण्डेय, जो गांव में अपनी दुकान चलाते हैं, उस दिन की घटना को याद कर आज भी सिहर उठते हैं। "सुबह करीब 11 बजे हम परिवार सहित घर से महज 100 मीटर दूर दुकान पर निकल गए थे। दोपहर 2 बजे लौटे तो घर का ताला टूटा हुआ, सामान इधर-उधर बिखरा पड़ा था। चोर छत के रास्ते घुसकर सब उजाड़ गए," अनिल ने दर्द भरी आवाज में बताया। चोरों ने नगद 70 हजार रुपये के साथ लगभग 20 लाख रुपये से ज्यादा के सोने-चांदी के आभूषण लूट लिए। इनमें अनिल की पत्नी अनिता पाण्डेय का मंगलसूत्र, मां फूलमती पाण्डेय का हार-चेन, भाई की पत्नी रूबी पाण्डेय के कंगन, अंगूठी और नेकलेस शामिल हैं। "ये गहने हमारी जिंदगी के पल थे, शादियों और त्योहारों की यादें... सब लुट गया," अनिता ने आंसू पोछते हुए कहा।



घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और छत से घुसने के निशान, टूटे ताले की जांच की। अनिल ने कुछ संदिग्ध लोगों के नाम भी बताए, जिन पर शक था। लेकिन दो महीने गुजर गए, कोई गिरफ्तारी नहीं, कोई माल बरामद नहीं। "हम रोज कोतवाली के चक्कर काटते हैं। थाने वाले कहते हैं 'जल्द होगा', लेकिन कुछ होता नहीं। यह साल की सबसे बड़ी चोरी है, फिर भी उदासीनता!" अनिल ने गुस्से में कहा। परिवार अब हताश है—रोजगार चलाने के लिए उधार लिया, लेकिन न्याय दूर की कौड़ी।

अनिल ने फैसला किया है कि सोमवार को नवागत पुलिस अधीक्षक से मिलकर शिकायत दर्ज कराएंगे। वहीं, एएसपी स्नेहा तिवारी ने कहा, "मामला हमारे संज्ञान में है। थाना प्रभारी को सख्त निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही ब्रेकथ्रू होगा।" लेकिन आंकड़े कुछ और कहते हैं—अभी तक न गिरफ्तारी, न बरामदी। क्या यह चोरों का साहस है या पुलिस की लापरवाही? सरेहुआ कला के ग्रामीणों में डर का माहौल है, हर घर ताले चेक करता है। पीड़ित परिवार की पुकार अब प्रशासन तक पहुंचेगी या यह भी आश्वासनों में दम तोड़ देगी?

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